पीएम बोले कि चीफ जस्टिस दिल से बोल रहे थे और मैं मन से सुन रहा था

डॉ राधाकृषणन ने कहा था कि कानून ऐसी चीज है जो लगातार बदलती रहती है, कानून लोगों के स्वभाव के साथ बदलना चाहिए।

इलाहाबाद। इलाहाबाद हाई कोर्ट के 150वीं वर्षगांठ के मौके पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का जो न्याय विश्व है उस न्याय विश्व में इलाहाबाद 150 साल पुरानी यह फौज, भारत के न्याय विश्व का यह तीर्थ क्षेत्र है, उस तीर्थ क्षेत्र में इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर आप सबके बीच आकर के आपको सुनने और समझने का अवसर मिला, कुछ बात मुझे बताने का मौका मिला इसे मैं अपना गौरव मानता हूं।

पीड़ा का मैं अनुभव कर रहा था

पीड़ा का मैं अनुभव कर रहा था

चीफ जस्टस साहब अभी अपने दिल की बात बता रहे थे उसे मैं मन से सुन रहा था, उनके हर शब्द में पीड़ा का मैं अनुभव कर रहा था। भारत के न्याय विश्व को यह नेतृत्व में, मुझे विश्वास है उनके संकल्प पूरे होंगे। जहां तक सरकार का सवाल है मैं विश्वास दिलाता हूं हमारा जो भी योगदान है, हम उसे पूरा करने का भरपूर प्रयास करेंगे।

राधाकष्णन को किया याद

पीएम ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के 100वीं स्थापना दिवस के मौके पर डॉ राधाकृषणन ने कहा था कि कानून ऐसी चीज है जो लगातार बदलती रहती है, कानून लोगों के स्वभाव के साथ बदलना चाहिए, कानून को आधुनिक प्रवृत्तियों और चुनौतियों का भी ध्यान रखना चाहिए। किस तरह की जिंदगी हम गुजारना चाहते हैं, कानून का क्या कहना है, कानून का अंतिम लक्ष्य क्या है, सभी लोगों का कल्याण हो, सिर्फ अमीर लोगों का कल्याण नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक का कल्याण हो, यही कानून का लक्ष्य है और इसे पूरा किए जाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

हम कोई भी निर्णय करे...

गांधी जी कहते थे कि हम कोई भी निर्णय करे, यह सही है कि गलत है, इसकी कसौटी क्या हो, गांधी ने सरकारों के लिए खास कहा था कि आप पलभर के लिए हिंदुस्तान के आखिरी छोर पर बैठे लोगों के बारे में सोचिए अगर वह सकारात्मक है तो बेझिझकर आगे बढ़िए, इस भाव को हम कैसे जीवन का हिस्सा बनाएं, कैसे यह हमारे जीवन का मकसद बन सकता है, यह काफी अहम है, यह परिवर्तन का पुरोधा बन जाता है।

जादी का सपना था

हर हिंदुस्तानी के दिल में आजादी का सपना था, गांधी जी ने लोगों के दिल में यह सपना जगाया था। इलाहाबाद ने आजादी के आंदोलन को बहुत बड़ी ताकत दी थी। क्या वह ललक फिर से हो सकती है कि जब आजादी के 75 साल पूरे हो तो लोग यह सोचे कि 2022 में हम देश को इस स्थान पर ले जाएंगे। भारत सरकार भी न्याय व्यवस्था को तकनीक के माध्यम से सरल बनाया जा रहा है। आज के वकील को घंटों तक फाइलों को खंगालना नहीं पड़ता है, अब वह गूगल गुरु से पूछ लेते हैं। अत्याधुनिक जानकारी के साथ तर्क करने का दौर शुरु हुआ है। जब कोर्ट के अंदर यह बदलाव आएगा। तारीख लेने के लिए शार्पनेस की जरूरत नहीं होती है, बल्कि मसलों को सुलझाने के लिए शार्पनेस की जरूरत होती है।

वीडियो कांफ्रेंसिंग

मोबाइल पर तारीखें देने की परंपरा क्यों नहीं खड़ी की जाए, क्यों ना वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई की जाए, जेल से कैदियों को कोर्ट ले जाने में कितना खर्च होता है और इस दौरान क्या क्या होता है यह सबको मालूम है, अब योगी जी आए हैं तो शायद वह बंद होगा। भारत सरकार का प्रयास है कि न्याय व्यवस्था को भी नई तकनीक मिले। मैं स्टार्ट अप वालों से कहुंगा कि वह न्याय व्यवस्था को भी कुछ नई तकनीक दें, इससे न्याय व्यवस्था को प्रगति मिलेगी।

1200 कानून को खत्म किया

1200 कानून को खत्म किया

युग बदल चुका है, जब मैं चुनाव प्रचार कर रहा था 2014 में, मैं देश के कई लोगों के लिए अपिरिचत था, एक छोटे से समारोह में में मैंने कहा था कि मैं नए कानून कितने बनाउंगा मुझे पता नहीं है, लेकिन हर रोज एक कानून खत्म करुंगा। आज मुझे खुशी है, अभी पांच साल पूरे नहीं हुआ है हम 1200 कानून खत्म कर दिया है, तकरीबन हर रोज एक कानून हमे खत्म किया है।

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