100 पूर्व नौकरशाहों ने लिखा खुला पत्र, कहा- भारत को NPR और सीएए की जरूरत नहीं

नई दिल्ली। संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) की संवैधानिक वैधता पर गंभीर आपत्ति जताते हुए 100 से अधिक पूर्व नौकरशाहों ने गुरुवार को लोगों के नाम एक खुला पत्र लिखा है। इस खुले खत में पूर्व नौकरशाहों ने लिखा कि, एनपीआर और एनआरसी अनावश्यक और व्यर्थ की कवायद है। जिससे बड़े पैमाने पर लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। नौकरशाहों में दिल्ली के पूर्व उप राज्यपाल नजीब जंग, तत्कालीन कैबिनेट सचिव के एम चंद्रशेखर और पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला शामिल हैं।

Over 100 retired bureaucrats write open letter, says India doesnt need NPR and CAA

खुले खत में पूर्व नौकरशाहों ने निवेदन किया है कि, केंद्र सरकार राष्ट्रीय पहचानपत्र से संबंधित नागरिकता कानून 1955 की प्रासंगिक धाराओं को निरस्त करे। पूर्व ब्यूरोकेट्स ने पत्र में लिखा कि, ऐसे समय जब देश की आर्थिक स्थिति पर देश की सरकार की ओर से गंभीर ध्यान दिये जाने की जरूरत है, भारत ऐसी स्थिति बर्दाश्त नहीं कर सकता जिसमें नागरिकों और सरकार के बीच सड़कों पर टकराव हो।

खत में लिखा कि, बहुसंख्यक राज्य सरकारें एनपीआर या एनआरआईसी लागू करने को तैयार नहीं हैं जिससे केंद्र और राज्य के संबंधों में एक गतिरोध उत्पन्न हो। पत्र में लोगों से सरकार से यह भी आग्रह करने के लिए कहा गया है कि वह विदेशी (न्यायाधिकरण) संशोधन आदेश, 2019 के साथ ही डिटेंशन कैंप निर्माण के सभी निर्देश वापस ले और संशोधित नागरिकता कानून (सीएए), 2019 को रद्द करे।

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