सेना प्रमुख का बयान, बोले- अभी सिर्फ जंग का ट्रेलर, भविष्य के लिए तैयारी जरूरी
नई दिल्ली, 03 फरवरी: सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने गुरुवार को चीन और पाकिस्तान से उत्पन्न होने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर अपना बयान दिया। एक ऑनलाइन सेमिनार को संबोधित करते हुए आर्मी चीफ ने कहा कि हम भविष्य के संघर्षों के ट्रेलर देख रहे हैं। इसी के साथ उन्होंने कहा कि विरोधी अपने रणनीतिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रयासों के साथ जारी रहेंगे।

सेना प्रमुख ने ऑनलाइन सेमिनार में अपने एक संबोधन में कहा कि भारत "अद्वितीय, पर्याप्त और बहु-डोमेन" सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सूचना तंत्र के वक्त में यह जंग साइबर स्पेस, नेटवर्क के माध्यम से लड़ी जा रही है। हमें इसी के बेस्ड पर भविष्य के लिए जंग का मैदान तैयार करना होगा।
चीन और पाकिस्तान का नाम लिए बिना सेनाध्यक्ष ने कहा कि परमाणु-सक्षम पड़ोसियों के साथ विवादित सीमाएं राज्य प्रायोजित छद्म युद्ध (proxy war) के साथ मिलकर सुरक्षा तंत्र और संसाधनों की जरूरत को रेखांकित कर रहा है। उन्होंने कहा, "हम भविष्य के संघर्षों के ट्रेलर देख रहे हैं। ये सूचना प्रणाली युद्ध के मैदान पर, नेटवर्क और साइबर स्पेस के रूप लागू किए जा रहे हैं। इनके जरिए अस्थिर और सक्रिय सीमाओं पर साजिश का खेल खेला जा रहा है।"
वहीं अपने बयान में एमएम नरवणे ने कहा कि इन ट्रेलरों के आधार पर हमें कल के युद्ध के मैदान की कल्पना करनी होगा। यदि आप अपने चारों ओर देखते हैं, तो आपको आज की वास्तविकता का एहसास होगा।" सेना प्रमुख ने कहा कि उत्तरी सीमाओं के घटनाक्रम ने देश की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक वाले साजो-सामान से लैस सक्षम बलों की आवश्यकता को पर्याप्त रूप से रेखांकित करते हैं। उन्होंने कहा कि हमारा विरोधी अपने रणनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के अपने प्रयासों को जारी रखेगा। इसी के साथ उन्होंने आगे कहा कि हम इन परिवर्तनों के लिए अपने परिचालन अनुभवों को और मजबूत कर रहे हैं और यह एक कार्य प्रगति पर रहेगा।
एलओसी पर संघर्ष विराम जारी
आर्मी चीफ जनरल एम एम नरवणे ने कहा कि एलओसी पर पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम जारी है, क्योंकि भारत ने ताकत की स्थिति से बातचीत की है। उन्होंने बताया कि भारत और पाकिस्तान पिछले साल फरवरी में संघर्ष विराम पर सहमत हुए थे, जिसके बाद सीमा पार से गोलीबारी की घटनाओं में काफी कमी आई है।












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