ओडिशा: सीएम नवीन पटनायक ने लोकायुक्त को सौंपी विधायक प्रदीप पाणिग्रही के खिलाफ भ्रष्टाचार मामले की जांच
नई दिल्ली। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने गोपालपुर सेक विधायक प्रदीप पाणिग्रही के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को जांच ओडिशा लोकायुक्त को सौंप दी है। ओडिशा मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोमवार को इसकी जानकारी दी है। लोकायुक्त की नियुक्ति के बाद ये भ्रष्टाचार का पहला मामला है, जब राज्य सरकार ने जांच के लिए लोकायुक्त को भेजा है।

बीजू जनता दल से निष्कासित गोपालपुर से विधायक प्रदीप पाणिग्रही को 3 दिसंबर को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है। क्राइम ब्रांच ने उन्हें भुवनेश्वर में उनके आवास से गिरफ्तार किया था। प्रदीप पाणिग्रही पर ओडिशा पुलिस की क्राइम ब्रांच ने केस नंबर 26/2020 के अंतर्गत IPC की धारा 419/420/467/468/469/471/120-बी लगाई है। इसके अलावा 66 सी / 66 डी के तहत पाणिग्रही को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के बाद कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है। प्रदीप पाणिग्रही ने जमानत याचिका भी दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इस समय वो न्यायिक हिरासत में जेल में हैं। बीजू जनता दल अध्यक्ष नवीन पटनायक ने जनविरोधी गतिविधियों के चलते 29 नवंबर को प्रदीप पाणिग्रही को बीजेडी से निष्कासित कर दिया था।
तीन बार के विधायक और पूर्व मंत्री प्रदीप पाणिग्रही पर नौकरी धोखाधड़ी रैकेट में शामिल होने के आरोप हैं। टाटा मोटर्स ने साइबर पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। टाटा मोटर्स के अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि ऑटोमोबाइल प्रमुख में नौकरी देने के बहाने कई नौकरी के इच्छुक लोगों को धोखा दिया गया। पुलिस का कहना है कि प्रदीप पाणिग्रही अपने दो सहयोगियों आईएफएस अधिकारी अभय पाठक और उनके बेटे आकाश पाठक के साथ मिलकर अपने जिले के युवाओं के साथ नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी कर रहे थे। ये तीनों लोग युवाओं को टाटा ग्रुप में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपए की धोखाधड़ी कर चुकी थे।












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