'2007 की तुलना में 2016 में राफेल डील सस्ती और पहले से आधुनिक'
नई दिल्ली। राफेल डील को लेकर मौजूदा सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर है। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि खरीद में भ्रष्टाचार हुआ है, लेकिन सरकार के शीर्ष सूत्र ने दावा किया है कि इसमे किसी भी तरह की कोई अनियमितता नहीं की गई है। सरकार के शीर्ष सूत्र ने दावा किया है कि एनडीए सरकार ने फ्रांस से 36 राफेल फाइटर जेट की खरीद के लिए यूपीए सरकार की तुलना में कई कम कीमत पर इस डील को फाइनल किया है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक 2016 में कई गई यह राफेल डील एनडीए सरकार के कार्यकाल के दौरान 2007 में की गई डील से काफी कम है।

आज की कीमत कम
सूत्र ने बताया कि विपक्ष दावा कर रहा है कि सरकार ने एक राफेल के लिए 525 करोड़ रुपए की कीमत अदा की है। विपक्ष ने यह भी दावा किया है कि एनडीए सरकार ने डसाल्ट एविएशन कंपनी ने जो कीमत बताई थी, उससे अधिक कीमत राफेल के लिए अदा की गई है। सूत्र का कहना है कि 2007 में इसके निर्माण की कीमत उस वक्त की करेंसी एक्सचेंज के हिसाब से तय की गई थी। उस वक्त एक यूरो 66.60 रुपए के बराबर था। यही नहीं 2007 में राफेल की डील बिना हथियार, वैमानिकी, राडार, मिसाइल के की गई थी, जिसकी वजह से इसकी कीमत आज की तुलना में कम थी।
अधिक्ष क्षमतावान राफेल
सरकार के सूत्र ने बताया कि वायुसेना ने हमे बताया था कि हम 36 राफेल खरीद रहे थे नाकि 126, क्योंकि वह चाहते थे कि यह राफेल और भी क्षमता वाले हो। वायुसेना ने मीटियर मिसाइल पर जोर दिया था, क्योंकि यह 75 फीसदी ज्यादा ताकतवर होती है, साथ ही कुछ और भी जरूरतों को इस राफेल में जोड़ने के लिए कहा गया है। इन तमाम अतिरिक्त तकनीक और जरूरतों की वजह से राफेल की कीमत 2011 की तुलना में बढ़ गई है। उस वक्त की गई राफेल की डील आज की राफेल डील से बिल्कुल अलग है, यह दोनों अलग पैकेज हैं।
फ्लीट और मजबूत होगी
वहीं एक वरिष्ठ वायुसेना के अधिकारी ने बताया कि राफेल वायुसेना की 100 फीसदी जरूरतों को पूरा करता है, साथ ही अन्य 36 राफेल हमारी फ्लीट को और भी मजबूत करेंगे, यह ना सिर्फ आधुनिक हैं, बल्कि इनका ऑपरेशनल क्षमता भी जबरदस्त है। लेकिन सरकार के आधिकारिक सूत्र का कहना है कि मौजूदा सरकार इस समय किसी भी राफेल की खरीद के मूड में इस वक्त नहीं है और ना ही उसने इसकी खरीद के लिए कोई कदम आगे बढ़ाया है। आपको बता दें कि वायुसेना के पास 42 स्क्वार्डन फाइटर एयरक्राफ्ट रखने का अधिकार है, लेकिन उसके पास सिर्फ 31 लड़ाकू विमान हैं। अगर नई खरीद नहीं की जाती है तो यह 2032 तक 27 रह जाएंगी, जबकि 2042 तक इसकी संख्या सिर्फ 19 बचेगी।
दोनों डील की तुलना
वर्ष 2007 में 18 राफेल की खरीद के दौरान एक राफेल की कीमत 100.85 मिलियन यूरो यानि 765.4 करोड़ रुपए थी। लेकिन अगर 2015 में रूपए की तुलना यूरो से की जाए तो इसकी कीमत प्रति राफेल 102.85 मिलियन यूरो होगी। अगर तुलना की जाए तो 2016 में जो राफेल खरीदे गए उसमे प्रति राफेल की कीम 91.7 मिलियन यूरो थी यानि 696 करोड़ रुपए, जोकि पिछली दोनों खरीद की तुलना में कम है।
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