Opinion: तेलंगाना सरकार के एक फैसले ने 43 हजार ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों के जीवन में खुशियां भर दीं
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के एक फैसले ने एक झटके में 43 हजार लोगों की जिंदगी बदल दी है। उनकी वजह से अब तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम के 43 हजार कर्मी सरकारी कर्मचारी बन गए हैं। 45 लाख यात्रियों को लगातार सेवा उपलब्ध करा रहा यह निगम अब सीधे सरकारी विभाग बन गया है।
43 हजार परिवहन कर्मचारियों की बहुत पुरानी मांग मानने के लिए केसीआर सरकार ने सालाना 3 हजार करोड़ की जिम्मेदारी अपने ऊपर उठाई है। लेकिन, इसकी वजह से इन कामगारों की दुनिया बदल गई है, उनके वर्षों के अरमान पूरे हुए हैं।

43 हजार परिवहन कर्मचारियों का सपना पूरा
तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (कर्मचारियों की सरकारी सेवाओं में भर्ती) विधेयक-2023 राज्य विधानसभा और विधान परिषद दोनों सदनों से सर्वसम्मति से पास हुआ है। आरटीसी के सरकार में विलय पिछले कई दिनों से राज्य में दिलचस्पी की वजह बनी हुई थी। गवर्नर ने इसपर हस्ताक्षर करके सरकार को भेज दिया है और इसके साथ ही इन कर्मचारियों का बहुत बड़ा सपना पूरा हुआ है।

केसीआर सरकार ने दिखाई गजब की संवेदनशीलता
के चंद्रशेखर राव सरकार के इस कदम से इन कर्मचारियों की नौकरियां सुरक्षित हो गई हैं। उनमें चुनौती भरे काम के बावजूद नौकरी को लेकर एक असुरक्षा की भावना रहती थी। लेकिन, अब वे भी सरकारी सेवा नियमों की तरह ही सैलरी, ट्रांसफर, प्रमोशन, पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सुविधाओं के हकदार हो गए हैं। केसीआर सरकार ने इस विधेयक को पास कराने के लिए जो तत्परता दिखाई है, वह इन मेहनतकश कामगारों के प्रति उसकी संवेदनाएं जाहिर करती है।

सरकार ने यात्रियों और कर्मचारियों की सुविधा का रखा ख्याल
तेलंगाना के परिवहन मंत्री पुव्वाडा अजय कुमार ने सदन में विधेयक पेश करने के दौरान आरटीसी की स्थिति का पूरा ब्योरा पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किन वजहों से आरटीसी घाटे में जा रहा है। इसकी एक प्रमुख वजह डीजल की कीमतें रही हैं। जबकि, इसपर दूर-दराज के लोग, छात्रों से लेकर पासधारी अनेकों लोग निर्भर रहते हैं। इसके कर्मचारियों और इसकी सुविधा का इस्तेमाल करने वाले लोगों की जरूरतों का ख्याल रखते हए सरकार ने आरटीसी कर्मियों को सरकारी सेवा में लेने का फैसला किया।

केसीआर सरकार ने पूरा किया मुश्किल काम
काम आसान नहीं था। क्योंकि, 1997 के कानून के हिसाब से सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को सरकारी सेवा में नहीं लिया जा सकता था। इसपर प्रतिबंध था। इसके लिए एक विशेष कानून बनाने की आवश्यकता पैदा हुई। इसलिए परिवहन विभाग के नियंत्रण में एक नए विभाग प्रमुख की व्यवस्था होगी, जिसमें आरटीसी के वाइस चेयरमैन और एमडी भी पदेन शामिल होंगे।

फिलहाल मौजूदा सेवा शर्तें ही जारी रहेंगी
राज्य सरकार ने साफ किया है कि जब तक सरकार इनके लिए नए सेवा नियम नहीं तैयार करती है, तबतक उनपर वही सेवा शर्तें लागू रहेंगी जो मौजूदा आरटीसी सेवा नियमों में शामिल हैं। हालांकि, आरटीसी के रोजाना के संचालन और चल और अचल संपत्तियों का प्रबंधन इसके लिए गठित नए विभाग और आरटीसी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की जिम्मेदारी होगी। सरकार ने सदन को यह भी बताया है कि सरकारी खजाने पर इसके कर्मचारियों के वेतन के रूप में सालाना 3,000 करोड़ रुपए का अतिरक्त भार बढ़ेगा।
आरटीसी में कुल 43,055 नियमित कर्मचारी हैं
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अभी आरटीसी के नियमित कर्मचारियों की संख्या 43,055 है। इनके अलावा 248 कर्मचारी अनुबंध और सामयिक आधार पर भी काम करते हैं। केसीआर सरकार के इस फैसले से 43,055 कर्मचारी तो सरकारी हो गए हैं, बाकी जितने भी कर्मचारी दैनिक आधार या आउटसोर्सिंग कर्मियों के रूप में काम करते हैं, वह पहले की तरह से संबंधित एजेंसियों के दायरे में आएंगे।












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