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Parliament special session: क्यों पीएम मोदी के एजेंडे में हो सकता PoK? चुनावों से पहले के ये संकेत समझिए

संसद के विशेष सत्र के कुछ एजेंडे तो साफ हो चुके हैं, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि क्या इसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को लेकर भी कुछ होना है। दरअसल, जबसे बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने पीओके को लेकर बयान दिया है, इस तरह की अटकलें हैं कि हो सकता है कि सरकार के एजेंडे में कुछ बड़ा करना शामिल हो।

वीके सिंह ने राजस्थान चुनाव से पहले दौसा में पार्टी के एक कार्यक्रम में यह बयान दिया है। इसलिए हो सकता है कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ऐसा कार्ड चलने की ताक में हो, जो देश की जनता के लिए बहुत भावनात्मक मुद्दा है और विपक्ष के तमाम एजेंडे के भी हवा निकाल सकता है।

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यह सिर्फ समय की बात है-पीओके पर वीके सिंह
दरअसल, जनरल वीके सिंह ने कहा है, 'पीओके का खुद ही भारत में विलय हो जाएगा, यह सिर्फ समय की बात है।' वह पीओके में रहने वाले शिया मुसलमानों की ओर से सीमा खोले जाने की मांग पर पूछे गए सवालों का जवाब दे रहे थे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी दे चुके हैं संकेत
लेकिन, जनरल सिंह पहले मंत्री नहीं हैं, जिन्होंने इस तरह की बात कही है। उनसे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी ऐसा ही संकेत दे चुके हैं। 2022 के अक्टूबर के आखिर में श्रीनगर में आयोजित 'शौर्य दिवस' कार्यक्रम में उन्होंने पीओके और गिलगित बाल्टिस्तान को लेकर बहुत बड़ी बात कही थी।

संसद से सर्वसम्मति पारित प्रस्ताव लागू करने का लक्ष्य-राजनाथ सिंह
उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार का लक्ष्य संसद से 22 फरवरी, 1994 को सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव को लागू करना है, ताकि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद गिलगित बाल्टिस्तान जैसे कश्मीर के बचे हुए भाग को भी वापस लिया जाए।

2020 में संसद में भी उठ चुका है मामला
थोड़ा और पीछे चलते हैं। जब 5 अगस्त, 2019 को मोदी सरकार ने जम्मू और कश्मीर से आर्टिकल 370 खत्म किया था। उसके बाद 11 मार्च, 2020 को संसद में विदेश मामलों के मंत्रालय के सामने भी यह सवाल उठा था कि 1994 में संसद के दोनों सदनों से सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव पर सरकार क्या कर रही है? जिसके मुताबिक संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न अंग रहे हैं, हैं और रहेंगे।

सरकार संसद को दे चुकी है यह जवाब
इसके जवाब में सरकार की ओर से कहा गया कि सरकार भारत के क्षेत्रों में होने वाले सभी गतिविधियों पर निगाह रखती है, जिसमें पाकिस्तान के गैर-कानूनी और जबरन कब्जे वाले इलाके भी शामिल हैं।

अब आखिरी ऐक्शन का वक्त आ गया है?
सरकार की ओर से बताया गया था कि उसने पाकिस्तान से लगातार कहा है कि वह अपने गैर-कानूनी और जबरन कब्जे में रखे इलाकों को तुरंत काली करे और मानवाधिकारों का उल्लंघन करना रोके। यही नहीं इन इलाकों में भौतिक बदलाव लाने की अपनी लगातार की कोशिशों से भी दूर रहे। सवाल है कि क्या अब आखिरी ऐक्शन का वक्त आ गया है?

वीके सिंह का बयान सरकार की नीति की अगली कड़ी है?
क्योंकि वीके सिंह का बयान अचानक नहीं है और यह मोदी सरकार की नीति की एक अगली कड़ी की तरह है, जो एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। पिछले कुछ समय में ऐसी रिपोर्ट आई हैं कि पीओके से उसे लद्दाख में जोड़ने की मांगें भी उठ रही हैं। वहां के लोगों पर बहुत ज्यादा अच्याचार भी हो रहे हैं। ऊपर से पाकिस्तान की माली हालत बहुत ही खराब हो चुकी है।

एक राजनीतिक दल के नजरिए से देखें तो अगर ऐसे में केंद्र सरकार पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर को लेकर कोई बड़ा कदम उठाती है तो आने वाले चुनावों के लिए उसके पास इससे बड़ा हथियार क्या हो सकता है।

यह ऐसा मुद्दा है जो विपक्ष को पूरी तरह से बेदम कर सकता है। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले पुलवामा हमले के बाद मोदी सरकार ने जो एयर स्ट्राइक करके बदला लिया, उसे विपक्ष अभी तक नहीं भूला है। मसलन, जब जनरल वीके सिंह के बयान पर जेडीयू के महासचिव केसी त्यागी से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा, 'उन्होंने चुनाव अभियान के दौरान ये दावा किया है, लेकिन मुझे खुशी होगी कि उनकी भविष्यवाणी सच्चाई में बदल जाए।'

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