राज्यसभा चुनाव से पहले राजस्थान में शुरु हुई सियासी हलचल, कांग्रेस ने कहा गहलोत सरकार को अस्थिर करने का किया जा रहा प्रयास
राजस्थान: राज्यसभा चुनाव से पहले राजस्थान में शुरु हुई सियासी हलचल, कांग्रेस विधायक ने लगाए ये संगीन आरोप
नई दिल्ली। राज्यसभा चुनाव से पहले राजस्थान में सियासी हलचल अब शुरु हो चुकी हैं। राजस्थान कांग्रेस मुख्य सचेतक महेश जोशी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो महानिदेशक को एक पत्र लिखा हैं। इस पत्र में कांग्रेस के मुख्य सचेतक एमएलए महेश जोशी ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक और मध्य प्रदेश की तर्ज पर राजस्थान की कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा हैं। हालांकि इस पत्र में किसी पार्टी का नाम नहीं लिखा गया हैं लेकिन पत्र में साफ जाहिर हो रहा है कि उनका इशारा भारतीय जनता पार्टी की ओर हैं।

कांग्रेस बोली-गहलोत सरकार को अस्थिर करने के हो रहे प्रयास
महानिदेशक को लिखे गए पत्र में लिखा गया हैं "मुझे अति विश्वसनीय स्रोतों के माध्यम से पता चला है कि कर्नाटक, मध्यप्रदेश व गुजरात की तर्ज पर राजस्थान में भी हमारे विधायकों और निर्दलीय विधायकों को लुभाने की कोशिश की जा रही है जो सरकार का समर्थन करते हैं, ताकि सरकार को अस्थिर किया जा सके। उन्हें प्रलोभन देकर राज्य की लोकतांत्रिक तौर से चुनी हुई जनसेना में पूर्णतया समर्पित सकरार को अस्थिर करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा हैं। महेश जोशी के पत्र में कहा गया है, 'हमारे विधायकों और उन निर्दलीय उम्मीदवारों, जिन्होंने हमें समर्थन दिया है, को धन शक्ति के साथ लुभाने की कोशिश की जा रही है।

महानिदेशक ने दिया ये आश्वासन
पत्र के अनुसार, यह सब लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने के लिए किया जा रहा है और एंटी करप्शन ब्यूरों को इसकी जांच करनी चाहिए। ये कुत्सित प्रयास न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के सीधे विपरीत है एवं जन अकांक्षाओं के विरुद्ध है, अपितु अवैधानिक, अनैतिक, निन्दनीय व कानून में दंडनीय भी हैं। एसीबी के महानिदेशक आलोक त्रिपाठी ने मुख्य सचेतक महेश जोशी की ओर से पत्र मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि शिकायत पर उचित जांच करते हुए कार्रवाई की जाएगी।

राज्यसभा चुनाव से पहले सामने आया ये पत्र
आपको बता दें एंटी करप्शन को ये यह पत्र ऐसे समय लिखा गया हैं जब राज्यसभा चुनावों के लिए 19 जून को मतदान होना है। राजस्थान में तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है, जिसमें से दो कांग्रेस और एक बीजेपी के पक्ष में जाने की उम्मीद है। हालांकि बीजेपी ने एक के बजाय दो उम्मीदवारों को मैदान में उतरकर कांग्रेस में 'भितरघात या क्रॉस वोटिंग' की अटकलों को बढ़ा दिया है। इस पत्र के बाद राजस्थान की सियासत और गर्मानें वाली हैं।

कांग्रेस ने कहा कि वीर भूमि पर भाजपा के मंसूबे कामयाब नहीं होने देंगे
आपको बता दें हाल ही में मध्यप्रदेश में अपने कटु अनुभव से सबक लेते हुए कांग्रेस अब कोई रिस्क नहीं लेना चाहती हैं। यहीं कारण हैं कि बुधवार शाम को राज्यसभा चुनावों को लेकर चर्चा करने के लिए कांग्रेस व उसके समर्थक विधायक मुख्यमंत्री निवास गए और यहां से उन्हें बसों से दिल्ली राजमार्ग पर स्थित एक रिसॉर्ट पर ले जाया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी वहां पहुंचे राज्यसभा चुनाव पर चर्चा के लिए जयपुर पहुंचे। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस के पास सम्पूर्ण बहुमत है और उसके विधायक किसी प्रलोभन में नहीं आएंगे। भाजपा द्वारा कुछ निर्दलीय विधायकों को कथित तौर पर प्रलोभन दिये जाने के सवाल पर सुरजेवाला ने कहा कि राजस्थान की वीर भूमि में भाजपा के मंसूबे कामयाब नहीं होंगे। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने बयान दिया कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने कहा कांग्रेस भले ही भाजपा पर आरोप लगा रही हैं लेकिन कांग्रेस को अपने ही विधायकों और निर्दलीय विधायकों पर भरोसा नहीं हैं।

क्या हैं राज्यसभा चुनाव का गणित
बता दें राज्य विधानसभा में इस समय कांग्रेस के 107 विधायक हैं, इसमें पिछले साल बीएसपी से टूटकर कांग्रेस में शामिल हुए छह विधायक शामिल हैं। कांग्रेस को 12 निर्दलीयों का समर्थन भी हासिल है। दूसरी ओर, बीजेपी के 72 विधायक हैं, हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी के तीन विधायकों का समर्थन भी उसे हासिल है। प्रत्येक उम्मीदवार को जीतने के लिए आदर्श रूप से 51 प्रथम वरीयता वाले वोटों की आवश्यकता होती है, ऐसे में कांग्रेस की राह आसान लग रही है। बीजेपी के दूसरे उम्मीदवार तभी जीत सकते हैं यदि कांग्रेस के विधायक क्रॉस वोटिंग करें और निर्दलीय विधायक भी बीजेपी के पक्ष में पाला बदल लें। शायद कांग्रेस को ये ही भय सता रहा हैं। इसलिए वो इस बार बहत सतर्क होकर सारे इंतजाम कर रही हैं












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