भोपाल एनकाउंटर: घटनास्थल पर लगा मेला, खून के निशान संग सेल्फी ले रहे लोग

बहुत से लोग तो अपने बच्चों को भी साथ लेकर आ रहे हैं, मानो वहां मुठभेड़ न हुई हो, बल्कि कोई मेला लगा हो।

भोपाल। सेन्ट्रल जेल से भागे सिमी के आठ आतंकियों का सोमवार को भोपाल पुलिस ने एनकाउंटर किया था। जहां एक ओर इस एनकाउंटर पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश पुलिस की लापरवाही भी देखने को मिल रही है।

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सिमी के आठों आतंकियों को मारे जाने के एक दिन बाद ही घटना स्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई है। घटनास्थल एक तरह से लोगों के लिए पर्यटन स्थल हो गया है, जहां पर आकर लोग खूब तस्वीरें ले रहे हैं और सेल्फी खींच रहे हैं।

आपको बता दें कि भोपाल के नजदीक स्थित मनीखेड़ी पहाड़ी पर सिमी के आठों आतंकियों का एनकाउंटर किया गया था, लेकिन पुलिस की तरह से वहां पर न कोई बैरिकेट लगा है न ही किसी अन्य प्रकार की कोई सुरक्षा मौजूद है, जो वहां पर लोगों को आने से रोक सके।

वहां पर जाकर लोग आतंकियों के बिखरे पड़े उन कपड़ों की भी तस्वीरें ले रहे हैं, जो उन्होंने भोपाल सेन्ट्रल जेल में बंद रहने के दौरान पहने थे। वहीं दूसरी ओर, बहुत से लोग वहां घास पर बिखरे आतंकियों के खून के साथ सेल्फी भी ले रहे हैं।

बहुत से लोग तो अपने बच्चों को भी साथ लेकर आ रहे हैं, मानो वहां मुठभेड़ न हुई हो, बल्कि कोई मेला लगा हो। एक गांव वाले व्यक्ति सुरेश ने बताया कि उन्होंने सोमवार को भी वहां जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें जाने नहीं दिया।

जब एसपी धर्मवीर सिंह से यह पूछा गया कि आखिर एनकाउंटर की जगह को पुलिस सुरक्षा में क्यों नहीं रखा गया है तो उनका कहना था कि पूरे एरिया की छानबीन करके सभी सबूत एकत्र कर लिए गए हैं, सिर्फ घास और चट्टानों पर आतंकियों के खून के दाग हैं।

वहां मौजूद बहुत से लोगों ने यह दावा किया कि उन्होंने पुलिस से पहले ही आतंकियों को देख लिया था। एक चश्मदीद संतोष के मुताबिक, पुलिस के आने से पहले ही गांव वालों ने सभी आतंकियों को घेर लिया था।

घटना के अगले दिन मंगलवार को भी संतोष घटनास्थल पर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि आतंकी कह रहे थे- 'हमको जो करना था कर दिया, अब मर भी जाएं तो फिकर नहीं।'

वहां पर ही मौजूद एक व्यक्ति ने बताय कि उनसे पूरे एनकाउंटर की वीडियो अपने फोन में बनाने की कोशिश की, लेकिन एक पुलिस वाले ने उनका फोन छीनकर वीडियो डिलीट कर दिया और फोन को पूरे दिन अपने ही पास रखा। बाद में पुलिस से बार-बार गुहार लगाने के बाद उन्होंने फोन वापस दिया।

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