Odisha train accident: मौत के मंजर में मदद के हाथ... आपकी भी आंखें नम कर देंगे ये 5 मददगार
Coromandel Express accident news: ओडिशा के बालासोर ट्रेन हादसे के बाद हर तरफ से मदद के हाथ बढ़े हैं। हर कोई बस यही चाहता है कि हादसे के बाद जो लोग बच गए, वो अब अपने परिवार में पहुंच जाएं।

Coromandel accident: शुक्रवार की शाम करीब 7 बजे का वक्त होगा, जब टेलीविजन स्क्रीन पर एक मनहूस खबर दिखी और जिसमें बताया गया कि ओडिशा के बालासोर में एक भयानक ट्रेन हादसा हुआ है। शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि आजादी के बाद के सबसे भीषण ट्रेन हादसों में शामिल ये एक्सीडेंट 250 से ज्यादा लोगों की जान ले लेगा।
पहले 30, फिर 50... फिर 80 और फिर धीरे-धीरे लाशों की गिनती बढ़ने लगी। हालात किस कदर डरावने थे, इस बात को समझने के लिए हम आपको बस इतना बता देते हैं कि घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस तक कम पड़ गईं, जिसके बाद बसों में घायलों को भेजा गया।
रेलवे ट्रैक से लेकर अस्पताल तक, हर तरह केवल चीखें थी... ट्रैक पर बिखरे रेल के मलबे में अपनों को तलाशती और आसुओं से भरीं आखें थी। लेकिन, इस भयावह मंजर के बीच मदद के हाथ भी बढ़े। प्रशासन-शासन का अमला लोगों को बचाने में जुटा था, तो अस्पताल में घायलों की मदद के लिए लोगों की कतार भी थी। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 मददगारों के बारे में, जिनका मकसद केवल और केवल जिंदगियों को बचाना है।
खून का रिश्ता नहीं, लेकिन खून देने पहुंचे सुधांशु
ट्रेन हादसे के बाद बचाव टीम ने सबसे पहले घायलों को निकाला और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। घायलों को कहीं खून की जरूरत ना पड़ जाए, ये सोचकर रात में ही कुछ लोग अस्पताल पहुंच गए। इन्हीं में से एक हैं सुधांशु। ब्लड डोनेट करने के लिए कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज पहुंचे सुधांशु ने बताया, 'जो लोग हादसे में बच गए और घायल हैं, उन्हें यहां अस्पताल लाया जा रहा है। मुझे महसूस हुआ कि इन लोगों के लिए रक्तदान करना चाहिए। उम्मीद है कि मेरे ऐसा करने से कुछ जिंदगियां बच सकती हैं। मैं बाकी लोगों से भी अपील करूंगा कि आइए और जिंदगियों को बचाने के लिए रक्तदान कीजिए।'
'बस सब सही-सलामत अपने घर पहुंच जाएं'
सुधांशु की ही तरह विभूति शरण भी रक्तदान के लिए अस्पताल आए। उनका कोई अपना इस हादसे का शिकार नहीं हुआ है, लेकिन विभूति शरण लोगों की जान बचाने में जुटे हैं। उन्होंने बताया, 'मैंने यहां रक्तदान किया है। मेरे कुछ दोस्त भी अभी रक्तदान करके गए हैं। मेरी भगवान से बस इतनी प्रार्थना है कि ये सभी लोग सही-सलामत अपने घर पहुंच जाएं।'
एक-एक जिंदगी बचाने में जुटे एनडीआरएफ के जवान
बालासोर ट्रेन हादसे के तुरंत बाद एनडीआरएफ की टीम को राहत और बचाव कार्य के लिए मौके पर भेज दिया गया। इन जवानों ने ट्रेन की बोगियों और मलबे के बीच से घायलों को निकाला और अस्पताल पहुंचाया। हादसे के अगले दिन जब कंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव मौके पर पहुंचे तो वो खुद बोगी के नीचे से निकलकर एनडीआरएफ जवानों के पास पहुंचे और उनके जज्बे के लिए उन्हें धन्यवाद दिय।
घायलों के इलाज के लिए उतरी डॉक्टरों की टीम
ओडिशा ट्रेन हादसे में घायलों की सख्या 600 से ज्यादा बताई जा रही है, जिनके इलाज के लिए डॉक्टरों की बड़ी टीम जुट गई है। इनमें 45 मोबाइल हेल्थ टीम भी शामिल हैं। इनके अलावा 50 अतिरिक्त डॉक्टरों की टीम को लगाया गया है। कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज में 25 डॉक्टरों की एक टीम भेजी गई है। वहीं, भुवनेश्वर के एम्स से डॉक्टरों की दो टीमें बालासोर और कटक के लिए रवाना हो गई हैं।
जब सब जुटे हों, तो भारतीय सेना कैसे पीछे रहे
ट्रेन हादसे में घायल हुए लोगों को जल्द से जल्द बचाया जा सके, इसके लिए भारतीय सेना के जवान भी मैदान पर उतर गए हैं। सेना की ईस्टर्न कमांड से मेडिकल और इंजीनियरिंग टीमें, एंबुलेंस और सपोर्ट सर्विस के साथ घटनास्थल पर तैनात की गई हैं।












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