PM Modi Sudan में फंसे 4000 भारतीयों की स्थिति से चिंतित. नेवी-IAF चीफ संग हाईलेवल मीटिंग, तीन अहम निर्देश दिए
PM Modi Sudan में उपजे संकट की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार सूडान में हिंसा के बीच फंसे लगभग 4000 से अधिक भारतीयों तक समुचित मदद पहुंचे, इसके प्रयास किए जा रहे हैं। जानिए अपडेट

PM Modi Sudan में उपजे संकट को लेकर सक्रिय हैं। उन्होंने हाईलेवल बैठक बुलाई है, जिसमें हालात की समीक्षा की जाएगी। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के मद्देनजर प्रधानमंत्री मोदी की बैठक काफी अहम मानी जा रही है।
गौरतलब है कि सूडान के संघर्षपूर्ण हालात पर प्रधानमंत्री हालात पर करीबी नजर रख रहे हैं। गत दिनों विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी कहा था कि सरकार भारतीयों की सुरक्षा और उनकी वापसी के लिए प्रतिबद्ध है। जयशंकर ने न्यूयॉर्क में UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात की।
सैन्य अधिकारियों संग बैठक
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, नौसेना और वायुसेना प्रमुख के अलावा, सचिव सीपीवी औसाफ सईद और खाड़ी देशों के राजदूतों ने भाग लिया। भारतीयों को सुरक्षित निकालने पर मंथन की संभावना है।
PM Narendra Modi chairs a high-level meeting to review the situation related to Indians in Sudan. pic.twitter.com/gkklP9oj0U
— ANI (@ANI) April 21, 2023
पीएम ने तीन जरूरी निर्देश दिए
संकटग्रस्त सूडान में भारतीयों की स्थिति की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक में पीएम मोदी ने शुक्रवार को तीन अहम निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सतर्क रहें, घटनाओं पर बारीकी से नजर रखें और सूडान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा का लगातार मूल्यांकन करें।
प्रधानमंत्री ने झड़प के दौरान गोली लगने से मारे गए एक भारतीय, 48 वर्षीय- अल्बर्ट ऑगस्टीन की मौत पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सूडान में रहने वाले देशों के साथ करीबी संवाद बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
पीएम को बताया गया कि सूडान में फंसे नागरिकों की हर संभव मदद की जा रही है। इस वर्चुअल बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, विदेश सचिव विनय क्वात्रा, सूडान में भारत के राजदूत बीएस मुबारक के साथ-साथ मिस्र और रियाद के दूत मौजूद रहे।
बैठक में एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी और नौसेना स्टाफ के प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार, सचिव डॉ औसाफ सईद (कांसुलर, पासपोर्ट, वीजा और प्रवासी भारतीय मामले) भी मौजूद रहे।
बैठक के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान में कहा गया, पीएम मोदी ने अधिकारियों से आकस्मिक निकासी योजना तैयार करने, तेजी से बदलते सुरक्षा परिदृश्य और विभिन्न विकल्पों की व्यवहार्यता को ध्यान में रखते हुए तैयार रहने को कहा।
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गौरतलब है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले कई लोगों का सूडान में फंसना राजनीतिक रूप लेता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कर्नाटक के हक्की पिक्की आदिवासी समुदाय के कई सदस्य सूडान में फंसे हैं।
हक्की पिक्की पक्षी पकड़ने वाले होते हैं। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सूडान में फंसे कर्नाटक के लोगों पर एक ट्वीट किया था। विदेश मंत्री जयशंकर ने उनसे राजनीति न करने की अपील की थी।
यूक्रेन में चला था ऑपरेशन गंगा
बता दें कि इससे पहले ऑपरेशन गंगा के तहत यूक्रेन में फंसे हजारों छात्रों को एयरलिफ्ट कराया गया था। रूस के साथ यूक्रेन की लड़ाई के कारण हजारों बच्चों को अपनी मेडिकल एजुकेशन छोड़कर लौटना पड़ा था।
इससे पहले सूडान संकट के बीच पीएम की हाईलेवल बैठक के बारे में इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार सूत्रों ने बताया कि सूडान संकट के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सूडान की राजधानी खार्तूम में हजारों भारतीयों का जीवन दांव पर है। 4,000 से अधिक भारतीय संकटग्रस्त राष्ट्र सूडान में फंसे हुए हैं। सूत्रों ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी सूडान में भारतीयों की स्थिति के बारे में जानकारी लेंगे।
बता दें कि सूडान पिछले सात दिनों से देश की सेना और एक अर्धसैनिक समूह के बीच घातक संघर्ष के कारण सुर्खियों में है। हिंसा में अब तक लगभग 200 लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं।

