1997 में हो चुकी थी परमाणु परीक्षण की तैयारी,3 वजहों से नहीं दी इजाजत, पूर्व PM देवगौड़ा के कई विस्फोटक खुलासे
नई दिल्ली, 8 दिसंबर: भारत के वैज्ञानिकों ने मई, 1998 में हुए परमाणु परीक्षणों से करीब डेढ़ साल पहले 1997 में ही किसी रविवार को इसकी 'तारीख पक्की' कर दी थी। लेकिन, तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने उनसे कम से कम एक साल तक इंतजार करने को कहकर इसकी अनुमति नहीं दी। देवगौड़ा का यह विस्फोटक इंटरव्यू उनकी जल्द ही रिलीज होने वाली उनकी बायोग्राफी में छपा है। पूर्व पीएम ने वैज्ञानिकों को मना करने के मुख्य रूप से तीन कारण बताए हैं, लेकिन इसके अलावा भी इस किताब में बहुत कुछ ऐसी बातें हैं, जिससे दिल्ली से जम्मू-कश्मीर तक की राजनीति में खलबली मच सकती है।

परमाणु परीक्षण को लेकर देवगौड़ा ने तब क्या कहा था ?
पूर्व प्रधानमंत्री आईके गुजराल और एचडी देवगौड़ा ने परमाणु परीक्षण के लिए वैज्ञानिकों को अनुमति नहीं दी थी, यह जानकारी तो सार्वजनिक है, लेकिन देवगौड़ा ने इसे किन वजहों से टाला था, उसका खुलासा उन्होंने अपनी जल्द ही रिलीज होने वाली अपनी जीवनी के लेखक को बताया है। बता दें कि देवगौड़ा की सरकार गिरने के बाद, जब चुनाव हुए और अटल बिहारी वाजपेयी की दूसरी बार सरकार बनी तो उसके सात हफ्तों बाद ही पोखरण-2 को हरी झंडी देकर दुनियाभर में तहलका मचा दिया गया। द प्रिंट में छपी एक खबर के मुताबिक फरवरी, 1997 में भारत सरकार के तत्कालीन वैज्ञानिक सलाहकार एपीजे अब्दुल कलाम और परमाणु ऊर्जा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष राजगोपाल चिदंबरम ने परमाणु परीक्षणों की अनुमति के लिए उस समय के पीएम एचडी देवगौड़ा से मुलाकात की थी। देवगौड़ा ने अपनी जीवनी लिखने वाले सौगत श्रीनिवासराजू से जो कहा है, उसके मुताबिक 'मैं आपको अनुमति दूंगा। मैं आपको और पैसे दूंगा, लेकिन प्लीज एक साल रुक जाइए।'

किन वजहों से परमाण टेस्ट की नहीं दी इजाजत ?
इसके बाद पूर्व पीएम ने दोनों वरिष्ठ वैज्ञानिकों को वह तीन कारण बताए, जिसके चलते उन्होंने परमाणु परीक्षणों की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने बायोग्राफी के लेखक से कहा है, 'सीटीबीटी को लेकर मुझ पर बहुत ही ज्यादा दबाव है। मैं पाकिस्तान समेत अपने सभी पड़ोसियों से रिश्ते भी बेहतर करना चाहता हूं। हम जो भी कुछ कर रहे हैं, टेस्ट वह सबको बिगाड़ देगा। इसके साथ ही हमें आर्थिक स्थिति को स्थिर करने के लिए कुछ और वक्त चाहिए.....मैं पांबदियों से नहीं डरता हूं, लेकिन मुझे वक्त चाहिए।' उन्होंने कहा कि वह देख रहे थे कि वैज्ञानिक 'निराश' हो गए थे। फिर वे बोले- 'मैंने उनसे बार-बार कहा कि मैं जानता हूं कि उनके (वैज्ञानिकों के) पास अगले ही दिन ब्लास्ट करने की क्षमता है और मैं भी टेस्ट के खिलाफ में नहीं था.....लेकिन मुझे अपनी प्राथमिकताएं तय करनी थीं और इसके लिए उन्हें मुझे कम से कम एक साल का वक्त देना था।'

