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PDA हो सकता है बीजेपी-विरोधी विपक्षी गठबंधन का नाम, शिमला में लग सकती है मुहर

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के जवाब में विपक्षी दलों के महागठबंधन का नाम 'देशभक्त जनतांत्रिक गठबंधन' (पीडीए) रखा जा सकता है। हालांकि, इसपर अंतिम फैसला विपक्षी दलों की अगले महीने शिमला में प्रस्तावित बैठक में लिए जाने की संभावना है।

जानकारी के मुताबिक सीपीआई महासचिव डी राजा ने शनिवार को पटना में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए इस तरह का संकेत दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि अगले महीने 10 या 12 तारीख को शिमला में प्रस्तावित बैठक में यह गठबंधन अपना वास्तविक आकार ले लेगा।

patriotic democratic alliance

गठबंधन का नाम 'देशभक्त जनतांत्रिक गठबंधन' हो सकता है- डी राजा
एचटी की एक रिपोर्ट के अनुसार रविवार को जब डी राजा से इस बारे में फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि गठबंधन का नाम 'पीडीए' हो सकता है, लेकिन आखिरी फैसला शिमला की बैठक में ही लिया जाएगा। उन्होंने कहा 'हम कह सकते हैं कि नए गठबंधन का नाम 'देशभक्त जनतांत्रिक गठबंधन' (पेट्रीओटिक डेमोक्रैटिक एलायंस) हो सकता है। हमने इसपर अंतिम फैसला नहीं लिया है। हमारा प्राथमिक उद्देश्य एनडीए को हराना है और इसपर सभी विपक्षी दलों के बीच स्पष्टता है।'

'साझा विपक्ष की भावना के अनुरूप नाम रखा जाएगा'
राजा का कहना है कि जो विपक्षी दल एकसाथ आए हैं, उनकी विचारधारा धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक है और मोर्चे के नाम में इसकी झलक दिखनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'तमिलनाडु में सेक्युलर डेमोक्रैटिक फ्रंट है, जबकि बिहार में हमारा महागठबंधन है। इसलिए, हमारा एक ऐसा नाम होगा जो साझा विपक्ष के रूप में हमारी प्रतिबद्धताओं को जाहिर करेगा।'

2004 में चुनाव के बाद बना था यूपीए
2004 के लोकसभा चुनाव में जब एनडीए हार गया था, तब कांग्रेस, लेफ्ट और अन्य भाजपा-विरोधी दलों ने केंद्र में मिलकर यूपीए या संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन बनाया था। 2015 में बिहार में जब भाजपा के विरोध में आरजेडी, जेडीयू, कांग्रेस और वामपंथी दलों ने आपस में हाथ मिलाया, तो उसे महागठबंधन का नाम दिया गया। अभी भी बिहार में इसी ग्रैंड एलायंस की सरकार है।

ममता ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में भी किया था इशारा
जिस तरह से लेफ्ट के एक बड़े नेता ने पटना में विपक्षी दलों की बैठक के अगले दिन ही गठबंधन के नाम को लेकर खुलासा किया है, उससे लग रहा है कि इस बारे में जरूर कोई चर्चा हुई है और अब सिर्फ उसे अमलीजामा पहनाया जाना है। गौरतलब है कि विपक्षी दलों की बैठक के बाद पटना में जो संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस हुई थी, उससें टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने जोर देकर कहा था कि 'उन्हें 'विपक्ष' नहीं, बल्कि 'देशभक्त' कहा जाना चाहिए, क्योंकि वो सभी देश के नागरिक हैं।'

हालांकि विपक्षी गठबंधन के नाम को लेकर बैठक की जानकारी रखने वाले आरजेडी के बड़े नेताओं ने चर्चा होने की बात से इनकार किया है और कहा है कि इन बातों पर शिमला की बैठक में बातचीत की जाएगी। जब राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा से पूछा गया कि नेताओं ने मोर्चे का नाम पीडीए रखे जाने की संभावना जताई है तो उन्होंने कहा कि 'हम कह सकते हैं कि बैठक बहुत ही सार्थक रही।'

23 जून को पटना में हुई बैठक में भाजपा और नरेंद्र मोदी-विरोधी 15 पार्टियां शामिल हुईं। इसमें कांग्रेस, टीएमसी, जेडीयू, आरजेडी, वामपंथी दल, डीएमके, एनसीपी, आम आदमी पार्टी, पीडीपी, नेशनल कांफ्रेंस, शिवसेना (यूबीटी), जेएमएम और समाजवादी पार्टी शामिल हैं। इस बैठक में इन विपक्षी पार्टियों ने अगला चुनाव एकजुट होकर भाजपा के खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया है।

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