PM मोदी ने संसद के सामने क्या-क्या रखे 11 संकल्प, कहा- इसे सरकार और जनता दोनों माने
PM Modi 11 Sankalps: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार 14 दिसंबर को संविधान पर चर्चा के बाद बहस का जवाब दिया। भारत के संविधान की 75वीं वर्षगांठ पर आज लोकसभा में बहस हुई। पीएम मोदी का संबोधन लोकसभा में डेढ़ घंटे ज्यादा चला। अपने संबोधन के आखिर में पीएम नरेंद्र मोदी ने 11 संकल्प देशवासियों के सामने रखे।
पीएम मोदी ने कहा कि इस संकल्प को सरकार, विपक्ष और देश की जनता को भी ईमानदारी ने मानना चाहिए। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत से लेकर धर्म के नाम पर आरक्षण ना करने की बात कही है। आइए जानें पीएम मोदी ने 11 संकल्प क्या-क्या सदन के सामने रखे हैं?

PM मोदी के 11 संकल्प, जो उन्होंने सदन के सामने रखे?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ''आज मैं इस सदन के पवित्र मंच से 11 संकल्प सदन के सामने रखना चाहता हूं...
- 1. चाहे नागरिक हो या सरकार हो... सभी अपने कर्तव्यों का पालन करें।
- 2. हर क्षेत्र, हर समाज को विकास का लाभ मिले, सबका साथ-सबका विकास हो।
- 3. भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस हो, भ्रष्टाचारी की सामाजिक स्वीकार्यता न हो।
- 4. देश के कानून, देश के नियम... देश की परंपराओं के पालन में देश के नागरिकों को गर्व होना चाहिए, गर्व का भाव हो।
- 5. गुलामी की मानसिकता से मुक्ति हो, देश की विरासत पर गर्व हो।
- 6. देश की राजनीति को परिवारवाद से मुक्ति मिले।
- 7. संविधान का सम्मान हो, राजनीति स्वार्थ के लिए संविधान को हथियार न बनाया जाए।
- 8. संविधान की भावना के प्रति समर्पण रखते हुए जिनको आरक्षण मिल रहा है उसको न छीना जाए और धर्म के आधार पर आरक्षण की हर कोशिश पर रोक लगे।
- 9. महिलाओं के नेतृत्व में विकास में भारत दुनिया के लिए मिसाल बने।
- 10. राज्य के विकास से राष्ट्र का विकास... ये हमारा विकास का मंत्र हो।
- 11. एक भारत, श्रेष्ठ भारत का ध्येय सर्वोपरि हो।
PM मोदी ने संबोधन में संविधान पर क्या कहा?
पीएम मोदी ने कहा, ''2014 में जब एनडीए को सरकार बनाने का मौका मिला तो लोकतंत्र और संविधान को मजबूती मिली। गरीबों को मुश्किलों से मुक्ति मिले, यह हमारा बहुत बड़ा मिशन और संकल्प है। हमें गर्व है कि आज 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं।''
पीएम मोदी ने कहा, ''कांग्रेस के लिए सत्ता सुख और सत्ता भूख... यही एकमात्र इतिहास है, कांग्रेस का वर्तमान है। हमने भी संविधान संशोधन किए हैं... लेकिन देश की एकता के लिए, देश की अखंडता के लिए, देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए और संविधान की भावना के प्रति पूर्ण समर्पण के साथ किए हैं।''
पीएम मोदी ने कहा, ''नेहरू जी से लेकर राजीव गांधी तक, कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों ने आरक्षण का घोर विरोध किया है। इतिहास कह रहा है आरक्षण के विरोध में लंबी-लंबी चिट्ठियां स्वयं नेहरू जी ने लिखी है, मुख्यमंत्रियों को लिखी है। इतना ही नहीं, सदन में आरक्षण के खिलाफ लंबे-लंबे भाषण इन लोगों ने किए हैं।''












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