घरवापसी के खिलाफ भाजपा और आरएसएस में आर-पार की लड़ाई शुरु
कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के एजेंडे के लिए सबसे बड़ा रोड़ा आरएसएस और अन्य हिंदू संगठन बनते नजर आ रहे हैं। आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कोलकाता में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मुसलमानों की घर वापसी का कार्यक्रम जारी रहेगा।

भागवत और अमित शाह आमने सामने
मोहन भागवत का यह बयान ठीक उस समय आया जब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने साफ कहा कि भाजपा और सरकार जबरन धर्मांतरण और घर वापसी के पूरी तरह से खिलाफ है। हालांकि दोनो ही नेताओं ने जबरन धर्मांतरण के खिलाफ संसद में कानून लाने की वकालत की। दोनों ही नेताओं ने कहा कि जबरन धर्मांतरण पर रोक लगानी है तो सभी दलों को इसके खिलाफ कानून बनाने के लिए आगे आना चाहिए।
घर वापसी या विकास
एक तरफ मोदी ने विकास के एजेंडे को आगे लाकर लोगों को स्वर्णिम भारत का सपना दिखा रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर आरएसएस की हिंदुत्ववादी एजेंडा उनके लिए बड़ी समस्या बनता जा रहा है। भागवत ने जिस तरह से जनसभा में कहा कि जो लोग जबरन हिंदू धर्म से दूसरे धर्म में गये हैं उनकी घर वापसी का कार्यक्रम जारी रहेगा।
भागवत यही नहीं रुके उन्होंने कहा कि भारत एक हिंदू राष्ट्र हैं और यहां के हिंदू कहीं बाहर से नहीं आये हैं। वहीं उन्होंने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि आप पाकिस्तान का हाल देख सकते हैं कि क्या वहां शांति कायम हो पायी है आजतक। वह मोदी की राह में मुश्किले बढ़ाता नजर आ रहा है।
क्या घुटने टेक देंगे मोदी?
गौरतलब है कि संघ के नेताओं से मुलाकात में मोदी ने पीएम का पद तक छोड़ने की धमकी भी दी थी। लेकिन बावजूद इसके भागवत ने कहा कि अगर लोगों के हिंदू धर्म में वापसी पर रोक लगानी है तो हिंदू धर्म से दूसरे धर्म में जाने वाले लोगों पर भी पाबंदी लगनी चाहिए। वहीं उन्होंने कहा कि हिंदू फिर से जाग गये हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या पीएम मोदी अपने विकास के एजेडे पर चल पायेंगे या इन संगठनों के आगे घुटने टेक देंगे।












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