अब्दुल हमीद: भारतीय सेना का जवान, जिसने 7 पाकिस्तानी टैंकों के उड़ा दिए थे परखच्चे, बदल दी थी जंग की दिशा
अब्दुल हमीद: भारतीय सेना का जवान, जिसने 7 पाकिस्तानी टैंकों के उड़ा दिए थे परखच्चे, बदल दी थी जंग की दिशा
नई दिल्ली, 01 जुलाई: अब्दुल हमीद, भारतीय सेना का वह जवान जिसे आज भी 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान के जंग में दिखाई बहादुरी के लिए याद किया जाता है। परमवीर चक्र से सम्मानित अब्दुल हमीद ने 1965 में भारत पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में पाकिस्तान के एक-दो नहीं बल्कि सात टैंकों के परखच्चे उड़ा दिए थे। इस वजह से जंग की दिशा ही बदल गई थी। उस वक्त माना जाता था कि ये पैटन टैंकों अजेय है। इस जंग के दौरान 10 सितंबर 1965 को अब्दुल हमीद शहीद हुए थे। आज यानी 01 जुलाई को अब्दुल हमीद की जयंती है। अब्दुल हमीद का जन्म उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के धरमपुर गांव में 01 जुलाई 1933 को हुआ था। उनके मरणोपरांत उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

20 साल की उम्र में भारतीय सेना में शामिल हुए अब्दुल हमीद
अब्दुल हमीद के पिता मोहम्मद उस्मान सिलाई का काम करते थे। उनके पिता एक दर्जी थे। वह चाहते थे कि अब्दुल भी काम में उनका साथ दें। लेकिन अब्दुल हमीद ने भारतीय सेना में शामिल होने का फैसला किया। 20 साल की उम्र में अब्दुल हमीद वाराणसी में भारतीय सेना में शामिल हुए। उन्होंने निसाराबाद ग्रिनेडियर्स रेजिमेटंल सेंटर में ट्रेनिंग ली थी। ट्रेनिंग के बाद उन्हें 1955 में 4 ग्रेनेडियर्स में पोस्टिंग मिली। अब्दुल हमीद लाठी भांजने, कुश्ती करने, तैरने में माहिर थे। अब्दुल हमीद ने भारत चीन युद्ध (1962) में भी थांग ला से 7 माउंटेन ब्रिग्रेड, 4 माउंटेन डिविजन की ओर से हिस्सा लिया था।

अपशकुन तोड़, पत्नी के रोकने पर भी नहीं रूके थे अब्दुल हमीद
कहा जाता है कि भारत-पाकिस्तान युद्ध की शुरुआत के वक्त अब्दुल हमीद छुट्टी पर अपने घर आए हुए थे। लेकिन पाकिस्तान की ओर से तनाव बढ़ने की खबरों के बीच उन्हे सीमा पर वापस आने का संदेश आया। कई मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि संदेश आने के बाद बिस्तरबंद बांधते वक्त उसकी रस्सी टूट गई थी। जिसके बाद अब्दुल हमीद की पत्नी रसूलन बीबी ने कहा था कि ये तो अपशकुन होता है। पत्नी ने उन्हें उस दिन ना जाने से रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन हमीद नहीं माने और देश के लिए अपना फर्ज निभाने अपशकुन तोड़ कर भी चले गए थे।

जीप में बैठकर ही ध्वस्त कर दिए थे पाकिस्तानी टैंक
भारत-पाक जंग (1965 ) के दौरान अब्दुल हमीद पंजाब के तरनतारण जिले के खेमकरण सेक्टर में तैनात थे। उसी दौरान पाकिस्तानी सेना ने अमेरिकन पैटन टैंकों से उताड़ गांव में हमला कर दिया था। दिन था 8 सितंबर 1965 का। उस दिन सुबह 9 बजे चीमा गांव के बाहरी इलाके में अब्दुल हमीद जीप से गन्ने के खेतों से गुजर रहे थे। वह ड्राइविंग सीट के बगल में बैठे थे। उन्होंने पाकिस्तानी सेना के टैंक को आते हुए देखा और रिकॉयलेस गन की रेंज में टैंकों के आने का इंतजार करने लगे। अब्दूल हमीद ने टैंकों के रेंज में आते ही फायरिंग की और एक साथ 4 टैंक उड़ा दिए थे।

जीप में बैठकर ही ध्वस्त कर दिए थे पाकिस्तानी टैंक
भारत-पाक जंग (1965 ) के दौरान अब्दुल हमीद पंजाब के तरनतारण जिले के खेमकरण सेक्टर में तैनात थे। उसी दौरान पाकिस्तानी सेना ने अमेरिकन पैटन टैंकों से उताड़ गांव में हमला कर दिया था। दिन था 8 सितंबर 1965 का। उस दिन सुबह 9 बजे चीमा गांव के बाहरी इलाके में अब्दुल हमीद जीप से गन्ने के खेतों से गुजर रहे थे। वह ड्राइविंग सीट के बगल में बैठे थे। उन्होंने पाकिस्तानी सेना के टैंक को आते हुए देखा और रिकॉयलेस गन की रेंज में टैंकों के आने का इंतजार करने लगे। अब्दूल हमीद ने टैंकों के रेंज में आते ही फायरिंग की और एक साथ 4 टैंक उड़ा दिए थे।

ऐसे शहीद हुए थे अब्दुल हमीद
कहा जाता है कि अब्दुल हमीद के 4 पाकिस्तानी टैंक उड़ाने वाली बात 9 सितंबर 1965 को सेना मुख्यायल में पहुंच चुकी थी। 10 सितंबर 1965 को अब्दुल हमीद ने 3 और पाकिस्तानी टैंक को उड़ा दिए थे। लेकिन इसी दौरान एक पाकिस्तानी सैनिक की अब्दुल हमीद पर नजर पड़ गई और वह उसकी फायरिंग में शहीद हो गए।
अब्दुल हमीद को उनकी वीरता के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। वहीं साल 2000 में भारतीय डाक विभाग ने 3 रुपये का एक डाक टिकट जारी किया, जिसपर वीर अब्दुल हमीद की तस्वीर बनी है, जिसमें वह जीप पर सवार रिकॉयलेस राइफल से गोली चलाते हुए दिखाई दे रहे हैं।












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