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PM Kisan Yojana: 31 मार्च से पहले कर लें यह काम, वरना अटक जाएगी पीएम किसान की अगली किस्त

PM Kisan Yojana: उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए एक बड़ी चेतावनी सामने आई है। अगर आपने इस महीने के अंत तक अपनी फॉर्मर रजिस्ट्री पूरी नहीं की, तो सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो सकता है। जिले में जुलाई 2024 से चल रहे इस सघन अभियान के बावजूद, अब भी 25 प्रतिशत किसान पंजीकरण की दौड़ में पीछे हैं।

आंकड़ों के अनुसार, कुल 2,51,390 पंजीकृत किसानों में से केवल 1,88,708 की रजिस्ट्री हो सकी है, जबकि 62,682 किसान अब भी अधर में लटके हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि मार्च की समयसीमा बीतने के बाद न केवल पीएम किसान सम्मान निधि, बल्कि फसल बीमा, फसली ऋण और आपदा राहत जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं पर भी संकट गहरा सकता है। तकनीकी खामियों और दस्तावेजों में विसंगतियों के कारण डेढ़ साल बाद भी यह लक्ष्य अधूरा है।

PM Kisan Samman Nidhi Yojana

75% काम पूरा, लेकिन बाकी किसानों की बढ़ी धड़कनें

जिले में कृषि विभाग और राजस्व टीम के तमाम प्रयासों के बावजूद लक्ष्य अब भी दूर नजर आ रहा है। जिले की पांचों तहसीलों में लगभग 75 प्रतिशत किसानों ने ही अब तक अपनी यूनिक आईडी (फॉर्मर आईडी) बनवाई है। शेष 62,682 किसान इस प्रक्रिया से बाहर होने के कारण खासे परेशान हैं। प्रशासन ने दिसंबर से विशेष शिविर लगाए और कर्मचारियों को घर-घर भी भेजा, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे।

इन 3 मुख्य वजहों से अटका है पंजीकरण का पहिया

किसानों की रजिस्ट्री न हो पाने के पीछे केवल लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर तकनीकी और कागजी बाधाएं भी हैं:

  • नाम में अंतर: बड़ी संख्या में किसानों के आधार कार्ड और भूलेख (खतौनी) में दर्ज नाम अलग-अलग हैं, जिससे वेरिफिकेशन फेल हो रहा है।
  • गायब भूलेख: जिले के कई गांवों का रिकॉर्ड अब तक ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट नहीं हुआ है, जिससे डेटा मिलान संभव नहीं हो पा रहा।
  • सर्वर और डेटा अपडेट: तकनीकी खराबी के कारण कई बार आवेदन करने के बाद भी पोर्टल पर डेटा अपडेट नहीं हो रहा है, जिससे किसान चक्कर काटने को मजबूर हैं।

क्यों अनिवार्य है फॉर्मर रजिस्ट्री?

सरकार का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता लाना है। फॉर्मर रजिस्ट्री के माध्यम से प्रत्येक किसान का एक डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा, जिससे:

  • बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और लाभ सीधे पात्र किसानों को मिलेगा।
  • जमीन से जुड़े विवादों का निपटारा आसान होगा।
  • खाद, बीज और सब्सिडी का वितरण अधिक व्यवस्थित होगा।

With AI Inputs

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