जसंवत सिंह को टिकट ना दिये जाने से सुषमा भी दुखी हुईं
शनिवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता जसंवत सिंह का एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान भावुक हो जाना यह बताने के लिए काफी है कि पार्टी के अंदर केवल आडवाणी ही अनदेखेपन और उपेक्षा के शिकार नहीं है बल्कि और भी लोग हैं जो पार्टी के उन लोगों से बेहद नाराज हैं जो इन दिनों वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी करते हुए नये लोगों को टिकट दे रहे हैं।
लोकसभा चुनाव और लोकतंत्र की जान...
जिसके बारे में बात करते हुए भाजपा कि दिग्गज नेता और नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने भी कहा कि वह बाड़मेर से जसवंत सिंह को टिकट नहीं दिये जाने से बेहद दुखी हैं। खैर उन्होंने यह जरूर कहा कि पार्टी में टिकट का फैसला चुनाव समिति करती है। इसलिए वह इस पर टिप्पणी नहीं कर सकती हैं लेकिन जो कुछ भी हुआ है उससे वह व्यक्तिगत रूप से बेहद दुखी हैं।
गौरतलब है कि राजस्थान के बाड़मेर से प्रत्याशी नहीं बनाए जाने से नाराज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह ने शनिवार को कहा कि पार्टी पर बाहरी लोगों का कब्जा हो गया है। जसवंत सिंह के करीबी लोगों ने कहा कि वे संभवत: भाजपा से जल्दी ही इस्तीफा दे देंगे। पार्टी के लोग उन्हें मनाने में एड़ी-चोटी एक किए हुए हैं।
Did You Know: बाड़मेर में 1.5 लाख राजपूत मतदाता हैं
उन्होंने जोधपुर में संवाददाताओं से कहा, "भाजपा पर अतिक्रमण हो चुका है। यह पार्टी की प्रकृति और चरित्र पर हावी हो रहा है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पार्टी पर उन बाहरी लोगों ने कब्जा कर लिया है जिनके दिल में पार्टी और उसकी विचारधारा के प्रति कभी सम्मान नहीं था।"
उन्होंने कहा, "भाजपा दो घड़ों में विभाजित हो चुकी है। एक असली भाजपा और दूसरी नकली भाजपा। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि नकली घड़े ने अब पार्टी पर कब्जा कर लिया है।"जसवंत के करीबी सूत्रों ने कहा कि वे पार्टी से शीघ्र ही इस्तीफा देकर बाड़मेर से निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं।
Did You Know: बाड़मेर में 1.5 लाख राजपूत मतदाता हैं। ऐसे में अगर जसवंत सिंह भाजपा छोड़कर निर्दलीय चुनाव लड़ते हैं तो निश्चित तौर पर बाड़मेर में भाजपा को हार का सामना करना पड़ेगा।













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