Onion Price: सरकार की कोशिशों के बाद भी क्यों घट नहीं रहे प्याज के दाम, कब तक कम होंगे?
Onion Price Today: पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। इसमें महंगाई को विपक्षी पार्टियां बड़ा मुद्दा बना रही हैं। मतदाताओं को रिझाने के लिए नेता सबसे ज्यादा प्याज के आंसू ही रो रहे हैं। लेकिन, प्याज के भाव कबतक कम होंगे, इसके बारे में कोई भी पुख्ता जवाब देने की स्थिति में नहीं है। सरकार ने सारे जतन किए हैं, लेकिन यह आम लोगों की जेब से बाहर ही बना हुआ है।
सरकार प्याज के निर्यात पर एक तरह से रोक लगा चुकी है और इसकी कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए बफर स्टॉक भी तैयार किया है। लेकिन कीमतें घटने के कहीं से कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। ज्यादातर शहरों में यह आज भी प्याज प्रतिकिलो 70 से 80 रुपए के आसपास मिल रहे हैं। सवाल है कि सरकार की कोशिशों के बावजूद यह आज भी आम आदमी की थाली से क्यों गायब है।

सरकार ने अगस्त से ही उठाने शुरू कर दिए थे कदम
केंद्र सरकार ने पिछले कुछ महीनों में प्याज के भाव को काबू में रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। घरेलू बाजार में प्याज की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार ने अगस्त महीने में ही प्याज के निर्यात पर 40% की एक्सपोर्ट ड्यूटी लगा दी थी। जब इसके बावजदू थोक और खुदरा कीमतें बढ़ती ही रहीं तो एक और सख्त कदम उठाया गया।
प्याज की कीमतों के नियंत्रण के लिए सरकार ने और क्या किया?
28 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने प्याज पर न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) 800 डॉलर प्रति टन लागू कर दिया। इससे यह हुआ कि निर्यात के लिए प्याज की कीमतें 67 रुपए प्रति किलो न्यूनतम निर्धारित हो गई। इससे प्याज के निर्यात पर थोड़ा असर पड़ा। सरकार ने यह कदम तब उठाए जब उसकी नेफेड (NAFED) और नेशनल कॉपरेटिव कंज्यूमर फेडरेशन (NCCF) जैसी एजेंसियों के पास पहले ही 5 लाख टन का बफर स्टॉक तैयार कर लिया गया था।
सरकार की कोशिशों से थोक बाजार में भाव पड़ असर पड़ा
भारत में औसतन 250 लाख टन प्याज की पैदावार होती है, जिसमें से करीब 160 लाख टन की खपत देश में ही हो जाती है। सरकार ने प्याज की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए जो कदम उठाए उसका असर महाराष्ट्र के लासलगांव थोक बाजार पर देखने को मिला, लेकिन यह इतना नहीं था, जिसके हिसाब से सरकार की ओर से कदम उठाए गए। हालांकि, इसका असर जरूर पड़ा और 28 अक्टूबर को जो प्याज 4,800 रुपए प्रति क्विंटल था, वह 3 नवंबर तक आकर 3,650 रुपए प्रति क्विंटल हो गया। लासलगांव नाशिक जिले में है, जो कि देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी है।
प्याज के खुदरा भाव पर नहीं पड़ा ज्यादा असर
लेकिन, खुदरा बाजार में इसका खास असर देखने को नहीं मिल रहा है। ज्यादा शहरों में आज भी प्याज 70 से 80 रुपए किलो बिक रहा है। दरअसल, इस साल प्याज की कीमतें अचानक बढ़ने के पीछे कई वजहों ने रोल निभाया है। एक तो मानसून लेट से आया। उससे पहले इस साल बेमौसम की बारिश और ओला गिरने से बड़े पैमाने पर प्याज की फसल तबाह भी हुई थी। तैयार प्याज भींगने की वजह से वह भी स्टॉक लायक नहीं रह गया, जिसने अब जाकर इसकी किल्लत बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
खराब मौसम ने भी प्याज की फसल को नुकसान पहुंचाया
मौसम की गड़बड़ी की वजह से प्याज खराब होने के डर से किसानों ने अप्रैल-मई में कौड़ियों के भाव प्याज निकाल दिए थे। प्याज कारोबार से जुड़े लोगों की मानें तो इसकी वजह से जितने प्याज स्टॉक में रखे जाने थे, उसका करीब 60 फीसदी पहले ही खराब हो चुका था।
प्याज की मांग और पूर्ति का संतुलन बिगड़ा है
बाद में मानसून देरी से आया तो खरीफ सीजन वाले प्याज की फसल में विलंब हुआ। यह प्याज अक्टूबर तक बाजार में पहुंच जाना था। इसीलिए अभी जो बाजार में प्याज उपलब्ध है, वह वही है, जो रबी फसल वाले स्टॉक में बचा हुआ है। यानि प्याज का पूरा सप्लाई-चेन बिगड़ गया है। पुराने प्याज का स्टॉक खत्म हो रहा है और नई उत्पाद आने में देर है। सरकार ने बफर स्टॉक का बड़ा इंतजाम किया भी है, लेकिन वह मांग की तुलना में कम है, जिसकी वजह से मांग और पूर्ति का संतुलन बिगड़ चुका है और कीमतें बढ़ने का कारण बन गया है।
कब तक कम होंगे प्याज के दाम?
बाजार से जो संकेत मिल रहे हैं, उससे लग नहीं रहा है कि प्याज के दाम तत्काल कम होने के आसार नहीं हैं। लासलगांव बाजार में खरीफ प्याज की आवक शुरू हो चुकी है, लेकिन मांग की तुलना में यह नहीं के बराबर है। नया प्याज औसतन 10 से 50 क्विंटल तक ही पहुंच रहा है, इसीलिए निर्भरता अभी भी पुराने स्टॉक पर ही कायम है।
इसी बाजार के एक कारोबारी की मानें तो 'ज्यादातर किसान पुराने स्टॉक से ही कमाई कर रहे हैं। नई फसल उखाड़ने की शुरुआत नहीं हुई है। हालात तभी बेहतर होंगे, जब महीने के आखिर तक आवक में सुधार देखने को मिलेगी।' यानि तबतक प्याज की कीमतें आम आदमी की जेब की पहुंच तक आने की उम्मीद नहीं है, जिसके चलते चुनावी मौसम में सरकार की परेशानी भी बनी रह सकती है।
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