सरकारी बंगला खाली करें पूर्व मुख्यमंत्री, पटना हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
पटना। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्रियों को भी आजीवन सरकारी बंगला, गाड़ी और कर्मचारी की सुविधा नहीं मिलेगी। मंगलवार को पटना हाई कोर्ट ने बिहार सरकार के उस एक्ट को गैर संवैधानिक और सरकारी पैसे का दुरुपयोग बताया है जिसके तहत राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला, गाड़ी और कई अन्य सुविधाए उपलब्ध कराई जाती थी।

पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एपी शाही की बेंच ने अपने आदेश में बिहार के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के साथ नीतीश कुमार भी बंगाल खाली करने के लिए कहा है। पिछले महीने अदालत ने इस संबंध में बिहार सरकार और राज्य के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के अलावा नीतीश कुमार को भी नोटिस जारी किया था। अदालत ने नोटिस जारी करते हुए कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री निजी आवास में शिफ्ट क्यों नहीं हो सकते हैं। जबकि वहां भी उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाती है।
अदालत का यह आदेश एक कार्यकर्ता की ओर से दायर की गई जनहित याचिका पर आया था।
जिसमें पूछा गया था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को उनगे पद छोड़ने के बाद उन्हें आवंटित बंगलों पर कब्जा जारी रखना चाहिए। क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने आखिरी कार्यकाल में आवंटित बंगले पर कब्जा रखा है जबकि वे एक अन्य सरकारी बंगले में रहते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद और उनकी पत्नी राबड़ी देवी के साथ-साथ जीतन राम मांझी और जगन्नाथ मिश्रा आवंटित बंगलों पर कब्जा कर रखा है। कोर्ट के फैसले के बाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि वे कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। उन्होंने राज्य सरकार ने उम्मीद लगाते हुए कहा कि उन्हें आवंटित बंगले को वरिष्ठ विधायक होने के नाते उन्हें बहार रखा जाए।
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