शिवगिरी मठ के कार्यक्रम में पीएम मोदी को याद आया उत्तराखंड हादसा, बोले- मुझे पूज्य गुरुजी का फोन आया था

नई दिल्ली, 26 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिवगिरी तीर्थयात्रा की 90वीं वर्षगांठ और ब्रह्म विद्यालय की स्वर्ण जयंती के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। ब्रह्म विद्यालय की स्वर्ण जयंती का कार्यक्रम पूरे एक साल चलेगा। इस कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में पीएम मोदी ने हिस्सा लिया। पीएम मोदी ने साल भर चलने वाले कार्यक्रम की शुरुआत के साथ इसके लोगों को बी लॉन्च किया। पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हिस्सा लिया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि तीर्थदानम् की 90 सालों की यात्रा और ब्रह्म विद्यालयम् की गोल्डेन जुबली ये केवल एक संस्था की यात्रा नहीं है। ये भारत के उस विचार की भी अमर यात्रा है, जो अलग-अलग कालखंड में अलग-अलग माध्यमों के जरिए आगे बढ़ता रहता है।

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    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, तीर्थदानम् और ब्रह्म विद्यालयम् की स्वर्णिम यात्रा में इस आयोजन में लाखों करोड़ों अनुयायियों की अनंत आस्था और अथक परिश्रम शामिल है, मैं सभी अनुयायियों और श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देता हूं। वाराणसी में शिव की नगरी हो या वरकला में शिवगिरी, भारत की ऊर्जा का हर केंद्र हम सभी भारतीयों के जीवन में विशेष स्थान रखता है। ये स्थान केवल तीर्थ भर नहीं हैं, ये आस्था के केंद्र भर नहीं हैं, ये 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना के जाग्रत प्रतिष्ठान हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं नहीं जानता हूं कि आप लोगों के साथ मेरा नाता किस प्रकार है, लेकिन कभी-कभी मैं अनुभव करता हूं जिसे मैं भूल नहीं सकता हूं। जब केदारनाथ में बहुत बड़ा हादसा हुआ, देशभर के यात्री जीवन-मृत्यु के बीच जूझ रहे थे। उत्तराखंड और केंद्र में कांग्रेस सरकार थी। केरल से ही एके एंटनी रक्षा मंत्री थे, इसके बावजूद मुझे शिवगिरी मठ से फोन आया कि हमारे सारे संत फंस गए हैं, उनकी स्थिति का पता नहीं लग पा रहा है, मोदी जी आपको ये काम करना है। मैं आज भी सोच नहीं पाता हूं कि इतनी बड़ी-बड़ी सरकार होने के बावजूद मठ को इस काम के लिए मुझे आदेश देना पड़ा।

    गुरू महाराज का आशीर्वाद था कि मुझे यह पुन्न काम करने का मौका मिला, सभी संतों को मैं वापस ला पाया। उस फोन कॉल में ही ऐसा गुरू महाराज का आशीर्वाद था कि उन्होंने इस पवित्र काम के लिए मुझे चुना। तीर्थदानम की 90 सालो की यात्रा और ब्रह्म विद्यालय की गोल्डन जुबिली है, यह केवल एक संस्था की यात्रा नहीं है, यह भारत के उस विचार की भी अमर यात्रा है जो अलग-अलग काल खंड में आगे बढ़ता रहा है। भारत के दर्शन को जीवंत बनाए रखने में, भारत की अध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ाने में अहम योगदान निभाया है। वर्कला को तो सदियों से दक्षिण का काशी कहा जाता है।

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