One Nation One Election: क्यों संसद के विशेष सत्र में पास हो सकता ये बिल? पूरा घटनाक्रम देखिए

एक देश एक चुनाव: केंद्र की मोदी सरकार ने 18 सितंबर से 22 सितंबर के बीच संसद का विशेष सत्र क्यों बुलाया है, इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं है। लेकिन, पिछले तीन महीनों के दौरान हुए एक खास घटनाक्रम में इसके बड़े संकेत छिपे हो सकते हैं।

इस घटनाक्रम को देखेंगे तो स्पष्ट संकेत मिलता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार 'वन नेशन वन इलेक्शन' के प्रमुख एजेंडे के साथ संसद के विशेष सत्र में आ सकती है। बाकी कुछ और महत्वपूर्ण मुद्दे भी हैं, जिसे इस विशेष सत्र में पास कराया जा सकता है।

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एक देश एक चुनाव पर 2 जून से चल रहा है काम?
28 मई, 2023 को प्रधानमंत्री मोदी ने नए संसद भवन का उद्घाटन किया था। इसके ठीक चार दिन बाद ही यानी 2 जून को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी पीके मिश्रा मुलाकात करते हैं। वनइंडिया के सूत्रों के मुताबिक 'वन नेशन वन इलेक्शन' का विचार यहीं से रफ्तार पकड़नी शुरू कर देती है।

कर्नाटक चुनाव का परिणाम हो सकता है तात्कालिक कारण?
इसके बैकग्राउंड में झांकें तो ठीक इससे पहले कर्नाटक विधानसभा चुनावों में बीजेपी बुरी तरह से पराजित हो जाती है। यानी 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर पार्टी की चिंता बढ़नी शुरू हो जाती है और इसलिए 'एक राष्ट्र एक चुनाव' की सोच को अमलीजामा पहनाने की जरूरत ज्यादा महसूस होती है।

कोविंद क्यों महत्वपूर्ण हैं?
सबसे पहले तो पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद उत्तर प्रदेश जैसे राज्य के हैं और दलित समाज से आते हैं। सूत्रों का कहना है कि वे लो प्रोफाइल रहते हैं, लेकिन उलझे हुए कानूनी मसलों को हाई-प्रोफाइल ढंग से सुलझाने में सक्षम हैं। ऊपर से प्रधानमंत्री मोदी के बहुत ही भरोसेमंद हैं। सूत्रों की मानें तो 'पीएम मोदी ने पार्टी के विश्वसनीय लोगों को संकेत दे दिया है कि वह एक साथ चुनाव के लिए जमीन तैयार करना शुरू कर दें, ताकि 2024 से पहले विपक्षी एकजुटता की कमजोरी को उजागर किया जा सके।'

विशेष सत्र में पेश की जा सकती है रिपोर्ट
हालांकि, पूर्व राष्ट्रपति 2 जून से ही अपने काम में जुट चुके थे, लेकिन वन नेशन वन इलेक्शन वाले पैनल के प्रमुख तौर पर उनके नाम की औपचारिक घोषणा, 1 सितंबर, 2023 को होती है। 2 सितंबर को इसके बाकी 8 सदस्यों के नाम का ऐलान किया जाता है। अगले दिन ही केंद्रीय कानून मंत्रालय के अधिकारी इससे जुड़े कार्यों को लेकर कोविंद से मिलने पहुंचते हैं। अब संभावना है कि संसद के इस विशेष सत्र में ही इस पैनल की रिपोर्ट सरकार संसद में पेश कर सकती है।

तीन महीनों में काफी सक्रिय रहे हैं कोविंद
अगर पूर्व राष्ट्रपति के सोशल मीडिया को देखें तो वह पिछले तीन महीनों में काफी व्यस्त रहे हैं। 2 जून से 29 अगस्त के बीच उनकी कम से कम 10 गवर्नरों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों से मुलाकात हुई। कुछ से एक से ज्यादा बार मिले। आमतौर पर एक पूर्व राष्ट्रपति इतने सक्रिय नहीं दिखाई पड़ते। लेकिन, पूर्व राष्ट्रपति कोविंद का राजभवनों का दौरा और उनसे मुलाकात करने वाले नेताओं की लिस्ट काफी कुछ संकेत दे है। पूर्व राष्ट्रपति से मिलने वालों में बीजेपी के बड़े नेता और सर संघचालक तक शामिल रहे हैं।

किन विधानसभाओं का बढ़ सकता है कार्यकाल?
संभावित मसौदे में यह प्रस्ताव शामिल होने की संभावना है कि जिन विधानसभाओं का कार्यकाल 2025 के आसपास तक खत्म हो रहा है, उन्हें भंग (महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल आदि) किया जाए; और जिन राज्यों में हाल ही में चुनाव हुए हैं (कर्नाटक, गुजरात, हिमाचल आदि) का कार्यकाल एक साल बढ़ा दिया जाए और वहां 2029 के लोकसभा चुनावों के साथ ही चुनाव करवाए जाएं।

एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ करवाने से विपक्षी दलों का इंडिया एलायंस बुरी तरह से उलझ सकता है। उनके मुताबिक, 'पश्चिम बंगाल में टीएमसी चीफ ममता बनर्जी, कांग्रेस और वामपंथी दलों के लिए विधानसभा और लोकसभा दोनों के लिए गठबंधन करना मुश्किल होगा... क्योंकि सभी पार्टियां पहले अपना स्थानीय हित साधना चाहेंगी। इसी तरह दिल्ली, पंजाब और अन्य स्थानों पर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के सामने भी समस्या खड़ी होगी। बीजेपी को उम्मीद है कि कांग्रेस के साथ जो क्षेत्रीय दल हैं, वे आपस में भिड़ेंगे, जिससे उसके लिए अधिक मौका मिलेगा।'

पूर्व राष्ट्रपति कोविंद कैसे बढ़ी सक्रियता?

  • 9 जून- पंजाब में पंजाब के गवर्नर बनवारी लाल पुरोहित और हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय से मिले।
  • 10 जून- बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य मुरली मनोहर जोशी ने उनसे मुलाकात की।
  • 23 जून- लखनऊ में इनकी यूपी की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगीआदित्यनाथ से मुलाकात हुई।
  • 26 जून- केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव उनसे मिले।
  • 7 जून- दादरा और नगर हवेली के प्रशासक प्रफुल्ल के पटेल से मुलाकात।
  • 16 जून- यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उनसे मुलाकात की।
  • 17 जुलाई- तीन गवर्नरों से मिले। ओडिशा के गणेशी लाल, बिहार के राजेन्द्र विश्वनाथ आर्लेकर और पश्चिम बंगाल के डॉ सीवी आनंद बोस।
  • 19 जुलाई- CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने पूर्व राष्ट्रपति से मुलाकात की।
  • 23 जुलाई- लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने उनसे शिष्टाचार मुलाकात की।
  • 1 अगस्त- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उनसे मिले।
  • 5 अगस्त- कोविंद कोलकाता पहुंचे और राज्यपाल से मिले।
  • 10 अगस्त- उत्तराखंड के गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल (रि) गुरमीत सिंह उनसे मिले।
  • 11 अगस्त- गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने शिष्टाचार मुलाकात की।
  • 19 अगस्त- कोविंद केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मिले।
  • 25 अगस्त- एक बार फिर आनंदीबेन से मिले।
  • 29 अगस्त- आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने उनसे मुलाकात की।

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