नीतीश पर सीधे हमले के बाद प्रशांत किशोर ने बंद कमरे में की इन नेताओं से मुलाकात, कुछ बड़ा करने के मूड में PK
नई दिल्ली। बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी बढ़ी हुई है। जेडीयू से निकाले गए चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर अब नीतीश कुमार सरकार को चुनौती देने की कोशिश में जुटे हैं। प्रशांत किशोर ने गुरुवार को हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख जीतन राम मांझी से मुलाकात की, जो 2005 में जदयू में शामिल हुए थे और उनको बिहार के सीएम की कुर्सी सौंप दी गई थी। लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में जदयू के खराब प्रदर्शन के बाद मांझी को हटा दिया गया था।

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इसके एक दिन पहले प्रशांत किशोर ने आरएलएसपी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा से भी मुलाकात की थी, जो भाजपा नीत राजग सरकार में मंत्री रह चुके हैं। ये दोनों दल फिलहाल बिहार में महागठबंधन का हिस्सा हैं। प्रशांत किशोर ने 'बात बिहार की' अभियान के लॉन्च को स्किप कर दिया। इस दौरान वे बिहार के प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकात कर रहे थे। उनका ये कार्यक्रम पहले ही दिन हिट रहा। वहीं, मांझी और कुशवाहा से पीके की मुलाकात के बाद सियासी खिचड़ी पकनी शुरू हो गई है।
माना जा रहा है कि महागठबंधन को मजबूत करने के सिलसिले में विपक्षी दलों के नेताओं के साथ प्रशांत किशोर की ये बैठक हुई है, लेकिन इन नेताओं के बीच किन मुद्दों पर बात हुई, ये साफ नहीं हो सका है। इसके पहले, जेडीयू से निकाले जाने के बाद चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पार्टी मुखिया और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोला था। प्रशांत किशोर ने कहा था, 'हम वह नेता चाहते हैं, जो सशक्त हो, जो बिहार के लिए अपनी बात कहने में किसी का पिछलग्गू ना बने।'
प्रशांत किशोर ने कहा था कि पिछले 1.5 साल से वे हर प्लेटफॉर्म पर कहता रहे हैं कि ऐसे युवाओं को जोड़ना चाहते हैं जो बिहार को आगे लेकर जाएं। उन्होंने इसी कार्यक्रम के दौरान 'बात बिहार की' शुरू करने का ऐलान किया था। उन्होंने बताया था कि इसके तहत बिहार के 8 हजार से ज्यादा गांवों से लोगों को चुना जाएगा जो यह सोचते हों कि अगले 10 साल में बिहार अग्रणी 10 राज्यों में शामिल हो।'












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