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Parliament Budget Session: लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे ओम बिरला, आचनक क्यों लिया ऐसा फैसला?

Om Birla No Confidence Motion: लोकसभा की कार्यवाही से जुड़ा एक अहम घटनाक्रम सामने आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसदीय परंपराओं और निष्पक्षता को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। विपक्ष द्वारा उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा पूरी होने तक वे सदन की कार्यवाही का संचालन नहीं करेंगे।

उनका मानना है कि जब अध्यक्ष की निष्पक्षता पर ही प्रश्नचिह्न लगाया गया हो, तब पद की गरिमा बनाए रखने के लिए स्वयं को कार्यवाही से अलग रखना ही उचित कदम है। इस दौरान सदन का संचालन उपाध्यक्ष या तालिका के सभापति द्वारा किया जाएगा।

Om Birla No Confidence Motion

118 सांसदों ने दिया नोटिस

विपक्षी गठबंधन के 118 सांसदों ने एकजुट होकर लोकसभा सचिवालय को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है। कांग्रेस के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह निर्णय "असाधारण परिस्थितियों" में लिया गया है। संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के अनुसार, अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए कम से कम 14 दिन पहले नोटिस देना अनिवार्य है। इस प्रक्रिया के शुरू होने के बाद, अध्यक्ष तब तक सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते जब तक कि प्रस्ताव पर अंतिम फैसला न हो जाए।

राहुल गांधी को बोलने से रोकना बना मुख्य आधार

अविश्वास प्रस्ताव लाने का सबसे बड़ा कारण विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान बोलने की अनुमति न देना बताया गया है। विपक्ष का आरोप है कि अध्यक्ष ने सत्तापक्ष को अनावश्यक छूट दी, जबकि विपक्षी नेताओं की आवाज को दबाया गया।

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8 विपक्षी सांसदों का निलंबन से तनाव

विपक्ष द्वारा लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के पीछे हाल ही में 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन भी एक प्रमुख कारण बना है। सदन में हंगामे और 'अमर्यादित आचरण' का हवाला देते हुए इन सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था। विपक्ष ने इस कार्रवाई को एकतरफा और दमनकारी करार दिया है। उनका तर्क है कि सत्तापक्ष के शोर-शराबे पर चुप्पी साधी गई, जबकि जनता के मुद्दे उठाने वाले विपक्षी सांसदों की आवाज को दबाने के लिए निलंबन का सहारा लिया गया।

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लोकसभा अध्यक्ष के साथ दुर्व्यवहार किया- रिजिजू

वहीं केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस सांसदों पर लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) के साथ दुर्व्यवहार करने का गंभीर आरोप लगाया है। रिजिजू के अनुसार, लगभग 20-25 कांग्रेस सांसद स्पीकर के कक्ष में जबरन घुस गए और उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रियंका गांधी वाड्रा और के.सी. वेणुगोपाल जैसे वरिष्ठ नेता वहां मौजूद थे और सांसदों को उकसा रहे थे। यह बयान भारतीय राजनीति में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव और संसदीय गरिमा पर उठते सवालों को दर्शाता है।

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