राव को भारत रत्न देने के विरोधी वाली याचिका खारिज

मुख्य न्यायाधीश धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति डी.के. अरोरा की खंडपीठ ने कहा कि यह याचिका मात्र 'पब्लिसिटी' के लिए दाखिल की गई है। खंडपीठ ने कहा कि इसमें एक वादी आदित्य नाबालिग है, जिसे डॉ. सीएनआर राव के बारे में बहुत कम या शून्य जानकारी है। अदालत ने कहा कि तनया ने यह याचिका अपनी मां डॉ. नूतन ठाकुर के सहयोग से लिखी है जो स्वयं एक 'आदती पीआईएल कर्ता' हैं।
अदालत ने कहा कि इस प्रकार की याचिका को कत्तई बढ़ावा नहीं देना चाहिए और इसे भारी जुर्माना लगाते हुए खारिज करना चाहिए, पर चूंकि तनया एक विधि छात्रा हैं इसलिए उन्हें मात्र सख्त चेतावनी के साथ यह याचिका खारिज की जाती है।
याचिका के अनुसार भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है और इसे बेहद विचार-विमर्श के बाद ही किसी को दिया जाना चाहिए। भारत में जगदीश चंद्र बोस, एस.एन. बोस, मेघनाद साहा, डॉ. होमी भाभा, विक्रम साराभाई सहित कई ऐसे वैज्ञानिक हुए हैं जिनका विज्ञान के क्षेत्र में डॉ. राव से कहीं अधिक और कहीं अत्यधिक स्थायी योगदान रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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