PLA ऑफिसर ने 15 जून को हुई गलवान घाटी हिंसा को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
नई दिल्ली। 22 जून को भारत और चीन की सेनाओं के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) में चीन वाले हिस्से की तरफ स्थित मोल्डो में कोर कमांडर स्तर की वार्ता हुई थी। इस वार्ता के दौरान पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के ऑफिसर ने 15 जून को गलवान घाटी में हुई घटना 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया है। आपको बता दें कि 15/16 जून को गलवान घाटी में भारत और चीन की सेना के बीच टकराव हिंसक हो गया था। इस घटना में 16 बिहार रेजीमेंट के 20 जवान शहीद हो गए थे जिसमें कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) कर्नल संतोष बाबू भी शामिल थे। अखबार द हिंदू ने सेना के सीनियर ऑफिसर के हवाले से इस बात की जानकारी दी है।

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कितने सैनिक मारे गए इसकी कोई जानकारी नहीं
पीएलए के ऑफिसर ने गलवान घाटी में हुई हिंसा को दुर्भाग्यपूर्ण तो बताया लेकिन इस बात की कोई जानकारी नहीं दी कि इस हिंसा में पीएलए के कितने सैनिक मारे गए। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक एलएसी पर डि-एस्कलेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस पर आधिकारिक बयान, प्रक्रिया के पूरा हो जाने के बाद ही आएगा। कोर कमांडर वार्ता में भारत और चीन के बीच टकराव के तीन बिंदुओं से वापस जाने को लेकर रजामंदी बनी है। जिन तीन जगहों से चीनी सेना पीछे हटने को राजी हुई है उनमें गलवान, हॉट स्प्रिंग्स और पैंगोंग त्सो के किनारे स्थित फिंगर एरिया शामिल हैं। इन तीन जगहों पर अप्रैल-मई से ही चीनी सैनिक मौजूद हैं। एक और ऑफिसर ने बताया कि कोर कमांडर स्तर की दूसरे दौर की वार्ता की निर्णायक बातें सामने आने में और इसके निष्कर्ष पर पहुंचने में समय लगेगा। अगले तीन से चार दिनों के अंदर किस प्रकार से प्रक्रिया आगे बढ़ती है, यह उस पर निर्भर करेगा।












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