वनइंडिया सर्वे: नोटबंदी पर मोदी सरकार को मिला जनता का साथ, अधूरी तैयारियों पर जताई नाराजगी

इस सर्वे में कुल 31198 लोगों ने हिस्सा लिया। इस सर्वे में कुल 11 सवाल पूछे गए। जिसमें नोटबंदी से जुड़े हर पहलू पर पाठकों की राय मांगी गई।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले का जनता ने खुले दिल से समर्थन किया है। सरकार के फैसले को लेकर वनइंडिया के सर्वे में ये बातें सामने आई है।

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नोटबंदी पर सबसे बड़ा सर्वे

वनइंडिया ने नोटबंदी को लेकर सबसे बड़ा सर्वे किया। ये सर्वे वनइंडिया के अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, बंगाली और गुजराती सभी चैनलों की ओर से किया गया।

इस सर्वे में कुल 31198 लोगों ने हिस्सा लिया। इस सर्वे में कुल 11 सवाल पूछे गए। जिसमें नोटबंदी से जुड़े हर पहलू पर पाठकों की राय मांगी गई।

वनइंडिया के हर सवाल पर पाठकों ने भी खुले दिल से जवाब दिया। कालेधन के खिलाफ मोदी सरकार की मुहिम को वनइंडिया के पाठकों ने सराहा है।

जनता ने नोटबंदी का किया समर्थन

सर्वे का पहला सवाल था कि क्या आप सरकार के नोटबंदी के फैसले का समर्थन करते हैं। इस सवाल के जवाब में तीन विकल्प दिए गए... हां, नहीं, कह नहीं सकते। इसके जवाब में 71.7 फीसदी लोगों 'हां' में जवाब दिया। 'हां' के समर्थन में 22357 वोट पड़े। वहीं 'नहीं' कहने वालों की संख्या 25.7 फीसदी थी। 'नहीं' के पक्ष में 8003 वोट पड़े। वहीं 835 लोगों ने 'कह नहीं सकते' को क्लिक किया।

वहीं सर्वे का दूसरा सवाल था कि क्या आपको लगता है सरकार ये फैसले एक पब्लिसिटी स्टंट है? इसके जवाब में जनता ने दूसरे विकल्प पर भरोसा जताया है। 65.7 फीसदी लोगों ने 'नहीं' विकल्प को चुना यानी साफ कर दिया सरकार का फैसला पब्लिसिटी स्टंट नहीं है।

इस विकल्प को 20491 वोट मिले। इस सवाल के पहले विकल्प यानी 'हां' को 34.3 फीसदी वोट मिले। 'हां' विकल्प को कुल 10695 वोट मिले। जनता का ये जवाब जताता है कि लोगों को इस फैसले पर एक विश्वास जरूर है।

2000 के नोट चलाने पर लोगों ने उठाए सवाल

तीसरे सवाल में हमने पूछा कि कालेधन पर लगाम के लिए 1000 रुपये के नोट पर रोक लगाई गई, लेकिन 2000 रुपये के नोट चलाने से हालात और नहीं बिगड़ेंगे?

इसके जवाब में दो विकल्प दिए गए। पहला विकल्प...हां, 2000 रुपये के नोट को चलाने का निर्णय गलत है, इससे काला धन रखने वालों को लंबे अंतराल में फायदा मिलेगा। दूसरा विकल्प... नहीं, कालाधन वापस आने में लंबा समय लगेगा। लोगों ने सबसे ज्यादा हां विकल्प को चुना।

सर्वे में अगला सवाल किया गया कि क्या सरकार की तैयारी पूरी तरह आधी अधूरी थी? क्या नए नोट और ज्यादा छापने चाहिए थे? इसके जवाब में दो विकल्प दिए गए। पहला... हां, सरकार की तैयारियां आधी-अधूरी थी और अधिक नए नोट छापने चाहिए थे, दूसरा विकल्प था...ऐसा कुछ नहीं है, यह सही तरीका है।

जनता ने पहले विकल्प 'हां' को सबसे ज्यादा वोट दिए हैं। 59.3 फीसदी लोगों ने माना है कि हां, सरकार की तैयारी आधी-अधूरी थी। और नोट छापने चाहिए थे। इस विकल्प को कुल 18513 वोट मिले। वहीं दूसरे विकल्प 'नहीं' के पक्ष में 40.7 फीसदी वोट पड़े। 12683 लोगों ने इस विकल्प को क्लिक किया।

