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पहलू ख़ान: जज ने अपने फ़ैसले में जांच पर उठाए हैं कई सवाल

By टीम बीबीसी हिंदी नई दिल्ली

पहलू ख़ान
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पहलू ख़ान

पहलू ख़ान लिंचिंग मामले के सभी अभियुक्तों को राजस्थान की एक निचली अदालत ने बुधवार को बरी कर दिया.

अलवर के सत्र न्यायालय ने इस मामले में अभियोजन पक्ष की जांच और पहलू ख़ान पर हुए बर्बर हमले का वीडियो बनाने के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए मोबाइल फ़ोन की विश्वसनीयता को 'संदेहपूर्ण' बताते हुए यह फ़ैसला सुनाया.

एडिशनल सेशंस जज डॉक्टर सरिता स्वामी ने छह अभियुक्तों को बरी करने वाले 92 पन्नों के आदेश में कहा, "अभियोजन पक्ष इस मामले में अभियुक्तों का दोष सिद्ध करने में नाकाम रहा है."

जज डॉ. स्वामी ने अपने आदेश में लिखा है कि जिस मोबाइल फ़ोन को कथित तौर पर इस बर्बर घटना को रिकॉर्ड करने के लिए इस्तेमाल किया गया था, उसे पुलिस ने कभी अपने क़ब्ज़े में लिया ही नहीं.

आगे लिखा है, ''यह वीडियो वाक़ई बनाया गया था या इससे छेड़ख़ानी तो नहीं हुई, इसका पता लगाने के लिए इस फ़ोन को फ़ॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (एफ़एसएल) भी नहीं भेजा गया.''

VIDEO GRAB

जांच में 'गंभीर कमियां'

बीबीसी के पास 92 पन्नों के फ़ैसले की एक प्रति है जिसमें विपिन यादव, कालू राम, रविंद्र कुमार, भीम सिंह, दयानंद और योगेश को पर्याप्त सबूत न होने के कारण बरी कर दिया गया.

अभियुक्तों पर भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज है. इसमें 302 (हत्या), 341 (सदोष अवरोध), 308 (ग़ैर इरादतन हत्या की कोशिश), 323 (जानबूझ कर चोट पहुंचाना) आदि शामिल हैं.

अभियोजन पक्ष का कहना है कि 1 अप्रैल, 2017 को पहलू ख़ान, उनके दो बेटों और चार अन्य पर कथित तौर पर गौ-तस्करी के संदेह में हमला हुआ था.

जज ने फ़ैसले में लिखा है, "इस जांच को विश्वसनीय नहीं माना जाता क्योंकि इसमें कई गंभीर कमियां हैं."

पहलू ख़ान के बेटे इरशाद
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पहलू ख़ान के बेटे इरशाद

वीडियो पर भी सवाल

कोर्ट ने कहा कि दो वीडियो में से पहले वीडियो को सबूत के तौर पर भरोसे लायक़ नहीं माना जा सकता क्योंकि मोबाइल फ़ोन को न तो क़ब्ज़े में लिया गया और न ही उसे विश्वसनीय जांच के लिए एफ़एसएल के पास भेजा गया.

जज डॉ. स्वामी ने अपने फ़ैसले में 'संदेह के लाभ' के आधार पर अभियुक्तों को सभी आरोपों से बरी कर दिया.

कोर्ट ने दूसरे वीडियो पर भी विचार करने से इनकार कर दिया क्योंकि जिस गवाह ने इसे शूट होते हुए देखा था, वह पहले ही बयान से पलट गया था.

भीड़
Getty Images
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अदालत ने यह भी कहा कि गंभीर रूप से घायल पहलू ख़ान का बयान उसका इलाज कर रहे डॉक्टरों के उचित सहयोग के बिना दर्ज किया गया था.

फ़ैसले में यह भी लिखा है कि पहलू ख़ान के दिए बयान को मामला दर्ज होने के 16 घंटे बाद संबंधित पुलिस स्टेशन में पेश किया गया था.

इस मामले में अभियुक्तों के ख़िलाफ़ दो आरोप-पत्र दाख़िल किए गए थे. पहला 31 मार्च, 2017 को और दूसरा 28 अक्तूबर, 2017 को.

BBC Hindi
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English summary
Pahlu Khan: Judge has raised many questions on the investigation in his decision
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