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राजद्रोह कानून: 'इस वजह से मैं कोर्ट गया', रिटायर जनरल ने बताया SC में याचिका दायर करने का कारण

नई दिल्ली, 12 मई: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को राजद्रोह कानून को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। राजद्रोह कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राजद्रोह कानून पर फिलहाल रोक लगा दी है। जिससे मतलब है कि राजद्रोह कानून के तहत एफआईआर दर्ज करने, इस केस में चल रही जांच और अन्य कार्यवाहियों पर अभी पूरी तरह से रोक लगाई गई है। देश के चीफ जस्टिस एनवी रमना की अगुवाई वाली तीन-न्यायाधीशों की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए फैसला दिया।

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याचिकाकर्ता रिटायर मेजर जनरल सुधीर वोम्बतकेरे

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजद्रोह कानून पर तब तक रोक रहे, जब तक इसका पुनर्विचार ना हो। ऐसे में अब राजद्रोह की धारा 124-A में कोई भी नया केस दर्ज नहीं किया जा सकता। वहीं इस कानून के खिलाफ याचिका देने वाले याचिकाकर्ताओं में से एक रिटायर मेजर जनरल सुधीर वोम्बतकेरे ने कहा कि जिस संविधान की रक्षा करने की शपथ ली थी, जब उसे चुनौती दी जा रही थी, तब उन्होंने अदालत का रुख किया।

बताया SC में याचिका दायर करने का कारण

एनडीटीवी से बात करते हुए 162 साल पुराने ब्रिटिश कालीन कानून पर रिटायर मेजर जनरल ने कहा कि "हर सैनिक संविधान की रक्षा के लिए शपथ लेता है, वे अपने जीवन के जोखिम पर भी संविधान की रक्षा करते हैं और देश की सीमाओं की रक्षा सशस्त्र बलों द्वारा की जाती है ताकि देश के भीतर लोग सुरक्षित तरीके से रह सकें और स्वतंत्रता और अपने अधिकारों का आनंद ले सकें, जो संविधान हमें देता है। यही कारण है कि मैंने इस मामले को उठाया।"

'सैकड़ों लोगों को तुरंत राहत मिलेगी'

राजद्रोह कानून पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जानी चाहिए और सरकार द्वारा कानून पर पुनर्विचार करने के दौरान सभी लंबित मामले रोक दिए जाएंगे। यदि कोई नया मामला दायर किया जाता है, तो लोग अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इसी के साथ न्यायाधीशों ने कहा कि सरकार कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए राज्यों को निर्देश दे सकती है। कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश पर जनरल वोम्बतकेरे ने कहा, "इसका मतलब साफ है कि राजद्रोह के आरोप में सैकड़ों लोगों को तुरंत राहत मिलेगी, क्योंकि वे जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं और जांच पर रोक लगा दी जाएगी।"

इस वजह से कोर्ट पहुंचे रिटायर जनरल

उन्होंने आगे कहा, "यह एक अंतरिम आदेश है, अंतिम नहीं। अंतरिम आदेश दिया गया, क्योंकि सरकार ने यू-टर्न लिया और कहा कि वे राजद्रोह कानून की समीक्षा करेंगे, लेकिन देशद्रोह कानून की न्यायिक परीक्षा जारी रहेगी।" जनरल ने यह भी बताया कि आखिर उन्होंने इस मामले के खिलाफ क्यों कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका मानना ​​​​था कि अन्याय हो रहा है और इनका विरोध किया चाहिए। जनरल वोम्बतकेरे ने कहा "मैंने देखा कि बहुत सी चीजें गलत हो रही हैं। मेरा मानना ​​​​है कि अगर एक जगह अन्याय है, तो हर जगह अन्याय है। अन्याय का विरोध करना होगा। मैंने सक्रियता को अपनाया क्योंकि मेरा मानना ​​​​है कि सभी सरकारों, राज्य और केंद्र द्वारा अन्याय हुआ है।"

'पिछले आठ सालों में 800 में से लगभग 400 मामले दर्ज किए'

उनके मुताबिक पूरे कानून को जाना होगा, क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 19 1 (ए), 14 और 21 के विपरीत है, जो समानता के अधिकार, भाषण, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा से संबंधित है। उन्होंने यह भी कहा कि राजद्रोह कानून कई सालों से चला आ रहा है, लेकिन पिछले कुछ सालों में पहले की तुलना में ज्यादा आरोप लगाए गए हैं। बकौल जनरल "800 मामले हैं और 13,000 जेल में हैं। सिर्फ पिछले आठ सालों में 800 में से लगभग 400 मामले दर्ज किए गए। इसे हमेशा एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया है, लेकिन हाल ही कुछ सालों में ज्यादा किया गया है।"

'स्वतंत्रता को कुचलने का हथियार'

उन्होंने आगे कहा, "लोगों के पास अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है। राजद्रोह कानून उस स्वतंत्रता (भाषण और स्वतंत्रता) को कुचलने का हथियार है। हाल के वर्षों में इसका ज्यादा इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि उस दस्तावेज की रक्षा करना महत्वपूर्ण है। साथ ही, मेरे दरवाजे के बाहर मैं एक भारतीय हूं। मेरे घर के अंदर मैं हिंदू, मुस्लिम, कुछ भी हो सकता हूं ..."

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