PAK Airspace: नुकसान झेलने के बाद भी जिद पर अड़ा पाकिस्तान, भारतीय विमानों पर एयरस्पेस का बैन फिर बढ़ाया
भारत का पड़ोसी मुल्क अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। पाकिस्तान ने बुधवार को भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र (Airspace ) पर प्रतिबंध 23 सितंबर तक बढ़ा दिया। पाकिस्तान हवाई अड्डा प्राधिकरण (PAA) ने एक नया नोटम (एयरमैन को नोटिस) जारी कर एक महीने के विस्तार की घोषणा की, जिसमें भारतीय स्वामित्व वाले, संचालित या लीज पर लिए गए नागरिक और सैन्य दोनों विमान शामिल हैं।
अथॉरिटी ने कहा कि, 'भारतीय एयरलाइनों द्वारा ऑपरेट सभी विमानों को पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। यह प्रतिबंध भारतीय स्वामित्व वाले या लीज पर लिए गए सैन्य और नागरिक विमानों पर भी लागू रहेगा।'

सबसे पहले 23 अप्रैल को लगाया था प्रतिबंध
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, हवाई क्षेत्र पर पहली बार 23 अप्रैल को एक महीने के लिए प्रतिबंध लगाया गया था। शुरुआती प्रतिबंध के तहत भारतीय एयरलाइनों के पाकिस्तान के ऊपर से उड़ान भरने पर रोक लगाई गई थी। भारत ने भी 30 अप्रैल को पाकिस्तानी विमानों के लिए हवाई क्षेत्र बंद कर दिया, जिससे बदले की भावना से प्रतिबंधों की एक सीरीज शुरू हो गई।
प्रतिबंध के कारण प्रतिदिन सैकड़ों उड़ानें प्रभावित
प्रतिबंध को पहली बार 23 मई को बढ़ाया गया था। जुलाई में पाकिस्तान ने प्रतिबंध को 24 अगस्त तक बढ़ा दिया, जिससे प्रतिदिन सैकड़ों उड़ानें प्रभावित हुईं।
प्रतिबंध से PAK को 1,240 करोड़ रुपये का नुकसान
लंबे समय तक बंद रहने से पाकिस्तान के विमानन क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ है। डॉन के अनुसार, रक्षा मंत्रालय के हवाले से, पाकिस्तान हवाई अड्डा प्राधिकरण को केवल दो महीनों में 1,240 करोड़ रुपये (4.1 अरब पाकिस्तानी रुपये) से अधिक का नुकसान हुआ है। यह नुकसान पारगमन शुल्क से हुआ है क्योंकि प्रतिदिन 100-150 भारतीय विमान उड़ान भरते हैं, जिससे पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र में यातायात लगभग 20 प्रतिशत कम हो गया है।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने क्या कहा?
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने पुष्टि की कि प्रतिबंध से राजस्व का काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि, 'इस बंद ने हमारे हवाई क्षेत्र के शुल्क और पारगमन यातायात को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।'
एयरलाइनों के लिए बड़ी चुनौतियां
इन प्रतिबंधों ने एयरलाइनों के लिए बड़ी चुनौतियां पैदा कर दी हैं, जिससे उन्हें लंबे रूटों पर उड़ान भरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है जिससे अधिक ईंधन की खपत होती है और उड़ान का समय बढ़ जाता है। एयरलाइनों को चालक दल के रोटेशन और समय-सारिणी संबंधी समस्याओं से भी जूझना पड़ रहा है, जिससे परिचालन लागत बढ़ रही है।












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