पूर्व पर्यावरण मंत्री दवे की मौत की जांच के लिए दायर याचिका को कोर्ट ने खारिज किया
नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे की मृत्यु की जांच की याचिका को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। दवे की मौत के बाद इसकी जांच के लिए एक पीआईएल दाखिल की गई थी, जिसमे कहा गया था कि दवे की मृत्यु संदेहास्पद परिस्थितियों में हुई है, लिहाजा इसकी जांच की जानी चाहिए। लेकिन कोर्ट ने इस याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि सिर्फ न्यूज पेपर की खबरों के आधार पर इसकी जांच नहीं कराई जा सकती है।

आपको बता दें कि अनिल माधव दवे का 18 मई 2017 को हार्ट अटैक की वजह से निधन हो गया था। जिसके बाद एक्टिविस्ट तपन भट्टाचार्य ने एक पीआईएल दाखिल करके उनकी मौत की जांच की मांग की थी। जिसपर सुनवाई करते हुए जस्टिस पीके जायसवाल व जस्टिस वीरेंद्र सिंह ने उसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह याचिका मूल रूप से अखबार की खबरों के आधार पर दायर की गई है, इस मामले में याचिकाकर्ता द्वारा किसी भी तरह का दस्तावेज या तथ्य नहीं पेश किया गया है।
भट्टाचार्य ने अपनी याचिका में कहा था कि दवे पर कई बड़ी कंपनियां इस बात का दबाव बना रही थीं, यह कंपनियां केंद्र सरकार पर यह दबाव बना रही थीं कि उन्हें जेनेटेकली मोडीफाइड सरसो की व्यवसायिक खेती करने की इजाजत दी जाए, लेकिन देशहित में हमेशा आगे रहने वाले दवे ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था। पीआईएल में अखबारों में छपी खबरों को भी सबूत के तौर पर पेश किया गया था और मामले की जांच की मांग की गई थी।
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