आम आदमी को हो रही समस्याओं के लिए सरकार जिम्मेदार: सर्वे

सर्वे के अगले सवाल में हमने पूछा कि आम आदमी जिन समस्याओं से परेशान हो रहा इसका जिम्मेदार आप किसे मानते हैं? इसके लिए तीन विकल्प दिए गए।

पहला...सरकार, दूसरा...बैंक और तीसरा विकल्प...आरबीआई। इस सवाल के जवाब में लोगों ने सरकार को सबसे ज्यादा जिम्मेदार बताया है। पाठकों ने 'सरकार' विकल्प के पक्ष में 50.1 वोट दिए। इसे कुल 15646 वोट मिले।

दूसरे नंबर पर आरबीआई की जिम्मेदार ठहराया गया। 29.8 फीसदी लोगों ने आरबीआई के पक्ष में वोट डाला, कुल 9317 लोगों ने इसके पक्ष में वोट दिया। तीसरे नंबर आरबीआई विकल्प रहा। 20.1 फीसदी लोगों ने इस विकल्प को चुना। इसके पक्ष में 6263 वोट पड़े।

चुनाव में नोटबंदी के असर क्या बोली जनता?

सर्वे का अगला सवाल था कि क्या आपको पीएम मोदी पर भरोसा है जो उन्होंने कहा कि दिसंबर तक स्थिति में सुधार आएगा? इसके जवाब में दो विकल्प दिए गए। पहला विकल्प था...नहीं, मैं नहीं मानता, वह अब भी समय मांग रहे हैं। दूसरा विकल्प...हां, परिस्थितियां सुधरेंगी।

इस सवाल के जवाब में लोगों ने दूसरे विकल्प को चुना है। दूसरे विकल्प को 64 फीसदी लोगों ने अपना समर्थन किया है। इस विकल्प के पक्ष में 19966 वोट पड़े हैं। वहीं पहले विकल्प को महज 36 फीसदी वोट मिले हैं। इसे 11232 वोट मिले हैं।

सर्वे के आखिरी सवाल में पूछा गया कि क्या आने वाले विधानसभा चुनावों में नोटबंदी प्रभाव पड़ेगा? इसके लिए तीन विकल्प दिए गए। पहला विकल्प... भाजपा चुनाव हार जाएगी, दूसरा विकल्प...भाजपा को इसका लाभ मिलेगा, तीसरा विकल्प...जनता की याददाश्त बहुत कम होती है, यह मुद्दा नहीं बनेगा।

सर्वे में कुल 31198 लोगों ने हिस्सा लिया

सर्वे में पाठकों ने तीसरे विकल्प यानी 'जनता की याददाश्त बहुत कम होती है' को सबसे ज्यादा वोट किए हैं। इस विकल्प को 42.8 फीसदी वोट मिले हैं। इसके पक्ष में 13352 वोट पड़े हैं। वहीं दूसरा विकल्प भाजपा को फायदा होगा दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा वोट मिले हैं।

इसके पक्ष में 36.9 फीसदी वोट पड़े हैं। 11514 वोट इस विकल्प को मिले हैं। वहीं भाजपा चुनाव हार जाएगी, इस विकल्प को सबसे कम वोट पड़े हैं। इस विकल्प को 20.3 फीसदी वोट मिले हैं। 6331 वोट इस विकल्प को मिले हैं।

कुल मिलाकर वनइंडिया के पाठकों ने सभी सवालों का जवाब काफी सोच-समझ कर दिया। उनके जवाब से एक बात तो साफ हो गई कि नोटबंदी आगामी विधानसभा चुनावों में शायद कोई मुद्दा नहीं रहे।

इसके साथ-साथ सरकार नोटबंदी से आम जनता को हो रही परेशानी के बारे में भी लोगों ने आवाज बुलंद की है। उन्होंने सरकार के इस फैसले की आधी-अधूरी तैयारी पर नाराजगी जताई है। हालांकि नोटबंदी पर उनका समर्थन जताता है कि वह सरकार के साथ हैं।

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