तेलंगाना चुनाव: भाजपा स्थानीय भीड़ खींचने में हो रही असफल, प्रभावित हो रहा अभियान
तेलंगाना विधानसभा चुनाव 2023 की तैयारी की कवायद जिस भारतीय जनता पार्टी लगभग एक साल पहले से शुरू कर दी थी लेकिन चुनाव से पहले हर मामले में विपक्षी पार्टियों से पिछड़ी हुई है। जब कि ये पार्टी वो पार्टी है जो केंद्र में सत्ता संभाल रही है। भाजपा तेलंगाना में अपने चुनाव प्रचार और जन सभाओं में स्थानीय भीड़ तक को जुटाने में फेल होती नजर आ रही है। अब जब कि चुनाव होने में महज 10 दिन शेष बचे हैं, इस कारण से भाजपा का चुनाव अभियान प्रभावित हो रहा है।

आलम ये है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा के अधिकांश प्रचार अभियान पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अपने निर्वाचन क्षेत्र करीमनगर में चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं और इस कारण से वो निर्वाचन क्षेत्रों के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इससे राज्य में खासकर उत्तरी तेलंगाना क्षेत्र में भाजपा के प्रचार अभियान पर असर पड़ रहा है।
वहीं भीड़ खींचने में सक्षम लोकप्रिय स्थानीय नेताओं की अधिकांश निर्वाचन क्षेत्रों में गैरमौजूदगी के कारण भारतीय जनता पार्टी का प्रचार अभियान उतना तेज नहीं पा रहा जितना भाजपा को आपेक्षित है।
इसके अलावा तेलंगाना भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए एक्टर से राजनेता बने विजयशांति की चुनाव में गैरमौजूदगी भाजपा का प्रचार अभियान को प्रभावित कर रही है। तेलंगाना में भाजपा के फायरब्रैंड नेता और लोकप्रिय एक्टर के पास निर्वाचन क्षेत्रों में भीड़ खींचने और समर्थन आधार को मजबूत करने की क्षमता थी।
हालांकि निजामाबाद के सांसद धर्मपुरी अरविंद, हुजूराबाद के उम्मीदवार एटाला राजेंदर और गोशामहल के विधायक टी राजा सिंह जैसे कुछ भाजपा उम्मीदवार हैं जो भीड़ खींच सकते हैं लेकिन अधिकांश भाजपा के उम्मीदवार ऐसे हैं जो अधिक पॉपुलर नहीं है जिस कारण वो भीड़ जुटाने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। उनको भाजपा के बड़े नेताओं की प्रचार में जरूरत है।
ये ही कुछ कारण है जिसके कारण तेलंगाना में भाजपा को केंद्रीय नेतृत्व पर पूरी निर्भर नजर आ रही है जो भाजपा के लिए प्रतिकूल साबित हो रहा है क्योंकि उम्मीदवार लोगों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।












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