आखिरकर 2 सालों बाद, संसदीय पैनल ने डेटा संरक्षण विधेयक-2019 पर रिपोर्ट को दिया अंतिम रूप
आखिरकर 2 सालों बाद, संसदीय पैनल ने डेटा संरक्षण विधेयक-2019 पर रिपोर्ट को दिया अंतिम रूप
नई दिल्ली, 22 नवंबर: व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक-2019 (पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन बिल) पर संयुक्त समिति की मसौदा रिपोर्ट को बहुमत से अपनाया गया है। संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक में इस बिल को बहुमत से अपनाया गया है। व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक-2019 को आगामी संसद सत्र में पेश किया जाएगा। व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक पर हुई संयुक्त संसदीय समिति की बैठक को बीजेपी सांसद पीपी चौधरी के नेतृत्व में पूरा किया गया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इससे पहले दिसंबर 2019 में व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक- 2019 को मंजूरी दी थी। आखिरकर दो सालों से अधिक समय के बाद संसदीय पैनल ने डेटा संरक्षण विधेयक-2019 पर रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया है।

ये बिल भारतीय नागरिकों के डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा से संबंधित है। इस बिल में 'निजता के अधिकार' को मौलिक अधिकार घोषित किया गया है। डेटा संरक्षण विधेयक को पहली बार 2019 में संसद में लाया गया था और उस समय इसे जेपीसी के पास जांच के लिए भेजा गया था।
व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक-2019 ऐतिहासिक कानून है जिसका उद्देश्य अपने व्यक्तिगत डेटा से संबंधित व्यक्तियों की गोपनीयता की सुरक्षा प्रदान करना है। इसके अलावा इस बिल का मकसद है, यह देखना कि कैसे विभिन्न कंपनियां और संगठन भारत के अंदर व्यक्तियों के डेटा का उपयोग कैसे करते हैं। विधेयक के 2019 के मसौदे में एक डेटा संरक्षण प्राधिकरण (डीपीए) के गठन का प्रस्ताव है, जो देश के भीतर सोशल मीडिया कंपनियों और अन्य संगठनों द्वारा उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डेटा के उपयोग को नियंत्रित करेगा।
उपयोगकर्ता डेटा को बनाए रखने वाली कंपनियों के लिए डेटा स्थानीयकरण मानदंड निर्धारित करने की भी उम्मीद है। बता दें कि 2019 में प्रस्तावित मसौदा विधेयक का सोशल मीडिया फर्मों, विशेषज्ञों और यहां तक कि मंत्रियों ने भी विरोध किया था। विरोधियों का कहना था कि इसमें उपयोगकर्ताओं और कंपनियों दोनों के लिए प्रभावी और फायदेमंद होने के लिए बहुत अधिक खामियां हैं।












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