नोटबैन: बैंको को मिल पा रहा है मांग के मुकाबले सिर्फ एक चौथाई कैश
नोटबैन के बाद बैंकों के सामने लंबी भीड़ है, लेकिन बैंकों के पास कैश की भारी कमी है।
मुंबई। 8 नवंबर को पीएम मोदी के नोटबंदी के ऐलान के बाद से रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय जल्दी बहुत जल्दी कैश की किल्लत खत्म हो जाने की बात कह रहा है लेकिन बैंकों को मिल रहे कैश की मात्रा को देखते हुए ये कमी जल्दी पूरी होती नजर नहीं आ रही है।

बैंकिग से जुड़े लोगों के मुताबिक, 8 नवंबर को नोटबैन के ऐलान के बाद से बैंकों को कैश की आपूर्ति मांग के मुकाबले 20 से 25 फीसदी ही है।
8 नवंबर से पहले औसतन 15000 करोड़ से 20000 करोड़ कैश का लेनदेन बैंक से हर रोज होता था, जो 8 नवंबर के बाद घट गया है। बैंकिंग से जुड़े लोगों के मुताबिक मैट्रो शहरों में तो 20-25 फीसदी कैश मिल भी रहा है, ग्रामीण क्षेत्रो में स्थिति और भी ज्यादा खराब है।
कैश की कमी से देश किस तरह से जूझ रहा है, इसे इस बात से समझा जा सकता है गुडगांव में प्रतिदिन 2000 करोड़ की डिमांड है, जबकि उसे 600 करोड़ ही मिल पा रहा है। हालांकि बैंकिग मामलों के जानकारों का कहना है कि धीरे-धीरे ये दिक्कत खत्म हो जाएगी।
बैंक के पास कैश की कमी, एटीएम भी खाली
कैश की मांग पूरी ना हो पाने की वड़ी वजह नोटबंदी के ऐलान के बाद बैंकों और एटीएम तक कैश का ना पहुंचना है। बड़ी संख्या में एटीएम देश में खाली पड़े हैं। बाजार में करेंसी का करीब 85 फीसदी 500 और 1000 को नोट में था, ऐसे में इन नोटों पर बैन के बाद कैश की भारी किल्लत होना स्वाभाविक है।
आपको बता दें कि 8 नवंबर को पीएम मोदी ने देश के नाम संबोधन में 500 और 1000 को नोटों पर अचानक ही बैन की घोषणा कर दी थी। जिसके बाद देश में कैश की कमी पूरी कर पाना बैंकों के लिए चुनौती बना हुआ है। नोटबैन को लेकर पीएम को विपक्ष के भारी विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है।












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