मेहुल चौकसी के प्रत्यर्पण को लेकर भारत की अपील पर विचार करने को तैयार एंटिगुआ सरकार

नई दिल्ली। पीएनबी घोटाले में बैंक को करोड़ों रुपए का चुना लगाने वाले मेहुल चौकसी के प्रत्यर्पण के लिए एंटिगुआ की सरकार ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। एंटिगुआ सरकार ने इस बात के संकेत दिए हैं कि वह मेहुल चौकसी के प्रत्यर्पण की भारत की सही अपील पर विचार कर सकता है। आपको बता दें कि मेहुल चौकसी पीएनबी घोटाले में मुख्य आरोपी नीरव मोदी का अंकल है और वह भारत में फर्जीवाड़ा करके फरार हो गया है। जानकारी के अनुसार चौकसी ने एंटिगुआ की नागरिकता ले ली है।

पिछले वर्ष मिली नागरिकता

पिछले वर्ष मिली नागरिकता

डेली ऑब्सर्वर की रिपोर्ट के अनुसार कैबिनेट प्रेस ब्रीफिंग के दौरान एंटिगुआ और बरमूडा सरकार नियमों के अनुसार भारत की अपील को स्वीकार कर सकती है। यह बयान कैबिनेट की बैठक के बाद दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चौकसी को एंटिगुआ की नागरिकता देने पर पिछले वर्ष नवंबर माह में चर्चा की गई थी। बैठक के दौरान कैबिनेट में कहा गया है कि भारत के साथ एंटिगुआ सरकार की कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है और चौकसी के खिलाफ किसी भी तरह का आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।

राहुल ने खड़ा किया सवाल

राहुल ने खड़ा किया सवाल

कैबिनेट में कहा गया है कि अभी तक भारत की ओर से किसी भी तरह की आधिकारिक मांग नहीं की गई है जिसमे चौकसी को भारत को सौंपने की अपील की गई हो। वहीं चौकसी को जिस तरह से एंटिगुआ का पासपोर्ट मिला है उसपर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सवाल खड़ा करते हुए कहा था कि आखिर कैसे चौकसी को वहां का पासपोर्ट मिल गया जबकि उसके खिलाफ भारत में मामला चल रहा है। उन्होंने ट्वीट करके कहा था कि एंटिगुआ का पासपोर्ट हासिल करने में 3-4 महीन का समय लगता है, ऐसे में चौकसी के खिलाफ आपराधिक मामला होने के बाद भी उसे कैसे वहां का पासपोर्ट मिल गया।

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13400 करोड़ रुपए का लगाया चुना

13400 करोड़ रुपए का लगाया चुना

रतलब है कि ईडी ने गुरुवार को मुंबई की स्पेशल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और नीरव मोदी व मेहुल चौकसी को भगोड़ा घोषित करने की मांग की थी, जिसके बाद भारत में दोनों की संपत्ति को सीज किया जा सकता है। नीरव मोदी और चौकसी के खिलाफ ईडी और सीबीआई जांच कर रही है। दोनों पर आरोप है कि उन लोगों ने मिलकर बैंक को 13400 करोड़ रुपए का चूना लगाया है। यह घोटाला 2011 में शुरू हुआ था जोकि पिछले वर्ष जनवरी माह में लोगों के सामने आया है, जब बैंक के कर्मचारियों के खिलाफ जांच एजेंसियों ने जांच शुरू की थी

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