खबरों के मुताबिक अंधाधुंध गोलीबारी के कारण भारतीयों को भोजन, पानी, दवाओं और बिजली की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। कम से कम 50 लाख लोग घरों में शरण लिए हुए हैं। इन लोगों के पास बिजली, भोजन या पानी जैसी बुनियादी चीजें भी नहीं है। संचार बुरी तरह बाधित है।
सूडान के घातक संघर्ष के बीच शुक्रवार को विदेश मंत्री (EAM) एस जयशंकर ने कहा कि सरकार सूडान में फंसे भारतीयों के साथ लगातार संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, सूडान में स्थिति "बहुत तनावपूर्ण" है।
सरकार ने आश्वस्त किया है कि आकस्मिक योजनाओं और संकट में फंसे भारतीयों की संभावित सुरक्षित निकासी पर काम करने सहित भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने पर पूरा फोकस है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार को कहा था, तनावपूर्ण हालात के बीच सरकार का ध्यान वहां फंसे लोगों की सुरक्षा पर है। सरकार अलग-अलग चैनलों के माध्यम से संपर्क कर रही है। कोई भी निकासी योजना जमीनी स्थिति पर निर्भर करेगी।
बुधवार को आई रिपोर्ट्स में सरकार के सूत्रों के हवाले से लिखा गया कि हिंसा प्रभावित सूडान से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत सरकार, अमेरिका, ब्रिटेन और सऊदी अरब सहित विभिन्न देशों के साथ संपर्क में है।
विदेश मंत्री जयशंकर संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र समेत कई देशों में अपने समकक्षों से बात कर चुके हैं। भारतीय दूतावास ने गत 16 अप्रैल को कहा था कि सूडान में काम करने वाले एक भारतीय नागरिक की गोली लगने से मौत हो गई।
केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन के मुताबिक केरल के कन्नूर जिले में रहने वाले अल्बर्ट ऑगस्टाइन के परिवार को सभी जरूरी मदद मुहैया कराई जाएगी। उनकी डेड बॉडी को लाने के प्रयास हो रहे हैं।
सूडान हिंसा, भारत कितना प्रभावित
बता दें कि उत्तरी अफ्रीकी देश सूडान दो शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वी सैन्य गुटों के बीच लड़ाई हो रही है। राजधानी खार्तूम समेत सूडान के अन्य इलाकों में भी लड़ाई की खबरें हैं। इस कारण राष्ट्रव्यापी नागरिक संघर्ष का खतरा पैदा हो गया है।
सूडान के अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बयान के अनुसार, शुक्रवार सुबह 6 बजे (0400 GMT) से 72 घंटे के युद्धविराम पर सहमत हो गया है। हालांकि, खार्तूम और बहरी में गोलीबारी जारी रहने की सूचना मिली है।
आरएसएफ ने शुक्रवार तड़के ईद-उल-फितर की छुट्टी की शुरुआत के मौके पर लोगों को अपने परिजनों से मिलने की अनुमति दी। छह दिनों की लड़ाई के बाद संघर्ष विराम की घोषणा की गई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सूडान के पैदल सैनिकों को शहरों में तैनात किया गया है।












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