New Parliament House: 'राष्ट्रपति करें नए संसद भवन का उद्घाटन', सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई आज
New Parliament House: 28 मई को होने वाले नए संसद भवन के उद्घाटन का मामला देश की शीर्ष अदालत में पहुंच गया है। कोर्ट में राष्ट्रपति से संसद भवन के उद्घाटन की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है।

New Parliament House का उद्घाटन 28 मई को प्रस्तावित है। इसी बीच देश की सबसे बड़ी पंचायत का मामला देश की सबसे बड़ी अदालत में जा पहुंचा है। सुप्रीम कोर्ट आज यानी शुक्रवार 26 मई को इस पर सुनवाई करेगी।
कानूनी या शिष्टाचर का मुद्दा
दरअसल, लोक सभा स्पीकर ओम बिरला ने 28 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नए संसद भवन का उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित किया। संसद के कस्टोडियन माने जाने वाले स्पीकर के आमंत्रण में कोई कानूनी पेंच नहीं, लेकिन शिष्टाचार का मुद्दा माना जा रहा है।
कार्यक्रम के आयोजक, स्पीकर ओम बिरला
कांग्रेस सहित विपक्ष के 19 दलों ने इस कार्यक्रम के बहिष्कार का ऐलान किया है। विपक्षी दलों की मांग है कि नए संसद भवन का उद्घाटन पीएम नहीं बल्कि राष्ट्रपति को करना चाहिए।
अहम संवैधानिक हस्तियों की अनदेखी के आरोप
विरोध कर रहे दलों की दलील है कि शिलान्यास समारोह में भी तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को नहीं बुलाया गया। इस बार भी राष्ट्रपति समेत राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़ की अनदेखी का भी आरोप लगा है।
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सियासत से कोर्ट जा पहुंचा मामला
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ही नए संसद भवन का उद्घाटन करें, ऐसा निर्देश मांगा गया है। लोकसभा सचिवालय और केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है। इस पर कोर्ट शुक्रवार, 26 मई को सुनवाई करेगी।
याचिका सुप्रीम कोर्ट में ऐसे वक्त में दायर की गई है, जब देश में नए संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। विपक्ष और सत्तारूढ़ दलों के बीच तीखी तर्कबाजी जारी है।
सुप्रीम कोर्ट की वकील ने दायर की याचिका
वहीं अब सुप्रीम कोर्ट की वकील सीआर जया सुकिन की ओर से दायर की गई याचिका में कहा गया है कि उद्घाटन में राष्ट्रपति को शामिल नहीं करके केंद्र सरकार ने भारत के संविधान का उल्लंघन किया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि "संसद भारत का सर्वोच्च विधायी निकाय है। संसद में राष्ट्रपति और दो सदन - लोकसभा और राज्यसभा शामिल हैं।"
याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रपति के पास किसी भी सदन को बुलाने और सत्रावसान (सत्र खत्म) करने की शक्ति है। इतना ही नहीं याचिका में तर्क दिया गया कि केंद्र सरकार ने उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति को आमंत्रित नहीं किया, जो अनुचित है।
साथ ही याचिका में दलील दी गई है कि "राष्ट्रपति संसद का अभिन्न अंग है। शिलान्यास समारोह से राष्ट्रपति को दूर क्यों रखा गया? अब उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति को आमंत्रित नहीं किया गया है। सरकार का यह फैसला उचित नहीं है।"
1200 करोड़ में बना नया संसद
आपको बता दें कि नया संसद भवन बनकर तैयार हो चुका है। 28 मई को इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होना है। 10 दिसंबर 2020 को पीएम मोदी ने नए संसद भवन के निर्माण कार्य का शिलान्यास किया था। इसके निर्माण में 1200 करोड़ रुपए की लागत आई है।












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