सीएम गहलोत पर पायलट का तंज- 'उनके बूथ पर भी नहीं जीती कांग्रेस यही है उनका अनुभव'
नई दिल्ली- कांग्रेस से साइडलाइन होने के बाद सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के राजनीतिक अनुभव पर ही सवाल उठा दिया है। उनका दावा है कि 2018 में उन्हीं की वजह से राजस्थान में कांग्रेस सत्ता में वापसी कर सकी, लेकिन फिर उनकी जगह अशोक गहलोत को ये कहकर मुख्यमंत्री बनाया गया, क्योंकि उनका तजुर्बा ज्यादा है। लेकिन, अब पायलट ने उनके उसी तजुर्बे पर यह कहकर सवाल उठाया है कि जब गहलोत में अपने बूथ पर भी पार्टी को जिताने की हैसियत नहीं है तो फिर ऐसा अनुभव किस काम का। उन्होंने 2003 से 2019 के चुनावों का हवाला देकर बताया है कि जब-जब पार्टी ने गहलोत पर भरोसा किया है, उन्होंने कांग्रेस का बेड़ा ही गर्क किया है।

सीएम गहलोत के खिलाफ पायलट की भड़ास
राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत कर चुके पूर्व उप मुख्यमंत्री और पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट अब सीएम के खिलाफ सरकार से हटने के बाद खुलकर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं। पायलट ने इंडिया टुडे को एक इंटरव्यू दिया है, जिसमें उनका यह दर्द बार-बार छलक आया है कि 2018 में उन्हीं के नेतृत्व क्षमता के दम पर कांग्रेस भाजपा को सत्ता से बेदखल कर सरकार में लौटी थी, लेकिन बावजूद इसके गहलोत के अनुभव का हवाला देकर उन्हें मुख्यमंत्री पद सौंप दिया गया। जबकि, पायलट ने साफ कहा है कि ऐसा अनुभव किस काम का जब उनमें अपने बूथ पर भी पार्टी को जीत दिला पाने की हैसियत नहीं है। उन्होंने माना है कि 2018 के चुनाव के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद पर अपना दावा जताया था। लेकिन, इसके कारण थे। उन्होंने कहा है, '2018 में पार्टी को जीत दिलाने के बाद मैंने मुख्यमंत्री पद का दावा किया था। मेरे पास पर्याप्त कारण थे। मैंने तब पार्टी की कमान संभाली थी, जब 200 सीटों वाले सदन में पार्टी की सीट घटकर 21 रह गई थी। अगले पांच साल तक गहलोत जी ने एक शब्द नहीं कहा, जबकि मैं जनता के साथ काम करता रहा, कार्यकर्ताओं को एकजुट किया।'

'उनके बूथ पर भी नहीं जीती कांग्रेस यही है उनका अनुभव'
इसके बाद पायलट का सारा दर्द शब्द बनकर जुबान पर आ गया। उन्होंने कहा, 'लेकिन जीतने के बाद गहलोत जी ने अनुभव के आधार पर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर दावा ठोक दिया। लेकिन, उनका अनुभव है क्या ? 2018 से पहले वो 1999 और 2009 में दो बार मुख्यमंत्री बने। उसके बाद 2003 और 2013 के दोनों चुनावों में उन्होंने पार्टी की टैली घटाकर 56 और 26 पहुंचा दी। फिर भी, उन्हें तीसरी बार मुख्यमंत्री के पद पर बिठा दिया गया। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को बहुत ही अच्छी संख्या में सीट दिलाने का वादा किया था। कांग्रेस का उम्मीदवार खुद गहलोत के अपने बूथ पर भी नहीं जीत सका। यही उनका अनुभव है।'

राहुल के कहने पर बना डिप्टी सीएम- पायलट
पायलट का कहना है कि इसके बावजूद राहुल गांधी के कहने पर उन्होंने अशोक गहलोत को सीएम बनाए जाने की बात मान ली। पायलट ने कहा कि शुरू में वह उपमुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते थे, लेकिन राहुल गांधी के कहने पर वे इसके लिए भी तैयार हुए थे। राहुल ने गहलोत से कहा था कि अधिकार और काम बराबर-बराबर बंटवारा होना चाहिए। लेकिन, उनके मुताबिक मुख्यमंत्री ने उन्हें अपमानित करना अपना एजेंडा बना लिया और वे जनता से जो वादा करके आए थे, उसे पूरा करने में अड़ंगा लगाने लगे।

विधानसभा सत्र में नहीं तो व्हीप का उल्लंघन कैसा- पायलट
एक और सवाल के जवाब में उन्होंने कहा है कि 13 जुलाई को सीएम आवास पर बुलाई गई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में वे इसलिए नहीं गए थे, क्योंकि उनके आत्मसम्मान को धक्का लगा था। उन्हें पुलिस ने राजद्रोह के आरोपों में नोटिस थमा दिया। जबकि, 2019 के पार्टी मैनिफेस्टो में इस कानून को हटाने की बात की गई थी। लेकिन, राजस्थान सरकार ने अपने ही मंत्री के खिलाफ इस कानून का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि सीएलपी की बैठक में जाकर उन्होंने किसी व्हीप का उल्लंघन नहीं किया है, क्योंकि यह तब लागू होता है जब विधानसभा का सत्र चालू रहता है; और तो मुख्यमंत्री गहलोत ने तो यह बैठक कांग्रेस मुख्यालय में नहीं, अपने आवास पर बुलाई थी। इसलिए उनके मुताबिक यह व्हीप के उल्लंघन का मामला ही नहीं है।
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