OPINION: तेलंगाना में विद्युत क्रांति आ चुकी है, जो हुआ है अविश्वसनीय है
तेलंगाना ने अपने गठन के बाद से जो सबसे ज्यादा बदलाव देखे है, उनमें ऊर्जा क्षेत्र भी शामिल है। इसकी वजह से खेती भी उन्नत हुई है, औद्योगिक उत्पादन भी बढ़ा है और रोजगार का भी सृजन हुआ है।

मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने तेलंगाना में हर असंभव को संभव बनाने की कोशिश की है। तेलंगाना के गठन के बाद से उनके प्रयासों की वजह से ही ऊर्जा क्षेत्र में क्रांति संभव हुई है। जबतक तेलंगाना अलग राज्य नहीं बना था, यहां की बिजली व्यवस्था बहुत ही लचर थी। आज वह दिन है, जब प्रदेश में 24x7 निर्बाध बिजली सप्लाई हो रही है। कई राज्यों के लिए यकीन करना नामुमकिन है, लेकिन तेलंगाना की वास्तविकता ये है कि सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण और ट्रांसमिशन एवं डिस्ट्रिब्यूशन को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने 38 हजार करोड़ रुपए खर्च किए हैं। परिणाम देश के सामने है। तेलंगाना आज वह राज्य बन चुका है, जहां बिजली नहीं कटती।

ऊर्जा क्षेत्र में जो बदलाव आया है, वह अकल्पनीय है
तेलंगाना में केसीआर सरकार के कार्यकाल में ऊर्जा क्षेत्र में जो बदलाव आया है, वह अकल्पनीय है। तेलंगाना बनने से पहले ऐसी बिजली व्यवस्था की कल्पना तक नहीं की जा सकती थी। आज यहां बिजली गुल होना एक बहुत बड़ी खबर होती है। यह तब है जब कृषि क्षेत्र को 24 घंटे मुफ्त बिजली सप्लाई हो रही है। बीते 9 वर्षों में राज्य ने जिन क्षेत्रों में अप्रत्याशित प्रगति और बदलाव देखा है, उसमें ऊर्जा क्षेत्र अहम है। बिना रुकावट बिजली सप्लाई की वजह से उद्योगों में भी क्रांति आ गई है और उत्पादन बढ़ गया है। यह इस वजह से मुमकिन हो रहा है कि राज्य के निर्माण के बाद से प्रदेश सरकार ने पांच थर्मल पावर स्टेशनों का निर्माण किया है। भूपालपल्ली में 600 मेगावाट, कोठागुडेम में 800 मेगावाट और मनुगुरु में 1080 मेगावाट की क्षमता के थर्मल पावर स्टेशन बने हैं।

करीब ढाई गुना बढ़ गया बिजली उत्पादन
तेलंगना के मुख्यमंत्री की सोच स्पष्ट है। उनका मानना है कि विकास तभी संभव है, जब प्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत किया जाए। उन्होंने बिजली उत्पादन के लिए दूरदर्शी फैसले लिए और तेलंगाना में प्रगति की गाड़ी बढ़ चली। इसके लिए 38 हजार करोड़ रुपए खर्च करके इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया। बिजली होगी तभी उद्योग लगेंगे और तेलंगाना में बिना बाधा के बिजली सप्लाई करके यही सुनिश्चित किया गया है। इसलिए परिवर्तन संभव हो पाया है। लगातार बिजली मिलने की वजह से ही राज्य में 15 लाख एकड़ में खेती हो रही है और फसल लहलहा रहे हैं। कालेश्वरम लिफ्ट स्कीम में ऊर्जा क्षेत्र की भूमिका अतुलनीय है। जब तेलंगाना बना था तो राज्य में 7,770 मेगावाट बिजली उत्पादित होती थी। आज 18,000 मेगावाट हो रही है।

बदल रहा है तेलंगाना, चमक रहा है हैदराबाद
कहते हैं कि विकास को बिजली की खपत के पैमाने पर भी आंका जा सकता है। तेलंगाना बनने से पहले यहां बिजली की डिमांड 6000 मेगावाट थी। आज की तारीख में यह ढाई गुनी से भी ज्यादा 15,750 मेगावाट हो चुकी है। इन वर्षों में सिर्फ ऊर्जा क्षेत्र में 12,000 नई भर्तियां हुई हैं। 22,600 लोग जो आउटसोर्सिंग के कार्यों से जुड़े थे, उन्हें सीधे रोजगार का मौका मिला है। ऊर्जा क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए पीआरसी लागू किया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि बिजली क्षेत्र में जो बदलाव आया है, उसके लिए जनता पर कोई अतिरिक्त बोझ डाला गया है। 2014 से पहले बिजली पर सालाना 4,500 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी जाती थी। तेलंगाना बनने के बाद से वह 12,000 करोड़ रुपए से ज्यादा दी जा रही है। तेलंगाना सरकार इलेक्ट्रिसिटी डिस्कॉम्स को हर महीने 1000 करोड़ रुपए की सब्सिडी भुगतान कर रही है। इसी का परिणाम है कि हैदराबाद में बिजली नहीं जाती और यह ग्लोबल सिटी बनकर उभरा है।

देश में ऊर्जा सुधार का अग्रदूत बना तेलंगाना
हैदराबाद के आसपास 400 केवी, 220 केवी और 132 केवी के सबस्टेशन बनाए गए हैं और पूरी विद्युत व्यवस्था को एक-दूसरे से जोड़ दिया गया है। इससे कोई मतलब नहीं है कि बारिश हो या तूफान आए, बिजली की आपूर्ति में रुकावट नहीं आनी चाहिए, यह सुनिश्चित कर दिया गया है। नतीजा देश के सामने है। पहले बिजली खपत 40,000 मिलियन यूनिट थी, आज बढ़कर 90,000 मिलियन यूनिट हो चुकी है। बिजली कंपनियों की जिम्मेदारियां बढ़ा दी गई हैं। ऑडिट का काम चल रहा है। इन फैसलों की वजह से तेलंगाना जिस परिवर्तन का गवाह बना है, उसकी वजह से यह देश में ऊर्जा सुधार का अग्रदूत बनकर उभरा है।












Click it and Unblock the Notifications