'परीक्षा पे चर्चा' में पीएम मोदी ने स्‍टूडेंट्स को बताया मेमोरी शार्प करने का फॉर्मूला

नई दिल्‍ली। पीएम मोदी ने बुधवार को परीक्षा पे चर्चा किया। 'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम के जरिए पीएम मोदी ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से संवाद किया। वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के माध्‍यम से पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि वो परीक्षा को अवसरों के तौर पर न देखें, न कि जीवन के अंत के तौर पर। पीएम मोदी ने कहा कि एक बात मैं देशवासियों, अभिभावकों, अध्यापकों को बताना चाहता हूं कि ये परीक्षा पर चर्चा है लेकिन सिर्फ परीक्षा की ही चर्चा नहीं है। बहुत कुछ बातें हो सकती हैं, एक नए आत्मविश्वास पैदा करना है। उन्‍होंने कहा कि जैसे अपने घर में बैठ कर बाते करते हैं, अपनों के बीच बात करते हैं, दोस्तों के साथ बात करते हैं, आइए हम भी ऐसे ही बाते करेंगे।

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    परीक्षा पे चर्चा में बोले पीएम मोदी- जिंदगी बहुत लंबी है, एग्‍जाम महज एक पड़ाव

    पीएम मोदी ने कहा कि ये परीक्षा पर चर्चा का पहला वर्चुअल एडिशन है। हम पिछले एक साल से कोरोना के बीच जी रहे हैं और उसके कारण हर किसी को नया इनोवेशन करना पड़ रहा है। मुझे भी आप लोगों से मिलने का मोह इस बार छोड़ एक नए फॉर्मेट में आपके बीच आना पड़ रहा है। उन्‍होंने कहा कि पहले मां-बाप बच्चों के साथ कई विषयों पर जुड़े रहते थे और सहज भी रहते थे। आजकल मां-बाप करियर, पढ़ाई सैलेबस तक बच्चों के साथ इंवॉल्व रहते हैं। अगर मां-बाप ज्यादा इंवॉल्व रहते हैं, तो बच्चों की रुचि, प्रकृति, प्रवृत्ति को समझते हैं और बच्चों की कमियों को भरते हैं।

    पीएम ने कहा कि हमारे यहां एग्जाम के लिए एक शब्द है- कसौटी। मतलब खुद को कसना है, ऐसा नहीं है कि एग्जाम आखिरी मौका है। बल्कि एग्जाम तो एक प्रकार से एक लंबी जिंदगी जीने के लिए अपने आप को कसने का उत्तम अवसर है। पीएम मोदी ने कहा कि हमें बच्चों पर दबाव नहीं बढ़ाना चाहिए। अगर बाहर का दबाव खत्म हो गया तो परीक्षा का दबाव कभी महसूस नहीं होगा। आत्मविश्वास फलेगा-फूलेगा।

    बच्चों को घर में तनाव मुक्त जीना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि आजकल बच्चों का आकलन परीक्षा के नतीजों तक ही सीमित हो गया है। परीक्षा में अंकों के अलावा भी बच्चों में कई ऐसी चीजें होती हैं जिन्हें अभिभावक देख नहीं पाते। परीक्षा एक प्रकार से लंबी जिंदगी जीने का अवसर है। समस्या तब होती है, जब हम परीक्षा को जीवन-मरण का सवाल बना देते हैं।

    पीएम ने आगे कहा कि खाली समय एक अवसर है। आपके दिनचर्या में खाली समय के पल होने ही चाहिए, नहीं तो ज़िंदगी रोबोट की तरह हो जाती है। खाली समय में आप ऐसा कुछ कर सकते हैं जिससे आपको सुख मिलता हो। आपको यह भी ध्यान रखना है कि खाली समय में हमें क्या नहीं करना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि पढ़ाई के लिए आपके पास दो घंटे हैं तो हर विषय को समान भाव से पढ़िए। पढ़ाई की बात है तो कठिन चीज को पहले लीजिए, आपका माइंड फ्रेश है तो कठिन चीज को पहले लेने का प्रयास कीजिए। कठिन को हल कर लेंगे तो सरल तो और भी आसान हो जाएगा।

    उन्‍होंने कहा कि जब मैं मुख्यमंत्री था, उसके बाद मैं प्रधानमंत्री बना तो मुझे भी बहुत कुछ पढ़ना पढ़ता है। बहुत कुछ सीखना पड़ता है। चीजों को समझना पड़ता है। तो मैं क्या करता था कि जो मुश्किल बातें होती हैं, मैं सुबह जो शुरु करता हूं तो कठिन चीजों से शुरु करना पसंद करता हूं। आपको भले कुछ विषय मुश्किल लगते हों, ये आपके जीवन में कोई कमी नहीं है। आप बस ये बात ध्यान रखिए कि मुश्किल लगने वाले विषयों की पढ़ाई से दूर मत भागिए। उन्‍होंने कहा कि जो लोग जीवन में बहुत सफल हैं, वो हर विषय में पारंगत नहीं होते। लेकिन किसी एक विषय पर, किसी एक सब्जेक्ट पर उनकी पकड़ जबरदस्त होती है।

