OPINION: तेलंगाना में कौन सी पार्टी जीत सकती है 75 सीट? सिर्फ एक को है पूरा विश्वास
तेलंगाना चुनाव अभियान निर्णायक मोड़ पर है। तीनों प्रमुख पार्टियां अपनी-अपनी जीत के दावे कर रही हैं। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि लड़ाई सत्ताधारी बीआरएस और कांग्रेस पार्टी के बीच ही ज्यादा है। कांग्रेस अपनी जीत को लेकर निश्चिंत लग रही है।
पर हकीकत ये है कि सीएम केसीआर से बड़ा राज्य में कोई नेता नहीं है। वे भी अपने रणनीतिकारों से पल-पल बदल रहे चुनावी समीकरणों का गुणा-गणित करने में लगे हुए हैं। इनके रणनीतिकारों का कहना है कि 75 सीटों पर तो जीत पक्की है।

कांग्रेस-बीआरएस में लग रहा है मुख्य मुकाबला
तेलंगाना में ज्यादातर लोगों के लिए मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीआरएस के बीच ही लग रहा है। सर्वे करने वाली कंपनियां भी अपने काम में लगी हुईं, लेकिन आचार संहिता की वजह से उनके लिए आंकड़े सार्वजनिक कर पाना मुश्किल है। लेकिन, कहीं न कही राजनीतिक दलों को तो उनसे इनपुट तो मिल ही रहे हैं।
कांग्रेस तय मान रही है अपनी जीत
कांग्रेस एक तरह से खुद में मान चुकी है कि उसे अब सिर्फ शपथग्रहण की तारीख तय करनी है। कांग्रेस के आत्मविश्वास से उलट सीएम केसीआर ने अबकी बार अपनी प्रचार की रणनीति बदल दी है। वह बयानों और भावनात्मक अपीलों को किनारे कर चुके हैं।
सीएम केसीआर ने अपने काम को बनाया ठोस आधार
वह वोटरों के सामने सिर्फ वह काम रख रहे हैं, जो उनकी सरकार ने पिछले 10 साल में तेलंगाना के लिए किए हैं। इसके अलावा बिजली को लेकर कांग्रेस नेताओं ने क्या कुछ कहा था, वह वोटरों के सामने उसपर भी विस्तार से बात कर रहे हैं। धरणी पोर्टल के बारे में भी बात कर रहे हैं और इस आधार पर मतदाताओं से पहले सोचने और फिर वोट डालने की बात कह रहे हैं।
कांग्रेस ने अपने चुनाव अभियान का फोकस सीएम केसीआर के विरोध को बनाया हुआ है। कांग्रेस कुछ लोगों के शासन की जगह जनता के शासन वाला अपना पुरा राग अपना रही है। कांग्रेस पार्टी का चुनाव अभियान दिल्ली और बैंगलुरु से कंट्रोल हो रहा है।
भाजपा को अपनी घोषणाओं पर भरोसा
बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जैसे नेता तेलंगाना आकर कार्यकर्ताओं और समर्थकों का मनोबल बढ़ा चुके हैं। पार्टी को लगता है कि पिछड़ा सीएम और अनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरण का समर्थन उसके पक्ष में जा सकता है।
कांग्रेस के लिए कर्नाटक न कर जाए बैकफायर!
लेकिन, कांग्रेस को भरोसा है कि हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक के बाद तेलंगाना में जीत पक्की है। लेकिन, बीआरएस को लगता है कि कांग्रेस में तो नेताओं के बीच सीएम पद के लिए ही उलझन है। वह कर्नाटक का हवाला दे रहे हैं, जहां मुख्यमंत्री पद का मुद्दा सरकार बनने के 6 महीने बाद भी उछल-उछल कर सामने आता है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव को यकीन है कि हैट्रिक तो लगनी तय है।
बीआरएस को 75 सीटें जीतने का पूरा यकीन
सत्ताधारी दल के नेताओं का कहना है कि केसीआर ने जो सर्वे करवाया है, उसके हिसाब से बीआरएस की सत्ता में वापसी निश्चित है। अगर पार्टी 90 सीटें नहीं भी जीत पाती है तो भी उन्हें लगता है कि 75 सीटों पर तो जीत सुनिश्चित है।
यह बात भी सही है कि तेलंगाना का चुनाव इसी पर हो रहा है कि केसीआर को जीतना चाहिए या फिर केसीआर को हारना चाहिए। वह मानते हैं कांग्रेस की गारंटियां अच्छी हैं। लेकिन, उन्होंने महसूस किया है कि कांग्रेस पार्टी के नेताओं के प्रचार से वोटर प्रभावित नहीं हो पा रहे हैं। 10 साल से सरकार में रहने की वजह से विपक्ष को इसके खिलाफ नरेटिव सेट करना तो आसान हो रहा है।
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लेकिन, बीआरएस को लगता है कि कर्नाटक में कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में जिस तरह की नाकामियों का सामना करने पड़ रहा है, उससे यहां सत्ताधारी पार्टी को फायदा मिल रहा है। ऊपर से केसीआर का अनुभव और प्रदेश की जनता में उनके कद का कोई तोड़ नहीं है और यही 75 सीटें जीतने के उसके भरोसे की वजह है।












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