पीएमसी संकट: तनाव के कारण 73 वर्षीय महिला की कार्डिक अरेस्ट से मौत
सोलापुर। पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (पीएमसी) के संकट के कारण लोग काफी परेशान हैं। अब महाराष्ट्र के सोलापुर में 73 साल की भारती सदरंगनी की कार्डिक अरेस्ट से मौत हो गई है। वह पीएमसी संकट के कारण काफी तनाव में थीं। उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि भारती के परिवार के पीएमसी बैंक में 2.25 करोड़ रुपये जमा हैं, ये खाता उनकी बेटी के नाम है।

भारती के दामाद चंदन का कहना है कि वह स्वस्थ्य थीं और उन्हें सेहत से संबंधित कोई परेशानी नहीं थी। अभी तक 4355 करोड़ के पीएमसी घोटाले के सामने आने के बाद से पांच लोगों की मौत हो चुकी है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने लोगों के पैसे निकालने पर कुछ प्रतिबंध लगा दिए थे। पहले केवल एक हजार रुपये निकालने की बात कही गई थी लेकिन लोगों के भारी विरोध प्रदर्शन को देखते हुए ये सीमा बढ़ा दी गई थी।
इस संकट के चलते सबसे पहले संजय गुलाठी (51) की मौत हुई थी। वह पूर्व जेट एयरवेज अधिकारी थे। इस साल फरवरी में कंपनी के घाटे में जाने के बाद उनकी नौकरी चले गई थी। उनके पीएमसी बैंक में 90 लाख रुपये फंसे हुए थे। गुलाठी के परिवार ने दावा किया था कि उनकी मौत तनाव के कारण हुई है क्योंकि उनका लाखों रुपया पीएमसी में फंस गया है।
एक अन्य शख्स की मौत भी हार्ट अटैक से हुई थी, जबकि एक अन्य ने आत्महत्या कर ली थी। इसमें चौथी मौत 18 अक्टूबर को हुई है। इस बैंक में मुरलीधर धरा नामक इस शख्स के कई खाते थे। इनके परिवार ने दावा किया था कि इनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे, जिसके चलते मुरलीधर धरा की सर्जरी नहीं हो पाई।
बता दें पीएमसी बैंक घोटाला मामले में बैंक की आंतरिक टीम की जांच में यह बात सामने आई है कि बैंक रिकॉर्ड से 10.5 करोड़ रुपये गायब हैं। मामले की जांच कर रही टीम को एचडीआईएल और इससे जुड़ी कंपनियों द्वारा जारी किए गए कई चेक मिले हैं जिसमे चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इन चेक को बैंक में कभी जमा ही नहीं किया गया, बावजूद इसके नगदी दे दी गई। हालांकि पहले कहा जा रहा था की पीएमसी का पूरा घोटाला 4355 करोड रुपये का है, लेकिन हकीकत में यह 6500 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का घोटाला है।
वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी खाताधारकों की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। याचिका में पैसे की निकासी पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ आरबीआई को निर्देश देने की मांग की गई थी। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे राहत के लिए संबंधित उच्च न्यायालयों का रुख कर सकते हैं।












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