बेसमेंट में घुट गए सपने... श्रेया के पिता ने कर्ज लेकर कराया था कोचिंग में एडमिशन, दूध बेच कर उठा रहे थे खर्च
Shreya Yadav: दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर स्थित राऊ आईएएस स्टडी सर्किल (Rau's IAS Study Circle) के बेसमेंट में पानी भर जाने से 3 यूपीएससी (UPSC) परीक्षा के अभ्यर्थियों की मौत हो गई। इस हादसे में जान गंवाने वालों में यूपी के अंबेडकर नगर की रहने वाली श्रेया यादव भी शामिल हैं।
श्रेया का परिवार आर्थिक रूप से संपन्न नहीं है। उनके पिता दूध बेच कर बेटी की पढ़ाई का खर्च वहन करते थे। पिता का कहना है कि बेटी हर शाम 7 बजे के बाद घर पर कॉल करती थी और अपने पूरे दिन के बारे जानकारी देती थी।

27 जुलाई की शाम बेटी का कॉल नहीं आया तो परिवार को शुरू में लगा कि शायद व्यस्त हो इस वजह से फोन नहीं आया। लेकिन बेटी के कॉल का इंतजार कर रहे परिवार के पास बेटी का फोन नहीं बल्कि उसके मौत की खबर आई। श्रेया के चाचा ने उनके पिता की इस हादसे की जानकारी दी।
कर्ज लेकर कराया था बेटी का एडमिशन
श्रेया के पिता राजेंद्र यादव जो एक डेयरी किसान हैं, ने बताया कि उन्होंने कोचिंग सेंटर की फीस भरने के लिए कर्ज लिया था। अपना दुख बताते हुए उन्होंने कहा कि जिम्मेदार लोगों पर कोई भी कार्रवाई या शब्द उनकी बेटी को तो वापस नहीं ला सकते।
राजेंद्र यादव ने बताया, "मेरे पिता हमेशा कहते थे कि शिक्षा सशक्तिकरण है।" उन्होंने अपने छोटे भाई को शिक्षित करने के लिए कड़ी मेहनत की और चाहते थे कि श्रेया भी आत्मनिर्भर बने। उनका अरमान था कि उनकी बेटी आईएएस ऑफिसर बनें और उनका नाम रोशन करें। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की चाहत और उसे आत्मनिर्भर बनाने के अपने सपने को साकार करने के लिए दिल्ली पढ़ने भेजा।
हादसे से 5 दिन पहले ही लोन लेकर भरी थी फीस
श्रेया ने अप्रैल में राऊ के आईएएस स्टडी सर्किल में दाखिला लिया था। शुरुआती फीस 1,80,000 रुपये थी, लेकिन उन्होंने इसे तीन किस्तों में चुकाने के लिए 1,65,000 रुपये पर बातचीत की। हालांकि, बाद में कोचिंग सेंटर ने श्रेया पर पूरा भुगतान करने का दबाव बनाया, जिसके कारण परिवार ने घटना से ठीक पांच दिन पहले अपने क्रेडिट कार्ड पर लोन ले लिया।
टीवी से पता चली श्रेया के मौत की खबर
श्रेया के चाचा और नोएडा में रहने वाले स्थानीय अभिभावक धर्मेंद्र यादव ने टीवी पर भतीजी के मौत का यह दुखद समाचार देखा और परिवार को इसकी जानकारी दी। बाद में वे अस्पताल गए और उसके शव की पहचान की। इस दुखद घटना से परिवार स्तब्ध रह गए हैं और वे कोचिंग सेंटर तथा नागरिक प्राधिकारियों से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, जो इस आपदा को रोकने में विफल रहे।
दूध बेच कर राजेंद्र यादव अपने बेटी के रहने खाने का खर्च वहन करते थे और अपना परिवार भी चलाते थे। बेटी की मौत ने परिवार के सपनों के साथ-साथ हिम्मत को भी तोड़ दिया है। बेटी को गंवाने वाले राजेंद्र यादव के सिर पर लोन का बोझ अलग है।












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