Opinion: तेलंगाना बना इंवेस्टमेंट कैपिटल, 150 फीसदी वृद्धि असाधारण है
देश में आज निवेश की बात करने पर तेलंगाना का नाम प्रमुखता से जुबान पर आता है। इसकी वजह ये है कि राज्य में ऐसी नीतियां लागू की गई हैं, जो निवेशकों को काफी आकर्षित कर रहे हैं।

आज की तारीख में तेलंगाना देश भर में निवेश की पहचान बन चुका है। यह बात सिर्फ कहने की नहीं है। केंद्र सरकार के संगठन भी इस हकीकत को मान रहे हैं। निवेश का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव तो यह पड़ा है कि इसके चलते राज्य में रोजगार की संभावनाएं भी कई गुना बढ़ चुकी हैं। एमएसएमई एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल की रिपोर्ट से पता चलता है कि 2020-21 की तुलना में राज्य में निवेश में 150 फीसदी का विकास दर्ज हुआ है। इस रिपोर्ट में प्रमुख क्षेत्रों में राज्य में हुई प्रगति के साथ-साथ निवेशकों के दिलों में इसके प्रति बढ़ते भरोसे को भी प्रमुखता से जगह दी गई है। जब से तेलंगाना राज्य का गठन हुआ है, राज्य में 2.6 लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। इसके माध्यम से प्रदेश में 17.53 लाख लोगों को रोजगार मिला है।

तेलंगाना में निवेश प्रस्तावों में एक साल में 150 फीसदी वृद्धि
तेलंगाना और निवेश आज पर्यावाची शब्द की तरह बन चुके हैं। एमएसएमई एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ने 'इंवेस्टमेंट एंड डेवलपमेंट इन तेलंगाना' पर एक शोध किया है। इसके मुताबिक पिछले दो वित्त वर्षों में ही राज्य में एक लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश आया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020-21 की तुलना में 2021-22 में निवेश प्रस्तावों का मूल्य करीब 150 फीसदी बढ़ गई है। क्योंकि, साल 2020-21 में राज्य को 31,274.56 करोड़ रुपए निवेश का प्रस्ताव मिला था। जबकि, साल 2021-22 में यह निवेश प्रस्ताव बढ़कर 76,568.89 करोड़ रुपए का हो गया।

निवेशकों के लिए आदर्श राज्य बन चुका है तेलंगाना
इस रिपोर्ट की मानें तो तेलंगाना आज निवेशकों के लिए आदर्श राज्य के तौर पर स्थापित हो चुका है। इसके अनुसार राज्य सरकार ने जो मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की है, वह उद्योगों के हक में हैं और अच्छे परिणाम भी मिल रहे हैं। मेडिसिन के क्षेत्र में तो तेलंगाना अपना झंडा गाड़ ही चुका है। रिपोर्ट से पता चलता है कि अच्छे इलाज की उम्मीद में 2 लाख लोग दूसरे देशों से तेलंगाना पहुंचे। ज्यादातर लोग अफ्रीकी, खाड़ी और राष्ट्रमंडल देशों से आए हैं। एमएसएमई एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन डीएस रावत ने कहा कि तेलंगाना आज आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, ब्लॉक चेन, क्लाउड एडप्शन और साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र के लिए भी बहुत आकर्षक स्थान बन चुका है। इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2022 में निजी क्षेत्र में निवेश में भारी बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2022 में 14,882.35 करोड़ रुपए के निवेश से बढ़कर यह 60,618.05 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है।

केटीआर का बहुत बड़ा योगदान
ऐसे समय में जब देश की जीडीपी में 1.4 फीसदी की गिरावट देखी गई, तेलंगाना तमाम विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए 2.2 फीसदी की जीडीपी वृद्धि वाला राज्य बना। रिपोर्ट में इस बात का खास तौर पर उल्लेख किया गया है कि आईटी सेक्टर में निवेश के लिए तेलंगाना सबसे उपयुक्त राज्य है। यदि अमेरिका के बाद दुनिया की पांच टॉप आईटी कंपनियों ने कहीं अपना हेडक्वार्टर बनाया है तो वो हैदराबाद में हैं। 2014-15 में राज्य से आईटी निर्यात जो 66,276 करोड़ रुपए का था, वह 2021-22 में दोगुना से भी बढ़कर 1,45,522 करोड़ रुपए का हो चुका था। कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र ने भी साल 2020-21 में 12.4 फीसदी और 2021-22 में 9.09 फीसदी विकास दर्ज किया है। रिपोर्ट में यह बात पुख्ता तरीके से रखने की कोशिश की गई है कि यह सब संभव ही नहीं था, यदि निवेश को प्रोत्साहन नहीं मिलता और मदद वाली पॉलिसी नहीं लागू की जाती। जाहिर है कि यह सब हो पाया है तो इसके पीछे राज्य के नगर निकाय प्रशासन और शहरी विकास, उद्योग और वाणिज्य के साथ-साथ आईटी इलेक्ट्रोनिक्स एंड कम्युनिकेशन मंत्री केटी रमाराव का बहुत बड़ा योगदान है।












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