'महबूबा मुफ्ती को जितवाने के लिए मांगी सेना की मदद'
एचडी देवगौड़ा की बायोग्राफी लिखने वाले श्रीनिवासराजू ने एक और बड़ा खुलासा जम्मू-कश्मीर की राजनीति में हमेशा विवादित वजहों से छायी रहने वाली पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती को लेकर किया है। उनके मुताबिक 1996 में महबूबा पहली बार कांग्रेस के टिकट पर कश्मीर के बिजबेहरा विधानसा सीट से चुनाव लड़ रही थीं। उस चुनाव में उनके पिता और पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री मुफ्ती मोम्मद सईद ने उनकी जीत सुनिश्चित करवाने के लिए सेना की मदद मांगी थी। यह जानकारी कश्मीर स्थित 15वीं कोर के तत्कालीन कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जेएस ढिल्लन (रिटायर्ड) ने दी उन्हें दी है। ढिल्लन ने लेखक से कहा है, 'एकबार मुफ्ती मोहम्मद सईद मेरे बादामी बाग ऑफिस में मुझसे मिलने आए। उन दिनों वे कांग्रेस में थे। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी महबूबा और उनकी पत्नी दोनों अनंतनाग इलाके से चुनाव लड़ रही हैं और चाहते हैं कि दोनों जीत जाएं।' इसपर सेना के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे कहा,'मैंने कहा मुफ्ती साब, मैं जीतने के बारे में नहीं जानता, लेकिन मैं इतना कहूंगा कि वहां वोटिंग होगी। चाहे जितनी भी संख्या में आतंकवादी आए, लेकिन वोटिंग होकर रहेगी। इससे ज्यादा अगर आप सोचते हैं कि हम आपकी बेटी और पत्नी को जितवाने में मदद करेंगे, तो ऐसा नहीं होगा।' इसपर वह थोड़े अचंभित थे।' महबूबा और उनके पिता ने 1999 में कांग्रेस छोड़कर पीडीपी बनाई।

एचडी देवगौड़ा का दावा-नहीं बनना चाहता था प्रधानमंत्री
देवगौड़ा ने अपनी जीवनी में बताया है कि 1996 में संयुक्त मोर्चा ने प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे पहले पूर्व पीएम वीपी सिंह के नाम पर विचार किया। लेकिन, वह इसपर कुछ कहे बिना अपने बंगले के पिछले दरवाजे से किसी अज्ञात स्थान के लिए निकल गए। दूसरा नाम बंगाल के पूर्व सीएम ज्योति बसु का आया, लेकिन उनकी पार्टी सीपीएम ने ही इसे खारिज कर दिया। तब ज्योति बसु ने ही लालू यादव और तत्कालीन सीपीएम महासचिव हरकिशन सिंह सुरजीत की मौजूदगी में देवदौड़ा से यह जिम्मेदारी संभालने को कहा। लेकिन, गौड़ा के मुताबिक उन्होंने इस प्रस्ताव का विरोध किया। उनके मुताबिक, 'मेरा करियर अचानक खत्म हो जाएगा। कांग्रेस पार्टी ज्यादा दिनों तक हमें सरकार नहीं चलाने देगी। मैं आपकी (ज्योति बसु) तरह बनना चाहता हूं। सर, मैं कई वर्षों तक कर्नाटक में शासन करना चाहता हूं.....मेरी हिंदी भी ठीक नहीं है...आप मेरे बड़े हैं, मैं आपसे विनती करता हूं।'

पीएम बनने के लिए कैसे तैयार हुए देवगौड़ा ?
देवगौड़ा के मुताबिक जब ज्योति बसु लगातार दबाव बना रहे थे तो उन्होंने उनके पैर छू लिए और आग्रह किया कि उनकी गुजारिश को मान लें। लेकिन, बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री नहीं माने और उनसे कहा, 'मिस्टर गौड़ा, क्या मैं निकलूं और भारत की जनता से कहूं कि हमारे पास वाजपेयी का कोई सेकुलर विकल्प नहीं है? क्या हम अखबारों में सेकुलर प्रधानमंत्री के लिए विज्ञापन दें?' आखिरकार गौड़ा के मुताबिक उन्हें ज्योति बसु की बात माननी पड़ गई।
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