अब आसमान में तेल टैंकर का काम करेंगे यात्री विमान, भारत उठा रहा है बड़ा कदम, जानिए क्यों है जरूरी ?
नई दिल्ली, 7 अप्रैल: भारत अपने यात्री विमानों को ही एयर फोर्स की जरूरतों को पूरा करने के लिए मिड-एयर रिफ्यूलिंग एयर टैंकर में बदलने पर काम कर रहा है। इसके लिए इजरायल की कंपनी के साथ करार किया गया है। वैसे विमान बनाने वाली कंपनियां मिड-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर भी बनाती हैं, लेकिन जानकार मानते हैं कि यात्री विमानों का ही इस काम के लिए इस्तेमाल करना ज्यादा किफायती साबित हो सकता है। बता दें कि यह सुविधा इसलिए जरूरी है क्योंकि फाइटर जेट को ईंधन के लिए जमीन पर लैंड करने की जरूरत खत्म की जा सकती है और वह ज्यादा देर तक बिना उतरे ही लंबी दूरी तय कर सकते हैं। जब फ्रांस से राफेल जेट आ रहे थे तो उसकी भी हवा में ही रिफ्यूलिंग की गई थी।

यात्री विमान ही मिड-एयर रिफ्यूल टैंकर में बदले जाएंगे
भारत अपने पैसेंजर विमान को आसमान में ईंधन भरने के लिए तेल टैंकर के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है। कई वर्षों से अपनी वायु सेना की इस जुरूरत को पूरा करने के लिए सरकार हवा में तेल भरने वाले टैंकर खरीदने की कोशिश कर रहा है। लेकिन, अब मौजूदा बोइंग 767 यात्री विमानों को ही मिड-एयर रिफ्यूलर्स के तौर पर बदलना चाह रहा है। बुधवार को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने इसकी घोषणा की है कि इसके लिए इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के साथ एक करार हुआ है। इसके तहत इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज भारत के पैसेंजर विमान को मल्टी-मिशन टैंकर ट्रांसपोर्ट में तब्दील करेगा।

इटली और जापान पहले से कर रहे हैं इस्तेमाल
दी प्रिंट ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि बोइंग 767 यात्री विमान को तेल टैंकर में बदलने का करार हुआ है, जो इटली और जापान की सेना भी इस्तेमाल कर रही है। बोइंग कंपनी के पास विशेष टैंकर भी हैं, जिसे केसी-46 पेगासस कहते हैं, जो कि बोइंग 767 का ही वैरिएंट है। यात्री विमानों को कार्गो और टैंकर में बदलना इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के लिए एक आकर्षक व्यवसाय की तरह रहा है और वह इस बिजनेस का बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरा है। (दूसरी तस्वीर सौजन्य-@Israel_MOD)

अभी 6 रूसी इल्युशिन-78 टैंकरों का हो रहा है इस्तेमाल
आसमान में रिफ्यूलिंग की सुविधा की कमी इंडियन एयरफोर्स की क्षमता के लिए बहुत बड़ा बाधक रहा है। इस तकनीक के मिल जाने से फाइटर जेट को ईंधन के लिए बिना जमीन पर उतरे लंबी दूरी तक कवर करने की क्षमता हासिल हो जाती है। इस समय भारत 6 रूसी इल्युशिन-78 टैंकरों का इस्तेमाल कर रहा है। पहली बार इसे 2003 में शामिल किया गया था, लेकिन अब मेंटेनेंस और सर्विस की मुश्किलों को झेल रहा है। नए मिड-एयर रिफ्यूलर खरीदने की कोशिशें भी चल रही हैं, जिसमें बोइंग और एयरबस दोनों प्रतिस्पर्धा में हैं।

यात्री विमानों को टैंकर में बदलना काफी किफायती
भारत फ्रांस के साथ भी एक ए330 मल्टी-रोलर टैंकर ट्रांसपोर्ट फ्रेंच एयर फोर्स से लीज पर लेने के लिए बातचीत कर रहा है, जिसका ट्रेनिंग कार्य में उपयोग होना है। सूत्र के मुताबिक कम समय के लिए लीज पर अभी मंथन जारी है, लेकिन कोई भी स्पेशलाइज्ड टैंकर नहीं है, जिसकी खरीद होगी। एक सूत्र का कहना है कि 'नया खरीदने से यात्री विमान को टैंकरों में कंवर्ट करना बहुत ज्यादा सस्ता है। '

6 यात्री विमानों को एयर रिफ्यूल टैंकर में बदलने की योजना
सूत्र ने यह भी जानकारी दी है कि भारत कम से कम 6 यात्री विमानों को टैंकरों में बदलने की सोच रहा है। यह डेवलपमेंट एयरबस के लिए बहुत बड़े झटके की तरह है, क्योंकि भारतीय सेना की योजना में वही मिड एयर रिफ्यूलर्स की रेस में आगे थी। सूत्र का कहना है कि अभी तो हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के बीच डील की बात है, लेकिन भविष्य में सीधे बोइंग को ही इस तरह की डील में शामिल किया जा सकता है, क्योंकि वह इस विमान की निर्माता है। (दूसरी तस्वीर के अलावा बाकी प्रतीकात्मक)












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