प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत सिर्फ 12% युवाओं को ही मिला लोन, बैंकों में बिगड़ा मामला
नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार रोजगार के मुद्दे पर लगातार पिछड़ रही है। विपक्ष को भी रोजगार का मसला बड़ा मुद्दा मिल गया है, जिसे वो हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर केंद्र सरकार पर लगातार हमले कर रहे है। इसी हमले को रोकने के लिए सरकार ने इस बार अपने बजट में प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत अपना बजट बढ़ा दिया। सरकार ने साल 2018-19 के बजट में देश में 7.5 लाख युवाओं को रोजगार दिलाने का टारगेट रखा। इसके लिए 1800 करोड़ रुपए का बजट रखा गया, लेकिन जो आंकड़े सामने आए हैं वो सरकारी की नींद उड़ाने के लिए काफी है। प्रधानमंत्री रोजगार योजना पोर्टल से मिली जानकारी के मुताबिक साल अप्रैल 2017 से लेकर अब तक सिर्फ 12 फीसदी युवाओं को ही बैंक लोन मिल पाया है। 88% आवेदनों को बैंक द्वारा रिजेक्ट कर दिया गया।

PMEGP की खुली पोल
आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल 2018 से लेकर अब तक PMEGP योजना के तहत केवल 50000 युवाओं को ही रोजगार के लिए बैंक से लोन मिल सका है। बाकी के 88 प्रतिशत एप्लीकेशन को रिजकेट् कर दिया गया। अप्रैल 2017 से 13 फरवरी 2018 तक 4 लाख 988 लोगों ने PMEGP के तहत लोन के लिए अप्लाई किया, लेकिन इसमें से 3 लाख 49 हजार 208 आवेदनों को कलेक्टर के सामने रखा गया, जबकि कलेक्टर ने 2 लाख 52 हजार 536 आवेदनों को लोन की मंजूरी के लिए बैंकों के पास भेजा, लेकिन इनमें से सिर्फ 49 हजार 721 लोगों को ही बैंक से लोन मिल सका।

बैंकों की वजह से रिजेक्ट हुए आवेदन
रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों ने 2 लाख 52 हजार 536 आवेदनों में से केवल 49 हजार 421 लोगों को ही लोन दिया जबकि बाकियों के आवेदन रिजेक्ट कर दिए।ऐसा इसलिए क्योंकि बैंकों ने उनके आवेदनों को पूरा नहीं पाया। उन आवेदनों में से कुछ में आवेदकों के सिबिल स्कोर सही नहीं थे तो कुछ डिफॉल्टर थे। कुछ ने पूरे कागजात जमा नहीं करवाए थे तो कुछ का बिजनेस में लगाव नहीं था, जिसकी वजह से बैंक ने उनके लोन को एप्रूव नहीं किया।

क्या है प्रधानमंत्री रोजगार योजना
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री रोजगार योजना की शुरूआत साल 2008-09 में की गई थी। इस योजना का मकसद युवाओं को रोजगार मुहैया कराना है। इस स्कीम के तहत 18 साल से अधिक उम्र के युवाओं को 5 लाख से लेकर 25 लाख तक के प्रोजेक्ट लगाने के लिए बैंकों से लोन मिलता है। इस स्कीम के तहत बैंक उनके प्रोजेक्ट का 90 फीसदी तक फाइनेंस करते हैं।












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