चीटियों ने किया ऐसा आक्रमण, गांव छोड़कर भागने लगे हैं लोग, 'रानी' की क्यों की जा रही है तलाश ? जानिए

भुवनेश्वर, 6 सितंबर: ओडिशा में बाढ़ का पानी उतरने के बाद एक गांव में जहरीली चीटियों की वजह से दहशत है। लोग चीटियों के चलते कोई काम नहीं कर पा रहे हैं। हर जगह चीटियों का राज कायम हो चुका है। कई लोग तो गांव छोड़कर भाग चुके हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने जिला प्रशासन की मदद के लिए वैज्ञानिकों की टीम को भी उतार दिया है, जो इस भयानक संकट से बचाव का रास्ता सुझा सकें। वैज्ञानिकों का कहना है कि बचाव का रास्ता यही है कि रानी चीटियों की तलाश की जाए, नहीं तो इस संकट से अंत पाना मुश्किल लग रहा है।

पूरे गांव पर जहरीली चीटियों का कब्जा

पूरे गांव पर जहरीली चीटियों का कब्जा

ओडिशा के पुरी जिले में सरकारी स्तर पर एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया गया है। दरअसल, जहरीली चीटियों ने पूरे गांव पर हमला बोल दिया है। मंगलवार को राज्य सरकार के अधिकारियों ने कहा कि कई लोग तो गांव छोड़कर भागने को मजबूर हो गए हैं। घटना चंद्रदेवपुर पंचायत के ब्रह्मानसाही गांव की है। जैसे ही गांव से बाढ़ का पानी उतरा है, लाखों जहरीली चीटियों (red and fire ants) ने धावा बोल दिया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि गांव वालों को खतरनाक चीटियों से छुटकारा दिलाने के लिए लिए जिला प्रशासन और ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों को उतारा गया है।

बिना कीटनाशकों का घेरा लगाए कोई काम करना असंभव

बिना कीटनाशकों का घेरा लगाए कोई काम करना असंभव

इस समय ब्रह्मानसाही गांव की स्थिति ये है कि कोई भी कोना चीटियों से नहीं बचा हुआ है। घर, सड़क, खेत से लेकर पेड़ों पर भी चीटियां ही चीटियां दिख रही हैं। चीटियों की वजह से लोगों का जीना मुहाल हो चुका है। कई लोगों को तो चीटियों ने काटा है तो उनके शरीर का वह हिस्सा सूज गया है और त्वचा पर बहुत ही ज्यादा जलन की शिकायत कर रहे हैं। चीटियों का कहर ऐसा है कि मवेशी और घर में पाई जाने वाली छिपकिलियों के भी जान के लाले पड़ गए हैं। हालात का अंदाजा लगाने के लिए यही काफी है कि चाहे बैठना हो, खड़ा होना हो या फिर सोना हो, कीटनाशक पाउडर का घेरा लगाए बिना संभव ही नहीं रह गया है।

गांव छोड़कर भाग गए कई परिवार

गांव छोड़कर भाग गए कई परिवार

स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी तक कम से कम गांव के तीन परिवार चीटियों के आतंक के चलते अपना घर छोड़कर भाग गए हैं और रिश्तेदारों के यहां जाकर रहने को मजबूर हैं। लोकनाथ दास नाम के एक ग्रामीण ने बताया कि उसने अपनी जिंदगी में पहले इस तरह की घटना कभी नहीं देखी, जबकि बाढ़ पहले भी आती रही है। आजकल पास के एक गांव में अपने परिवार के साथ एक रिश्तेदार के साथ रह रहीं रेनुबाला दास ने कहा, 'चीटियों ने हमारी जिंदगी को दुखी कर दिया है। हम ठीक से खा, सो या बैठ भी नहीं पा रहे हैं। चीटियों के डर से बच्चे पढ़ाई भी नहीं कर पा रहे हैं।'

कीटनाश ही बचाव का उपाय

कीटनाश ही बचाव का उपाय

ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी के वरिष्ठ वैज्ञानिक संजय मोहंती का कहना है कि यह गांव एक नदी और झाड़ीदार जंगलों से घिरा हुआ है। उनके मुताबिक, 'नदी के तटबंधों और झाड़ियों पर रहने वाली चीटियां गांव में चली गईं, क्योंकि उनके आवास बाढ़ के पानी से भर गए थे।' उन्होंने कहा किया यह गांव में नई घटना है, जहां करीब 100 परिवार रहते हैं। आगे की योजना के बारे में उन्होंने बताया, 'हालांकि, हम लोग यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि चीटियां आ कहां से रही हैं। एक बार जगह का पता चल जाए, दो मीटर के दायरे में कीटनाशक का छिड़काव किया जा सकता है।'

सबसे पहले रानी चीटियों को खोजकर मारना जरूरी- वैज्ञानिक

सबसे पहले रानी चीटियों को खोजकर मारना जरूरी- वैज्ञानिक

संजय मोहंती ने सबसे जरूरी बात रानी चीटियों के बारे में बताई, जिनकी तलाश सरगर्मी से शुरू की जा चुकी है। उन्होंने कहा, 'इस संकट को खत्म करने के लिए, हमारा प्राथमिक उद्देश्य रानी चीटियों को ढूंढना और मारना है। वे इलाके में इन चींटियों के विस्फोट के लिए जिम्मेदार हैं।' उन्होंने जानकारी दी कि इन चीटियों के बारे में विशेष जानकारी जुटाने के लिए उनके सैंपल लैबोरेटरी में भेजे गए हैं। वैज्ञानिक ने बताया कि 2013 में चक्रवात फैलिन के बाद जिले के सदर ब्लॉक के डंडा गांव में भी ऐसी ही घटना देखने को मिली थी।

कभी किसी ने नहीं सोचा था कि ऐसा भी हो सकता है

कभी किसी ने नहीं सोचा था कि ऐसा भी हो सकता है

वहीं बीडीओ रश्मिता नाथ के मुताबिक ऐसी चीटियां इलाके के लिए नई नहीं हैं, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि ये सामान्य जीवन को प्रभावित कर देंगी। हालांकि, लोगों ने चीटियों के काटने की वजह से सूजन और त्वचा में जलन की शिकायतें जरूर की हैं, लेकिन अभी तक इसकी वजह से किसी को अस्पताल में दाखिल नहीं कराया गया है। उन्होंने कहा, 'मैं गांव में गई थी और पाया कि चीटियां हर जगह पर हैं। स्थानीय लोगों ने अपनी ओर से हर संभव कोशिश कर ली, लेकिन चीटियों को नहीं भगा पाए।' उनका कहना है कि झाड़ियों की सफाई और कीटनाशकों के छिड़काव का आदेश दिया गया है। प्रभावित लोगों के इलाज के लिए मेडिकल टीम भी गांव में पहुंच रही है। (इनपुट-पीटीआई और तस्वीरें- प्रतीकात्मक)

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+