    पीएम मोदी ने कहा कि किसी को भी motivate करने का पहला पार्ट है- Training। Proper training एक बार बच्चे का मन train हो जाएगा तब उसके बाद motivation का समय शुरू होगा। आपका बच्चा 'पर-प्रकाशित' नहीं होना चाहिए, आपका बच्चा स्वयं प्रकाशित होना चाहिए। बच्चों के अंदर जो प्रकाश आप देखना चाहते हैं, वो प्रकाश उनके भीतर से प्रकाशमान होना चाहिए।

    पीएम ने कहा कि बच्चों के पीछे इसलिए भागना पड़ता है क्योंकि उनकी रफ्तार हमसे ज्यादा है। बच्चों को बताने, सिखाने, संस्कार देने की जिम्मेदारी परिवार की ही है, लेकिन कई बार बड़े होने के साथ हमें भी मूल्यांकन करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि हमने जो अपना भाव-विश्व बनाया है, वो जब व्यवहार की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है तब बच्चों के मन में अंतरद्वंद शुरु हो जाता है। पीएम मोदी ने कहा कि बच्चे बड़े स्मार्ट होते हैं। जो आप कहेंगे, उसे वो करेंगे या नहीं करेंगे, यह कहना मुश्किल है, लेकिन इस बात की पूरी संभावना होती है कि जो आप कर रहे हैं, वो उसे बहुत बारीक़ी से देखता है और दोहराने के लिए लालायित हो जाता है। उन्‍होंने आगे कहा कि खाली समय में हमें अपनी Curiosity, जिज्ञासा बढ़ाने की और ऐसी कौन सी चीजें हम कर सकते हैं जो शायद बहुत productive हो जाएगी।

    पीएम मोदी ने ये कहा कि अपने Thoughts को, emotions को, express का एक creative तरीका दीजिए। Knowledge का दायरा कई बार वहीं तक सीमित होता है, जो आपको उपलब्ध है, जो आपके आसपास है। जब आप खाली समय earn करते हैं तो आपको उसकी सबसे ज्यादा value पता चलती है। इसलिए आपकी लाइफ ऐसी होनी चाहिए कि जब आप खाली समय earn करें तो वो आपको असीम आनंद दे।

    पीएम मोदी ने कहा कि करियर के चुनाव में एक पक्ष ये भी है कि बहुत से लोग जीवन में आसान रूट की तलाश में रहते हैं। बहुत जल्द वाह-वाही मिल जाए, आर्थिक रूप से बड़ा स्टेट्स बन जाए। ये इच्छा ही जीवन में कभी-कभी अंधकार का शुरुआत करने का कारण बन जाती है। उन्‍होंने कहा कि कोरोना काल में अगर काफी कुछ खोया है, तो बहुत कुछ पाया भी है। कोरोना की सबसे पहली सीख तो यही है कि आपने जिस चीज को, जिन-जिन लोगों को मिस किया, उनकी आपके जीवन में कितनी बड़ी भूमिका है, ये कारोना काल में ज्यादा पता चला है। पीएम ने बताया कि आपका मन अशांत रहेगाा, चिंता में रहेगा, तो इस बात की संभावना बहुत ज्यादा होगी कि जैसे ही आप Question Paper देखेंगे, कुछ देर के लिए सबकुछ भूल जाएंगे। इसका सबसे अच्छा उपाय यही है कि आपको अपनी सारी टेंशन परीक्षा हॉल के बाहर छोड़कर जाना चाहिए।

    पीएम मोदी ने कहा Involve, internalize, associate और visualize। Memory को sharp करने के लिए इस formula पर आप चल सकते हैं। वो बातें जिनसे आप पूरी तरह से जुड़ गए हैं, मग्न हो गए हैं, वो बातें जो आपका हिस्सा बन गई हैं, आपके विचार प्रवाह का हिस्सा बन गई हैं। उन्हें आप कभी भूलते नहीं हैं। उन्‍होंने कहा कि सपनों में खोए रहना अच्छा लगता है। सपने देखना अच्छी बात है, लेकिन सपने को लेकर के बैठे रहना और सपनों के लिए सोते रहना ये तो सही नहीं है। सपनों से आगे बढ़कर, अपने सपनों को पाने का संकल्प ये बहुत महत्वपूर्ण है। उन्‍होंने कहा कि आवश्यक है कि दसवीं क्लास में, बारवीं क्लास में भी आप अपने आसपास के जीवन को Observe करना सीखिए। आपके आसपास इतने सारे प्रोफेशन हैं, Nature of jobs हैं।

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