तबलीगी जमात से संबंधित लोगों की रिहाई की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर
नई दिल्ली। तबलीगी जमात से संबंधित सभी व्यक्तियों को तत्काल रिहा करने की मांग को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है। इस याचिका में ये आरोप लगाया गया है कि क्वारंटाइन के नाम पर उन्हें 35 दिनों से ज्यादा समय से हिरासत में रखा गया है। इस मामले की सुनवाई अब कल होगी। कहा जा रहा है कि इन लोगों को विभिन्न क्वारंटाइन केंद्रों में रखा गया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका में कहा गया है कि तबलीगी जमात के 3300 सदस्यों को 40 दिनों से अलग-अलग क्वारंटाइन केंद्रों में रखा गया है। इनकी कोविड-19 की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी इन्हें जाने नहीं दिया गया। इसमें 14 दिनों के क्वारंटाइन के दिशानिर्देश का पालन करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने को कहा गया है। साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए कि क्या सदस्यों को निरंतर ऐसे रखना संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है, एक उच्च स्तरीय समिति के गठन की मांग की गई है।
एक सामाजिक कार्यकर्ता और याचिकाकर्ता सबिहा कादरी ने आरोप लगाया कि कई लोगों को अवैध रूप से क्वारंटाइन केंद्रों में रखा गया है और उन केंद्रों में रहने वाले कई व्यक्तियों ने अधिकारियों को पत्र लिखे हैं लेकिन उन पर विचार नहीं किया गया है। वकील शाहिद अली के माध्यम से दायर याचिका में दावा किया गया है कि अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में विफल हैं और क्वारंटाइन के नाम पर निरंतर हिरासत में रखना केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।
बता दें 31 मार्च को कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान, मर्कज हजरत निजामुद्दीन से तबलीगी जमात के कई सदस्यों को अधिकारियों ने निकाला था और फिर इन्हें दिल्ली के विभिन्न क्वारंटाइन केंद्रों में भेज दिया गया। उनमें से कुछ को विभिन्न मस्जिदों से हिरासत में लिए जाने के कुछ दिनों बाद केंद्रों में भेजा गया। याचिका में कहा गया है, 'तबलीगी जमात के कुल 3,288 लोगों को अलग-अलग क्वारंटाइन केंद्रों में रखा गया है और आज तक वहां से किसी को भी नहीं छोड़ा गया है, इस तथ्य के बावजूद कि वे किसी भी तरह की बीमारी (कोरोना वायरस) से संक्रमित नहीं हैं।'
याचिका में संगठन के दो सदस्यों की मौत की जांच करने के लिए एक समिति गठित करने की मांग भी की गई है, जिनकी क्वारंटाइन केंद्र में मौत हो गई थी। साथ ही अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की है।
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