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पतंजलि की 'किम्भो' ऐप के स्वदेशी होने के दावे पर सवाल

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    रामदेव
    Getty Images
    रामदेव

    लोकप्रिय मैसेजिंग एप्लीकेशन 'व्हॉट्सएप' को टक्कर देने के लिए बाबा रामदेव ने भारतीयों के लिए 'किम्भो' चैट ऐप पेश किया था. लेकिन कुछ ही घंटों बाद इस ऐप को वापस भी ले लिया गया.

    रामदेव की कंपनी पतंजलि ने 30 मई को लॉन्च करते हुए इसे एक स्वदेशी मैसेजिंग ऐप्लीकेशन बताया था. लॉन्चिंग के साथ ही इसे लेकर इंटरनेट पर चर्चा होने लगी. विशेषज्ञों ने इस ऐप में निजी जानकारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि इस ऐप को इस्तेमाल करने वाले यूज़र का डेटा कोई भी आसानी से हासिल कर सकता है.

    इस पर पतंजलि ने बीबीसी से कहा कि किम्भो ऐप में कोई खामी नहीं है और हमने गूगल प्ले स्टोर पर एक दिन के लिए ऐप का ट्रायल वर्ज़न डाला था. जिसके पहले तीन घंटे में ही डेढ़ लाख डाउनलोड किए गए.

    पतंजलि प्रोडक्ट्स के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने कहा, "किम्भो दुनिया को दिखा देगा कि भारत वैश्विक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लीडर बन सकता है."

    उन्होंने कहा, "हमने ऐप को सिर्फ एक दिन के लिए पेश किया था ताकि हम इसपर लोगों की प्रतिक्रिया जान सकें. ये प्रतिक्रियाएं अभूतपूर्व थीं. अब हम कुछ दिनों बाद एप को अच्छे तरीके से लांच करेंगे और तब मैं सुरक्षा से जुड़े सवालों का जवाब दे पाऊंगा."

    कई दूसरे लोगों ने किम्भो ऐप के स्वदेशी होने के दावे पर ही सवाल उठा दिए.

    फ्रांस के एक एथिकल हैकर एलियट एल्डरसन ने दावा किया कि एक अमरीकी कंपनी के बंद हो चुके मैसेजिंग ऐप 'बोलो' को ही किम्भो के रूप में पेश कर दिया गया है.

    एल्डरसन ने सबूत के तौर पर दोनों ऐप के स्क्रीनशॉट भी अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किए. स्क्रीनशॉट के साथ उन्होंने लिखा, "ऐप स्टोर पर दोनों ऐप के डिस्क्रिप्शन एक से हैं."

    कुछ और लोगों ने भी स्क्रीनशॉट ट्वीट कर इस बात को साबित करने की कोशिश की कि किम्भो ऐप्लीकेशन 'बोलो' का ही रिब्रांडेड वर्ज़न है.

    टेक्नॉलजी राइटर प्रशांतो के रॉय ने बीबीसी से कहा कि 'किम्भो साफ तौर पर बोलो मैसेंजर का एक जल्बाज़ी में बनाया गया रूप है. चिंता की बात ये है कि यह ऐप्लीकेशन आसानी से पढ़े जा सकने वाले टेक्स्ट के तौर पर डेटा स्टोर कर रही है, जिसके इस्तेमाल से कोई हैकर दूसरे यूजर्स के संदेश पढ़ सकता है.'

    स्वदेशी होने पर सवाल

    भारत में फर्जी ख़बरों का भंडाफोड़ करने के लिए मशहूर वेबसाइट 'ऑल्ट न्यूज़' ने लिखा है कि पतंजलि ने अमरीका की एक स्टार्टअप कंपनी की ऐप्लीकेशन 'बोलो' को नाम बदलकर किम्भो के रूप में पेश कर दिया है.

    वेबसाइट ने लिखा है, "जो सबूत सामने हैं उनसे साफ है कि पतंजलि ने पहले से मौजूद एप्लीकेशन की दोबारा ब्रांडिंग करके पेश कर दिया और उसे स्वदेशी बता दिया."

    पतंजलि प्रोडक्ट्स के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने इन दावों को भी खारिज किया है.

    उन्होंने कहा कि ऐप को पतंजलि में हमारे खुद के इंजीनियर और डेवलपर्स ने तैयार किया है. जब हम ऐप को आधिकारिक तौर पर लॉन्च करेंगे तो आप देख पाएंगे की हमने इस पर कितनी मेहनत की है.

    भारत में जून तक इंटरनेट यूज़र्स की संख्या 50 करोड़ तक पहुंचने के आसार हैं. ऐसे में व्हॉट्सएप के लिए भारत एक बहुत बड़ा बाज़ार बन चुका है.

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    BBC Hindi
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    English summary
    Patanjalis Kimbo app questioned on indigenous claims

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