'त्रिपुरा में बदल सकती है सत्ता', टिपरा मोथा चीफ का बड़ा दावा, कांग्रेस- CPM को लेकर कही ये बात
त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में इस बार टिपरा मोथा को एक बड़ा फैक्टर माना जा रहा है। भाजपा के आरोपों के बाद पलटवार करते हुए प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा ने बड़ा दावा किया है।

त्रिपुरा विधानसभा चुनाव (Tripura Election 2023) को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हैं। गुरुवार को टिपरा मोथा चीफ प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा (Pradyot Manikya Debbarma) ने भाजपा के प्रदर्शन को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि सत्ता किसी के पास स्थिर नहीं होती। टिपरा मोथा की ओर से ये बयान ऐसे समय में आया है, जब गृह मंत्री अमित शाह ने टिपरा मोथा, कांग्रेस और सीपीएम पर सांठगांठ के आरोप लगाए।
त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में इस बार टिपरा मोथा को एक्स-फैक्टर के रूप में देखा जा रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने टिपरा मोथा का कांग्रेस और सीपीएम के साथ गुप्त गठजोड़ होने का आरोप लगाया था। जिस पर पलटवार करते हुए टिपरमोथा के चीफ प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा ने भाजपा के दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी सिर्फ अपने समर्थकों को लकर अपने साथ चल रही है। एनडीटीवी के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि कांग्रेस सहित कई दलों में उनके पुराने मित्र हैं और जब भी वे चुनावी सभाओं के दौरान मिलने पर वे उनका अभिवादन करते हैं।
टिपरा मोथा चीफ ने कहा कि इस बार भाजपा को बड़ा झटका लगा है। उन्होंने भाजपा ने टिपरा मोथा पर बीजेपी को ओर से लगे आरोपों पर कहा कि मैं अपनी दुनिया का राजा हूं। मैंने नड्डा जी के बयान को सुनना ही नहीं है। जबकि सोनिया जी की बात सुनने के लिए मुझे अपनी अंतरात्मा की आवाज सुननी होगी। मैं अपनी पार्टी का एक स्वतंत्र नेता हूं। गृह मंत्री या कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे जी जो कहते हैं, मुझे उसके फरमान पर नहीं चलना है। मैं मैं अपने दिल की बात मानूंगा। यह मेरा निजी फैसला है। मुझे कोई आदेश नहीं सुनना है। उन्होंने अन्य दलों के साथ अच्छे समीकरण कहा कि कहा, "अगर शिवसेना राष्ट्रपति चुनाव में प्रतिभा पाटिल का समर्थन कर सकती है और ममता बनर्जी प्रणब मुखर्जी को समर्थन दे सकती हैं, तो मैं क्यों नहीं सोच सकता?"
इस बार टिपरा मोथा 60 विधानसभा सीटों में से 42 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं। इसमें अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित 20 सीटें शामिल हैं। पार्टी चीफ माणिक्य देबबर्मा ने ये बात गृह मंत्री अमित शाह के उस आरोप जवाब में कही जिसमें उन्होंने टिपरा मोथा की कांग्रेस और सीपीएम के साथ "गुप्त समझ" और आदिवासी पार्टी को वोट देने का मतलब कम्युनिस्टों को वोट देने की बात कही थी।
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