पैंगोंग त्सो पर हैलीपैड बना रहा चीन, PLA जवान बोले-न यहां से हटेंगे, न पीछे जाएंगे
नई दिल्ली। 22 जून को लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के दूसरी तरफ स्थित मोल्डो में इंडियन आर्मी और चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के बीच कोर कमांडर स्तर की वार्ता हुई थी। इस मीटिंग में दोनों के बीच डिसइंगेजमेंट को लेकर सहमति बनी थी। लेकिन ऐसा लगता है कि चीन इस बार फिर से उन बातों को मानने के लिए तैयार नहीं है जिस पर उसके कमांडर मेजर जनरल लियू लिन ने रजामंदी दी थी। अब ऐसी खबरें आ रही हैं कि चीन पैंगोंग त्सो पर एक हैलीपैड का निर्माण कर रहा है।
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हैलीपैड से परेशान हुआ भारत
हैलीपैड निर्माण की खबरों के बाद से अब इस बात की चिंता सुरक्षा एजेंसियों को सताने लगी है कि चीन एक बार फिर से अपना दावा जताने लगा है। उसके रुख से ऐसा लगने लगा है कि वह इलाके में अप्रैल वाली यथास्थिति कायम करने का इच्छु नहीं है। इंग्लिश अखबार इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के मुताबिक चीनी सेना ने पैंगोंग त्सो इलाके में अपनी स्थिति को और मजबूत करना शुरू कर दिया है। भारत और चीन के बीच पांच मई से ही पैंगोंग पर टकराव की स्थिति बनी हुई है। अधिकारियों के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा है कि यह बात सही है कि चीनी सेना ने पैंगोंग के उत्तरी हिस्से में अपनी स्थिति को मजबूत करना शुरू कर दिया है। यहां पर अब चीनी सेना एक हैलीपैड का निर्माण कर रही है और इसे फिंगर चार पर बनाया जा रहा है। यह हैलीपैड उस निर्माण कार्य के अतिरिक्त है जिसे पीएलए ने पिछले आठ हफ्तों में अंजाम दिया है।

अप्रैल वाली यथास्थिति बहाल नहीं होगी!
अधिकारियों के मुताबिक पीएलए की पेट्रोलिंग टीमें लगातार फिंगर 3 के इलाके में आ रही हैं जो कि झील के किनारे की तरफ है और फिर ऊंचाई की तरफ चली जाती हैं। सूत्रों की मानें तो पीएलए जवान लगातार भारतीय सेना के जवानों से फिंगर 2 की तरफ चले जाने को कह रहे हैं। अधिकारियों की मानें तो चीनी सेना ने उन्हें स्पष्ट कर दिया है कि उनका यहां से जाने का कोई इरादा नहीं है न ही वह अप्रैल वाली यथास्थिति को बहाल करेंगे। इसकी वजह से ही उनकी तरफ से पैंगोंग झील पर डिसइंगेजमेंट को लेकर कोई भी चर्चा नहीं हुई। चीन ने अब दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) के करीब देपसांग में नया मोर्चा खोल दिया है। भारत के सैन्य अधिकारी अब इसे एक चुनौतीपूर्ण एरिया करार देने लगे हैं।

कभी फिंगर 8 तक गश्त करती थी Indian Army
पैंगोंग त्सो और इसका उत्तरी किनारा हमेशा से ही दोनों देशों के बीच विरोध का बिंदु रहा है। चीनी सेना ने अपना एक स्थायी बेस फिंगर आठ पर बना रखा है। अब उन्होंने इसके पश्चिम में आठ किलोमीटर की दूर तक यानी फिंगर 4 पर भी अपना बेस बना लिया है। यहां पर उनके टेंट, पिलबॉक्स और दूसरे निर्माण कार्यों को देखा जा सकता है। भारत हमेशा से दावा करता है कि फिंगर आठ तक उसका इलाका है लेकिन चीनी सेना हमेशा इससे इनकार कर देती है। एतिहासिक तौर पर भारत की सेना करगिल की जंग के समय फिंगर आठ तक गश्त करती थी।

500 मीटर से भी कम की दूरी पर दोनों सेनाएं
फिंगर 4 और फिंगर 3 के बीच जो तेज पहाड़ी हिस्सा है वह फिंगर 4 का पश्चिमी भाग है और यहां सिर्फ पैदल ही गश्त की जा सकती है। इंडियन आर्मी का मुख्य बेस फिंगर तीन के करीब है और यह वर्तमान में चीनी तैनाती के पश्चिम में करीब दो किलोमीटर दूर स्थित है। भारत की तरफ से फिंगर 4 पर भी एक प्रशासनिक बेस तैयार किया गया है। सेना ने इस इलाके में चीन को जवाब देने के लिए खुद को अलर्ट रखा है। 500 मीटर से भी कम की दूरी पर यहां पर दोनों देशों के सैनिकों को देखा जा सकता है।












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